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बाबासाहेब पुरंदरे का निधन: छत्रपति शिवाजी महाराज को पहुंचाया घर-घर, महाराष्ट्र में 'शिव शाहिर' के नाम से थे मशहूर

Mon, 15 Nov 2021 06:15 PM IST
सुभाष कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: सुभाष कुमार Updated Mon, 15 Nov 2021 06:15 PM IST
सार

बाबासाहेब पुरंदरे का पूरा नाम बलवंत मोरेश्वर पुरंदरे था। वह देश के एक लोकप्रिय इतिहासकार-लेखक रहने के साथ थिएटर कलाकार भी थे। उन्हें छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन, शासन प्रणाली और व्यवस्था के बारे में अपनी विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है।

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Babasaheb Purandare passed away, the Person who took Chhatrapati Shivaji Maharaj to every house, know why he known as Shiv shahir in Maharashtra 
बाबासाहेब पुरंदरे का आज सोमवार की सुबह निधन हो गया। - फोटो : PTI

विस्तार

भारत के जाने-माने इतिहासकार और लेखक बाबासाहेब पुरंदरे का आज सोमवार की सुबह 5 बजे के करीब निधन हो गया। वे 99 वर्ष के थे और पुणे के दीनानाथ मंगेशकर मेमोरियल अस्पताल में भर्ती थे। अस्पताल प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार पुरंदरे निमोनिया से ग्रसित थे और काफी समय से बिमार भी चल रहे थे। इस कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने के कारण उन्हें वेंटिलेटर पर भी रखा गया। इसके बाद से ही उनकी स्थिति में सुधार नहीं हो सका और वह चल बसे।

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कौन थे बाबासाहब पुरंदरे? 
बाबासाहेब पुरंदरे का पूरा नाम बलवंत मोरेश्वर पुरंदरे था। वह देश के एक लोकप्रिय इतिहासकार-लेखक रहने के साथ थिएटर कलाकार भी थे। उन्हें छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन, शासन प्रणाली और व्यवस्था के बारे में अपनी विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है। बाबा पुरंदरे ने शिवाजी के जीवन से लेकर उनके प्रशासन और उनके काल के किलों पर भी कई किताबें भी लिखीं थी। इसके अलावा उन्होंने छत्रपति शिवाजी के नेतृत्व शैली पर एक लोकप्रिय नाटक- जाणता राजा का भी निर्देशन किया था। उनके अहम योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें साल 2019 में भारत के दूसरे सबसे बड़े सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया था।  
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बाबासाहेब पुरंदरे का जीवन काल और उपलब्धियां
बाबासाहेब पुरंदरे का जन्म महाराष्ट्र में 29 जुलाई 1922 को पुणे तत्कालीन पूना में हुआ था। उन्होंने बहुत कम उम्र में ही छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन से संबंधित कहानियों को लिखना शुरू कर दिया था। इसके अलावा उन्होंने पुणे के पेशवाओं के इतिहास का भी गहन अध्ययन किया था। इन कहानियों के संग्रह को आगे चलकर 'थिनाग्य' नाम दिया गया। इन्हीं कारणों से उन्हें महाराष्ट्र में 'शिव शाहिर' के नाम से भी जाना जाता है। उनके द्वारा लिखी गई कुछ प्रमुख पुस्तकें राजा शिव छत्रपति और केसरी भी हैं। साल 2015 में बाबासाहब पुरंदरे को उनके अहम योगदान के कारण महाराष्ट्र भूषण अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। 
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छत्रपति शिवाजी महाराज को घर-घर तक पहुंचाने का श्रेय
बाबासाहेब पुरंदरे को छत्रपति शिवाजी महाराज की कहानियों को घर-घर तक पहुंचाने का श्रेय दिया जाता है। बाबासाहेब पुरंदरे द्वारा रचित नाटकों में सबसे प्रसिद्ध साल 1985 में आई जाणता राजा है। इस नाटक में छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में बताया गया है। इस नाटक का देश-विदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में हजारों बार मंचन किया गया है और इसमें देश-विदेश के कलाकार भी हिस्सा लेते हैं। इस क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें मध्य प्रदेश सरकार द्वारा साल 2007-2008 के कालिदास सम्मान से सम्मानित किया गया। 

शिवसेना में भी दिया योगदान
बाबासाहेब पुरंदरे ने अपने जीवनकाल में लगभग 12000 से अधिक बार छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर अभिभाषण दिया था। उनकी अन्य पुस्तकें महाराज, लाल महल, पुरंधर, राजगढ़, प्रतापगढ़ , फुलवंती और सावित्री आदि भी हैं। 70 के दशक में उन्होंने बाला साहब ठाकरे के साथ मिलकर शिवसेना के लिए भी अहम योगदान दिया था। इससे पहले साल 2019 में उनकी पत्नी का भी देहांत हो गया था। उनकी पत्नी निर्मला पुरंदरे एक सामाजिक कार्यकर्ता थी। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं और बाल विकास के क्षेत्र में कार्य किया था। 

बाबासाहेब पुरंदरे से जुड़े विवाद
कई दलों ने बाबासाहेब पुरंदरे पर छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन को गलत तरीके से पेश करने का आरोप भी लगाया। जब महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें महाराष्ट्र भूषण सम्मान देने की घोषणा की, तो इसके खिलाफ कई दलों ने हाईकोर्ट में याचिका भी लगाई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं पर ही जुर्माना लगा दिया था। 


पीएम मोदी ने जताया शोक
बाबासाहेब पुरंदरे के निधन पर प्रधानमंत्री मोदी समेत देश भर के राजनेता और हस्तियों ने शोक प्रकट किया है। प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे और उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ समेत कई अन्य ने दुख प्रकट किया है। पीएम मोदी ने कहा- ''दर्द को शब्दों में बयां नहीं कर सकता। बाबासाहेब का जाना इतिहास और संस्कृति की दुनिया में बड़ा शून्य छोड़ गया है। उनका धन्यवाद है कि आने वाली पीढ़ियां छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ी रहेंगी।" पीएम ने आगे कहा, "बाबासाहेब का काम प्रेरणा देने वाला था। मैं जब पुणे दौरे पर गया था तो उनका नाटक जनता राजा देखा, जो कि छत्रपति शिवाजी महाराज पर आधारित था। बाबासाहेब जब अहमदाबाद आते थे, तो भी मैं उनके कार्यक्रमों में हिस्सा लेने जाता था।"  

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