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Auroville: ऑरोविल फाउंडेशन की दक्षिणी रेलवे के साथ साझेदारी, प्रदूषण-मुक्त करना लक्ष्य
Sun, 19 Oct 2025 05:47 AM IST
लव गौर
अमर उजाला ब्यूरो, ऑरोविल
अमर उजाला ब्यूरो, ऑरोविल
Published by: लव गौर
Updated Sun, 19 Oct 2025 05:47 AM IST
सार
Auroville Pollution Free: ऑरोविल में प्रदूषण-मुक्त और सामुदायिक केंद्रित परिवहन प्रणाली स्थापित करना लक्ष्य है, जिसके तहत ऑरोविल फाउंडेशन की दक्षिणी रेलवे के साथ साझेदारी हुई है।
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साइट का दौरा करने पहुंचे ऑरोविल फाउंडेशन के अधिकारी।
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
ऑरोविल फाउंडेशन ने दक्षिणी रेलवे (तिरुचिरापल्ली मंडल) के साथ मिलकर सतत गतिशीलता की दिशा में एक शनिवार को एक अभूतपूर्व कदम उठाया है। इस साझेदारी का लक्ष्य ऑरोविल में प्रदूषण-मुक्त और सामुदायिक-केंद्रित परिवहन प्रणालियों को स्थापित करना है। ऑरोविल फाउंडेशन और दक्षिणी रेलवे के बीच इस साझेदारी के तहत दो मुख्य परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं।
पहली, किंडरगार्टन जोन में टॉय ट्रेन में बच्चों के लिए 595 मीटर की दूरी पर एक धीमी गति की टॉय ट्रेन प्रणाली होगी। यह सौंदर्य और आध्यात्मिकता को समाहित करते हुए बच्चों में आश्चर्य और स्वतंत्रता की भावना को बढ़ाएगी। दूसरी परियोजना क्राउन ट्रामवे में ऑरोविल के केंद्रीय 2.355 किमी के क्राउन रिंग पर एक इलेक्ट्रिक/सौर-ऊर्जा संचालित ट्रामवे चलेगी। यह धीमी गति की प्रणाली सामूहिक आवाजाही को बढ़ावा देगी और व्यक्तिगत वाहनों पर निर्भरता कम करेगी।
परियोजनाओं को गति देने के लिए, ऑरोविल फाउंडेशन के डॉ. जी सीतारमन और दक्षिणी रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक बालक राम नेगी समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने साइट का दौरा किया।उन्होंने मातृमंदिर में ध्यान भी किया, जो विकास को आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने के ऑरोविल के दर्शन को दर्शाता है। वर्चुअल परामर्श में, फाउंडेशन की सचिव डॉ. जयंती एस रवि (आईएएस) ने भारतीय रेलवे से इन राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं को जल्द लागू करने का आग्रह किया।
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ऑरोविल रेलवे की इंजीनियरिंग विशेषज्ञता का उपयोग ट्रैक डिजाइन, सुरक्षा मानकों और नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण के लिए करेगा। ये परियोजनाएं भारत में कलात्मक, समुदाय-केंद्रित और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन प्रणालियों के लिए एक नया बेंचमार्क स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगी।
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पहली, किंडरगार्टन जोन में टॉय ट्रेन में बच्चों के लिए 595 मीटर की दूरी पर एक धीमी गति की टॉय ट्रेन प्रणाली होगी। यह सौंदर्य और आध्यात्मिकता को समाहित करते हुए बच्चों में आश्चर्य और स्वतंत्रता की भावना को बढ़ाएगी। दूसरी परियोजना क्राउन ट्रामवे में ऑरोविल के केंद्रीय 2.355 किमी के क्राउन रिंग पर एक इलेक्ट्रिक/सौर-ऊर्जा संचालित ट्रामवे चलेगी। यह धीमी गति की प्रणाली सामूहिक आवाजाही को बढ़ावा देगी और व्यक्तिगत वाहनों पर निर्भरता कम करेगी।
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परियोजनाओं को गति देने के लिए, ऑरोविल फाउंडेशन के डॉ. जी सीतारमन और दक्षिणी रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक बालक राम नेगी समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने साइट का दौरा किया।उन्होंने मातृमंदिर में ध्यान भी किया, जो विकास को आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने के ऑरोविल के दर्शन को दर्शाता है। वर्चुअल परामर्श में, फाउंडेशन की सचिव डॉ. जयंती एस रवि (आईएएस) ने भारतीय रेलवे से इन राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं को जल्द लागू करने का आग्रह किया।
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ऑरोविल रेलवे की इंजीनियरिंग विशेषज्ञता का उपयोग ट्रैक डिजाइन, सुरक्षा मानकों और नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण के लिए करेगा। ये परियोजनाएं भारत में कलात्मक, समुदाय-केंद्रित और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन प्रणालियों के लिए एक नया बेंचमार्क स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगी।