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खामेनेई ने बंकर में जाने से क्यों किया इंकार?: सुरक्षा टीम की सलाह भी ठुकराई, ईरानी प्रतिनिधि ने बताई कहानी
Sun, 15 Mar 2026 08:14 AM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Sun, 15 Mar 2026 08:14 AM IST
सार
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने युद्ध के खतरे के बावजूद सुरक्षित बंकर में जाने से मना कर दिया था। उन्होंने कहा था कि, वे तभी सुरक्षित जगह जाएंगे जब देश के सभी 9 करोड़ नागरिकों के लिए ऐसा इंतजाम हो।
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ईरान के सर्वोच्च नेता के विशेष प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारत की राजधानी नई दिल्ली में हुए एक कार्यक्रम के दौरान भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद खामेनेई ने तेहरान में अपना घर छोड़कर किसी सुरक्षित जगह, बंकर में जाने से साफ मना कर दिया था।
क्या बोले इरानी प्रतिनिधि?
डॉ. इलाही के मुताबिक, सुरक्षा टीम ने खामेनेई से बार-बार गुजारिश की थी कि वे किसी गुप्त स्थान पर चले जाएं। उनका घर और दफ्तर सबको पता था, इसलिए उन पर हमले का खतरा बहुत ज्यादा था। लेकिन 37 वर्षों से देश की कमान संभाल रहे खामेनेई अपनी बात पर अड़े रहे। उन्होंने सुरक्षा अधिकारियों से कहा कि अगर वे ईरान के 9 करोड़ लोगों के लिए सुरक्षित शेल्टर का इंतजाम कर सकते हैं, तभी वे अपना घर छोड़कर कहीं और जाएंगे।
ये भी पढ़ें: West Asia Conflict: पश्चिम एशिया के समुद्री मार्गों पर हमले, अब तक 17 जहाजों को बनाया गया निशाना; जानें सबकुछ
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इतना ही नहीं, खामेनेई ने अपने घर के नीचे खास बंकर बनाने की अनुमति भी नहीं दी। उन्होंने अधिकारियों को जवाब दिया कि वे अपने लिए कोई विशेष सुविधा नहीं चाहते। उनका मानना है कि अगर देश के हर नागरिक के लिए बंकर बन सकता है, तभी वे अपने लिए भी ऐसा कुछ बनाने की इजाजत देंगे।
नहीं मानें किसी की भी बात
खामेनेई के परिवार ने भी इस बारे में अपनी बात रखी। परिवार के अनुसार, खामेनेई का कहना था कि एक नेता को हमेशा अपनी जनता और गरीबों के बराबर ही रहना चाहिए। अगर कोई नेता अपने लिए अलग और खास जीवन जीने लगे, तो वह देश का नेतृत्व करने के लायक नहीं रहता।
चर्चा के दौरान डॉ. इलाही ने इस्लाम में शहादत के महत्व पर भी बात की। उन्होंने बताया कि इस्लामी शिक्षाओं में शहादत को सबसे ऊंचा दर्जा और सम्मान माना जाता है। खामेनेई खुद भी लंबे समय से शहादत पाने की इच्छा रखते थे और इसे अपने लिए सबसे बड़ा पुरस्कार मानते हैं। यही वजह है कि मौत का खतरा होने के बाद भी उन्होंने अपनी सादगी और जनता के साथ खड़े रहने का फैसला नहीं बदला।
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क्या बोले इरानी प्रतिनिधि?
डॉ. इलाही के मुताबिक, सुरक्षा टीम ने खामेनेई से बार-बार गुजारिश की थी कि वे किसी गुप्त स्थान पर चले जाएं। उनका घर और दफ्तर सबको पता था, इसलिए उन पर हमले का खतरा बहुत ज्यादा था। लेकिन 37 वर्षों से देश की कमान संभाल रहे खामेनेई अपनी बात पर अड़े रहे। उन्होंने सुरक्षा अधिकारियों से कहा कि अगर वे ईरान के 9 करोड़ लोगों के लिए सुरक्षित शेल्टर का इंतजाम कर सकते हैं, तभी वे अपना घर छोड़कर कहीं और जाएंगे।
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इतना ही नहीं, खामेनेई ने अपने घर के नीचे खास बंकर बनाने की अनुमति भी नहीं दी। उन्होंने अधिकारियों को जवाब दिया कि वे अपने लिए कोई विशेष सुविधा नहीं चाहते। उनका मानना है कि अगर देश के हर नागरिक के लिए बंकर बन सकता है, तभी वे अपने लिए भी ऐसा कुछ बनाने की इजाजत देंगे।
नहीं मानें किसी की भी बात
खामेनेई के परिवार ने भी इस बारे में अपनी बात रखी। परिवार के अनुसार, खामेनेई का कहना था कि एक नेता को हमेशा अपनी जनता और गरीबों के बराबर ही रहना चाहिए। अगर कोई नेता अपने लिए अलग और खास जीवन जीने लगे, तो वह देश का नेतृत्व करने के लायक नहीं रहता।
चर्चा के दौरान डॉ. इलाही ने इस्लाम में शहादत के महत्व पर भी बात की। उन्होंने बताया कि इस्लामी शिक्षाओं में शहादत को सबसे ऊंचा दर्जा और सम्मान माना जाता है। खामेनेई खुद भी लंबे समय से शहादत पाने की इच्छा रखते थे और इसे अपने लिए सबसे बड़ा पुरस्कार मानते हैं। यही वजह है कि मौत का खतरा होने के बाद भी उन्होंने अपनी सादगी और जनता के साथ खड़े रहने का फैसला नहीं बदला।
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