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ED: 158 अनजान किसानों के नाम पर खोले बैंक खाते, 152 करोड़ की धोखाधड़ी, मुआवजे के नाम पर हासिल किए दस्तावेज
Wed, 01 Oct 2025 07:40 PM IST
शिव शुक्ला
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शुक्ला
Updated Wed, 01 Oct 2025 07:40 PM IST
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प्रवर्तन निदेशालय
- फोटो : सोशल मीडिया
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), नागपुर ने 26.09.2025 को महाराष्ट्र के नागपुर और भंडारा जिलों तथा आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत रमण राव बोल्ला, नूतन राकेश सिंह और उनके सहयोगियों से जुड़े 8 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। तलाशी के दौरान भारी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज, संपत्ति से जुड़े कागजात, डिजिटल उपकरण, 10 लाख रुपये नकद, बैंक बैलेंस और बीमा पॉलिसियों सहित चल संपत्तियों को जब्त किया गया है। इसके अलावा 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अचल संपत्तियों की पहचान भी की गई है।
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ईडी ने महाराष्ट्र पुलिस द्वारा आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत रमण राव बोल्ला, नूतन राकेश सिंह और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर इस केस की जांच शुरू की थी। इन लोगों पर तत्कालीन कॉर्पोरेशन बैंक (अब यूनियन बैंक) और किसानों के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप था। कथित धोखाधड़ी की राशि 152.90 करोड़ रुपये थी, जिससे कॉर्पोरेशन बैंक और भोले भाले किसान प्रभावित हुए। ईडी की जांच से पता चला कि रमण राव बोल्ला और उनके सहयोगियों ने कई भोले भाले किसानों से आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज इस झूठे वादे के साथ हासिल किए कि वे उन्हें अलग बैंक खाते खोलने में मदद करेंगे, जो सरकार द्वारा शुरू की गई योजना के अनुसार फसल खराब होने पर मुआवजा पाने के लिए आवश्यक हैं।
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इसके अलावा, कॉर्पोरेशन बैंक की उमरखेड शाखा के तत्कालीन सहायक प्रबंधक संदीप रेवनाथ जंगाले और अन्य आरोपियों के साथ आपराधिक षड्यंत्र रचकर, उन्होंने 158 अनजान किसानों के नाम पर बैंक खाते खोले और कॉर्पोरेशन बैंक की उक्त शाखा से कुछ ऋण राशि (प्रत्येक खाते में 49.00 लाख से 50.00 लाख तक) स्वीकृत करवा ली। इसमें रमण राव स्वयं सभी ऋण खातों के गारंटर बन गए। इसके बाद, आरोपी रमण राव और उनके सहयोगियों ने व्यक्तिगत लाभ के लिए उक्त ऋण राशि का गबन कर लिया। नतीजा, ऋण खाते एनपीए में चले गए और बैंक को कुल 113 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
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इसी प्रकार, श्रीमती नूतन राकेश सिंह, पत्नी राकेश उपेंद्र सिंह के नेतृत्व में एक अन्य सिंडिकेट ने इसी तरह की कार्यप्रणाली अपनाकर और अन्य बैंक अधिकारियों सहित उमरखेड शाखा, कॉर्पोरेशन बैंक के उक्त सहायक प्रबंधक के साथ आपराधिक षड्यंत्र में, नूतन राकेश सिंह को स्वयं गारंटर बनाकर 54 अज्ञानी किसानों के नाम पर कुल 25.07 करोड़ रुपये की ऋण राशि स्वीकृत करवाई। उसके बाद आरोपी ने व्यक्तिगत लाभ के लिए उक्त ऋण राशि का गबन कर लिया, जिससे ऋण खाते एनपीए में चले गए और कॉर्पोरेशन बैंक को कुल 39.43 करोड़ रुपये (23.03 करोड़ की मूल ऋण राशि और 16.40 करोड़ रुपये का ब्याज) का नुकसान हुआ।
ईडी की जांच से पता चला है कि रमन्ना बोल्ला और नूतन राकेश सिंह ने धोखाधड़ी से प्राप्त राशि का उपयोग अपने नाम पर और साथ ही अपने परिवार के सदस्यों और उनके द्वारा लाभकारी रूप से स्वामित्व और नियंत्रण वाली संस्थाओं के नाम पर संपत्तियां हासिल करने के लिए किया था। इसके अलावा, ऋण राशि का उपयोग उनकी अन्य संस्थाओं के नाम पर लिए गए पिछले ऋणों के भुगतान के लिए भी किया गया है। केस में आगे की जाच जारी है।