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अयोध्या मामले ने सुब्रत रॉय को दी राहत, आठ महीने बाद भी नहीं हुई सुनवाई

Sun, 13 Oct 2019 12:26 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Sun, 13 Oct 2019 12:26 PM IST
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Ayodhya case has given unexpected relief to Subrata Roy as it delayed by nearly eight months
सुब्रत रॉय सहारा (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

उच्चतम न्यायालय में इस समय अयोध्या विवादित जमीन मामले की नियमित सुनवाई हो रही है। इस सुनवाई ने सहारा समूह के अध्यक्ष सुब्रत रॉय सहारा को राहत की सांस दी है। लगभग आठ महीने से वह अदालत के सामने पेश नहीं हुए हैं। 2012 के आदेश के अनुसार वह 25,781 करोड़ रुपये जमा करने से चूके हैं जिसकी सुनवाई होनी है। उनके मामले को अदालत में सूचीबद्ध नहीं किया गया है। इस तरह उन्हें व्यक्तिगत पेशी से छूट मिल गई है।

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31 जनवरी को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और जस्टिस एके सीकरी और संजय किशन कॉल की पीठ ने रॉय को 28 फरवरी को अदालत के सामने पेश होने का निर्देश दिया था। पीठ ने कहा था, 'हम यह स्पष्ट करते हैं कि अवमानना करने वाले अदालत में पेश हों ताकि अदालत उचित आदेश पारित कर सके। जिससे कानून अपना कार्य करे और किसी निष्कर्ष पर पहुंचे।'
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टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार उच्चतम न्यायालय ने 31 अगस्त, 2012 को अदालत ने सहारा को जमाकर्ताओं की पूंजी को ब्याज सहित मार्केट रेग्युलेटर सेबी के पास जमा कराने का आदेश दिया था। सहारा ने सहारा रियल एस्टेट और सहारा हाउसिंग के जरिए निवेशकों से तीन करोड़ रुपये लिए थे। अपने आदेश का पालन न होने पर 14 मार्च 2014 को शीर्ष अदालत ने सुब्रत रॉय और सहारा ग्रुप के 2 अन्य निदेशकों को अवमानना के लिए जेल भेज दिया। 
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रॉय मई 2016 तक जेल में बंद रहे थे। जहां से उन्हें अदालत द्वारा तय की गई समयसीमा तक राशि जमा करने का वादा करने पर जमानत मिल गई थी। 31 जनवरी को सेबी के वकील प्रताप वेणुगोपाल ने अदालत को बताया कि सहारा समूह ने 25,781 करोड़ रुपये में से 5,781 करोड़ रुपये की किस्त जमा नहीं की है। जिसके बाद अदालत ने उन्हें 28 फरवरी को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए कहा था। 


इसके बाद अदालत ने रॉय को 28 फरवरी को व्यक्तिगत तौर पर पेश होने का आदेश दिया। बाद में कोर्ट ने 28 फरवरी की सुनवाई रद्द कर दी लेकिन उन्हें कड़ी फटकार लगाई। छह मार्च को जस्टिस सीकरी सेवानिवृत्त हो गए हैं। जिसके बाद अब मुख्य न्यायाधीश को सुनवाई के लिए एक नई पीठ का गठन करना होगा।

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