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Ram Temple: 22 जनवरी की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में CJI समेत पांच जज आमंत्रित; अयोध्या विवाद पर सुनाया था फैसला

Fri, 19 Jan 2024 05:28 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Fri, 19 Jan 2024 05:28 PM IST
सार

Ayodhya Ram Temple: 22 जनवरी की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ समेत पांच जजों को आमंत्रित किया गया है। इन जजों ने 100 साल से अधिक पुराने 'अयोध्या विवाद' पर सर्वसम्मति से ऐतिहासिक फैसला फैसला सुनाया था।

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Ayodhya Ram Temple 22 January consecration CJI Chandrachud five SC Judges invited
अयोध्या राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों को निमंत्रण - फोटो : amar ujala graphics

विस्तार

Ayodhya Ram Temple: राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के लिए अनुष्ठान शुरू हो चुका है। रामलला की प्रतिमा पहली बार सामने आई है। इसी बीच एक और बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक 22 जनवरी को होने वाली प्राण प्रतिष्ठा समारोह में सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान प्रधान न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ को भी आमंत्रित किया गया है। सीजेआई समेत सुप्रीम कोर्ट के समेत पांच जजों को आमंत्रित किया गया है। साल 2019 में पांच जजों की पीठ में इन जजों ने बहुचर्चित और 100 साल से भी अधिक पुराने टाइटल सूट / मुकदमे (श्रीराम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद भूमि विवाद) पर सर्वसम्मति से फैसला सुनाया था।

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सुप्रीम कोर्ट की पीठ में कौन जज शामिल थे
गौरतलब है कि नवंबर, 2019 में अयोध्या भूमि विवाद पर फैसला सुनाने वाली पीठ में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के अलावा तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस अशोक भूषण, न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल थे। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सभी पांच जजों के फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हुआ था। शीर्ष अदालत ने मालिकाना हक को लेकर कहा, एक ट्रस्ट का गठन कर विवादित भूमि पर राम मंदिर निर्माण होगा, जबकि मस्जिद के लिए सरकार वैकल्पिक जगह की पहचान कर पांच एकड़ जमीन आवंटित करेगी। अदालत के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए पांच अगस्त, 2020 को भूमि पूजन किया था।
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अयोध्या में लगभग 7000 मेहमान जमा होंगे
गौरतलब है कि 22 जनवरी को आयोजित प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आधिकारिक तौर पर लगभग सात हजार मेहमानों को आमंत्रित किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अलावा कई विदेशी मेहमानों को भी बुलाया गया है। कार्यक्रम के स्तर, वीआईपी प्रोटोकॉल और एयरपोर्ट से जुड़ी जरूरी व्यवस्था के लिए भी सरकार ने खास तैयारियां की हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अयोध्या के अलावा कई पड़ोसी राज्यों के हवाईअड्डों का इस्तेमाल भी किया जाना है।

22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा के बाद श्रद्धालुओं को दर्शन कब?
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास ने बताया है कि 22 जनवरी की प्राण प्रतिष्ठा के बाद आम श्रद्धालु भी दर्शन कर सकेंगे। हालांकि, न्यास ने लोगों से अगली सूचना का इंतजार करने की अपील भी की है। अयोध्या में किसी भी तरह की अराजक स्थिति से बचने के लिए खुद पीएम मोदी ने भी श्रद्धालुओं से सरकार, अयोध्या प्रशासन और न्यास के निर्देशों के मुताबिक दर्शन की योजना बनाने की अपील की है। उन्होंने लोगों ने अपने घरों में श्रीराम ज्योति जलाने की अपील भी की है।

अयोध्या से निमंत्रण पाने वाले सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों को जानिए

जस्टिस रंजन गोगोई (सेवानिवृत्त): अयोध्या भूमि विवाद पर  ऐतिहासिक फैसला सुनाने वाली संविधान पीठ की अध्यक्षता करने वाले तत्कालीन चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति रंजन गोगोई का जन्म 18 नवंबर, 1954 को हुआ। नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए। राज्यसभा सांसद भी बने। अयोध्या के अलावा जम्मू-कश्मीर और राफेल सौदे जैसे संवेदशील मामलों पर भी जस्टिस रंजन गोगोई ने फैसला सुनाया।
Ayodhya Case Verdict 2019: Ayodhya Ram Mandir Babri Masjid Supreme Court Judges Profile
जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े (अब सेवानिवृत्त): अयोध्या भूमि विवाद पर फैसला सुनाने वाली पांच जजों की पीठ में शामिल दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस शरद अवरिंद बोबड़े थे। इनका जन्म 24 अप्रैल, 1956 को महाराष्ट्र के नागपुर में हुआ। 2013 में जस्टिस बोबड़े सुप्रीम कोर्ट जज बने। अप्रैल, 2021 में रिटायर होने से पहले जस्टिस बोबड़े ने लगभग दो साल तक चीफ जस्टिस के रूप में भी सेवाएं दीं।


Ayodhya Case Verdict 2019: Ayodhya Ram Mandir Babri Masjid Supreme Court Judges Profile

जस्टिस अशोक भूषण (अब सेवानिवृत्त): अयोध्या भूमि विवाद पर लगातार 40 दिनों तक  सुनवाई करने वाल संविधान पीठ में शामिल न्यायमूर्ति अशोक भूषण का जन्म 5 जुलाई 1956 को उत्तर प्रदेश के जौनपुर में हुआ था। मई, 2016 में सुप्रीम कोर्ट जज बने जस्टिस अशोक भूषण जुलाई, 2021 में रिटायर हुए। अक्तूबर, 2021 में इन्हें नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। 

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (अब CJI): अयोध्या टाइटल सूट पर फैसला सुनाने वाली पांच जजों की पीठ में शामिल रहे न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ 13 मई 2016 को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने। 31 अक्तूबर 2013 के बाद करीब तीन साल तक इन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी सेवाएं दीं। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ नवंबर, 2024 तक चीफ जस्टिस रहेंगे। कानूनविद होने के अलावा इनकी ख्याति इसलिए भी है क्योंकि इन्होंने जज के रूप में कानून की सटीक व्याख्या करते हुए अपने पिता के फैसले को भी पलट दिया था।
जस्टिस एस अब्दुल नजीर (रिटायरमेंट के बाद आंध्र प्रदेश राज्यपाल): अयोध्या के विवादित भूखंड को लेकर विवाद 100 साल से अधिक समय तक अदालतों का चक्कर काटने वाले इस मुकदमे का फैसला सुनाने वाली पीठ का हिस्सा रहे जस्टिस एस अब्दुल नजीर का जन्म 5 जनवरी, 1958 को कर्नाटक के एक गांव बेलूवई में हुआ था। फरवरी, 2017 में सुप्रीम कोर्ट जज बने जस्टिस अब्दुल नजीर देश के केवल तीसरे ऐसे जज रहे, जिन्हें किसी हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बने बिना ही सुप्रीम कोर्ट जज नियुक्त कर दिया गया।
Ayodhya Case Verdict 2019: Ayodhya Ram Mandir Babri Masjid Supreme Court Judges Profile
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