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Hyderabad: हैदराबाद विश्वविद्यालय में लेखिका नीरजा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, लेफ्ट छात्र संगठनों ने किया घेराव
Wed, 21 Jan 2026 09:35 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: राहुल कुमार
Updated Wed, 21 Jan 2026 09:35 PM IST
सार
हैदराबाद विश्वविद्यालय में प्रख्यात लेखिका नीरजा माधव को मंगलवार को विरोध और हिंसक नारेबाजी का सामना करना पड़ा। वामपंथी संगठनों द्वारा उनकी कार के घेराव किया गया और उनके खिलाफ नारेबाजी की।
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प्रख्यात लेखिका नीरजा माधव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हैदराबाद विश्विविद्यालय में 20 जनवरी को आयोजित एक सेमिनार के दौरान प्रख्यात लेखिका नीरजा माधव को विरोध का सामना करना पड़ा। आरोप है कि सेमिनार समाप्त होने के बाद वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े छात्रों ने उनका घेराव कर नारेबाजी की। जानकारी के अनुसार, नीरजा माधव को विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में थर्ड जेंडर विमर्श पर व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया गया था। आयोजकों के अनुरोध पर उन्होंने 'भारतीय संस्कृति और थर्ड जेंडर' विषय पर भी संबोधन दिया।
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सवाल-जवाब के बाद शुरू हुई विवाद
व्याख्यान के बाद प्रश्नोत्तर सत्र में कुछ छात्रों ने समलैंगिकता और मनुस्मृति से जुड़े सवाल उठाए। कुछ छात्रों ने होमो सेक्सुअल और समलैंगिकता पर आधारित प्रश्न करते हुए कहा कि मनुस्मृति में समलैंगिकता का संदर्भ है, जिसके आधार पर उन्हें कानूनी मान्यता मिली है। उनके प्रश्न का जवाब देते हुए नीरजा माधव ने जब कहा कि समलैंगिकता और होमोसेक्सुअलिटी किसी की मानसिक आवश्यकता हो सकती है और आपकी अपनी इच्छा भी हो सकती है लेकिन यह थर्ड जेंडर जैसी समस्या नहीं है। थर्ड जेंडर प्रकृति के एक क्रूर मजाक के कारण अभिशप्त जीवन जीते हैं।
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इसके बाद नीरजा माधव ने सभागार में उपस्थित छात्रों से यह भी पूछा कि आप लोगों में से ओरिजिनल मनुस्मृति को किसने पढ़ा है, कृपया हाथ उठाएं। कोई हाथ नहीं उठा। किसी ने नहीं पढ़ा था। नीरजा माधव ने कहा कि किसी भी पुस्तक, ग्रंथ या शास्त्र का खंडन करने से पहले उसका अध्ययन करना आवश्यक होता है।
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छात्रों ने कार को घेरा
सत्र समाप्त होने के एक घंटे के भीतर ही विश्वविद्यालय के आइसा और एसएफआई संगठन के सैकड़ो छात्रों ने नारेबाजी करते हुए नीरजा माधव की कार को घेर लिया और उनसे माफी मांगने की जिद करने लगे। नीरजा माधव ने कार से निकलकर उनकी इस मांग का प्रतिरोध किया और कहा कि जब मैंने कोई गलत बात कही ही नहीं तो फिर किस बात के लिए माफी? यह तो संभव ही नहीं है कि मैं माफी मांगू। मैंने जो भी बातें कही हैं ,वह सत्य कहीं है। आपकी असहमति हो सकती है। जिसके बाद छात्रों ने नारेबाजी शुरू कर दी।
करीब 15–20 मिनट बाद विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मी मौके पर पहुंचे और नीरजा माधव को सुरक्षित बाहर निकाला। घटना की निंदा करते हुए वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक प्रो.संजय द्विवेदी ने कहा कि यह असहिष्णुता का गंभीर उदाहरण है। उन्होंने कहा कि किसी लेखक या वक्ता की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बाधित करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और विश्वविद्यालय परिसरों में ऐसी मानसिकता चिंताजनक है।