BSP: क्या चंद्रशेखर की सक्रियता से बसपा को बदलनी पड़ी अपनी रणनीति, अगले 90 दिनों में दिखेंगे ये बड़े बदलाव
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लोकसभा चुनावों के बाद बहुजन समाज पार्टी अपने बिखरे हुए वोटों को समेटने के लिए नई रणनीति बना रही है। हाल में ही जिस तरीके से बसपा ने संगठनात्मक स्तर पर जातिगत समीकरण के आधार से जो पदाधिकारी नियुक्त किए हैं, वे पार्टी की आगे की रणनीति बढ़ा रहे हैं। सियासी जानकारों का कहना है कि अगले कुछ महीनों के भीतर बहुजन समाज पार्टी अपने मूल वोट बैंक को साधने के लिए बड़े व्यापक बदलाव कर सकती है। इसमें सबसे ज्यादा जिम्मेदारी पार्टी दलित और पिछड़ों को देने की तैयारी में है। सियासी गलियारों में कहा यही जा रहा है कि सांसद बने युवा नेता चंद्रशेखर की सक्रियता से पार्टी को अपनी रणनीति में और बड़े बदलाव करने पड़ रहे हैं। हालांकि पार्टी के नेताओं का कहना है कि चुनावी नतीजों के बाद पार्टी अब मजबूती से अपने पुराने जनाधार को पाने की सभी तैयारियां कर चुकी है।
बहुजन समाज पार्टी में लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी में बड़े बदलाव करने के संदेश दे दिए हैं। जिस तरीके से कुछ जिलों की बसपा इकाइयों में 60 फ़ीसदी दलितों को जिम्मेदारियां दी गई हैं, उसे मायावती की अगली रणनीति का अंदाजा हो रहा है। बहुजन समाज पार्टी ने दलितों के बाद पिछड़ों पर बड़ा दांव लगाया है। राजनीतिक जानकार और वरिष्ठ पत्रकार प्रभात कुमार कहते हैं कि मायावती का यह सियासी फैसला अगर पूरे संगठनात्मक स्तर पर बड़े फेरबदल के लिहाज से अपनाया जाता है, तो इसके दूरगामी परिणाम देखे जा सकते हैं। प्रभात कहते हैं कि दरअसल इस लोकसभा चुनाव में जिस तरीके से पीडीए के फॉर्मूले से समाजवादी पार्टी ने एतिहासिक जीत दर्ज की है। उसी तर्ज पर बहुजन समाज पार्टी का शुरुआती संगठनात्मक फेरबदल वाला ढांचा नजर आ रहा है।
बहुजन समाज पार्टी से जुड़े सूत्रों की मानें, तो पार्टी के भीतर इस बात की चर्चा पहले से ही की जा रही है। कहा यही जा रहा है कि आने वाले दिनों में बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती बसपा आंदोलन को मजबूत करने के लिए बड़े बदलाव करने वाली हैं। पार्टी से जुड़े नेताओं का मानना है कि अगले कुछ दिनों के भीतर मायावती की नई रणनीति के मुताबिक ही संगठन के भीतर अन्य पदाधिकारियों की नियुक्तियां की जाएंगी। सियासी जानकार भी मानते हैं कि मायावती को आने वाले चुनावों से पहले अपने संगठन में बड़े बदलाव करने की बेहद आवश्यकता भी है। राजनीतिक जानकार और वरिष्ठ पत्रकार बृजेंद्र शुक्ला कहते हैं कि मायावती ने जिस तरीके से अपने भतीजे आकाश आनंद को दोबारा जिम्मेदारियां दी थीं, उससे अहसास हो गया था कि जल्द ही बदलाव देखने को मिलेंगे। शुक्ल कहते हैं कि हाल में जिला इकाइयों में हुई नियुक्तियों की तस्वीर बताती है कि आने वाले दिनों में बसपा किस तरीके से दलित और पिछड़ों को साध कर अपना पूरा स्ट्रक्चर तैयार करने वाली है।
हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जिस तरीके से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नगीना से सांसद चंद्रशेखर सियासत को आगे बढ़ा रहे हैं, वह बसपा के लिए चिंता का विषय है। बृजेंद्र शुक्ला कहते हैं कि इसमें भी कोई दो राय नहीं होनी चाहिए कि बहुजन समाज पार्टी, जो अपनी रिस्ट्रक्चरिंग कर रही है, उसमें चंद्रशेखर की सक्रियता भी एक प्रमुख वजह है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बहुजन समाज पार्टी के वोट बैंक में अभी तक जितनी सेंधमारी भारतीय जनता पार्टी ने की थी, उसका पूरा हिसाब-किताब इस चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने मिलकर कर दिया। कुल मिलाकर पूरा नुकसान बहुजन समाज पार्टी का ही हुआ। राजनीतिक जानकार प्रभात कुमार कहते हैं कि सिर्फ भाजपा सपा और कांग्रेस ही नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में मायावती के वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी चंद्रशेखर भी करने वाले हैं। यही वजह है कि बहुजन समाज पार्टी को अपने कोर वोट के साथ-साथ सियासी जनाधार बढ़ाने के लिए रणनीति में बड़े बदलाव की आवश्यकता है। उसी आधार पर बहुजन समाज पार्टी अब काम करने में जुट गई है।