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अट्टहास सम्मान : पद्मश्री डीपी सिन्हा व प्रेम जनमेजय शिखर सम्मान से नवाजे गए, अनुज खरे व पंकज प्रसून को युवा सम्मान

Mon, 28 Mar 2022 10:45 AM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Mon, 28 Mar 2022 10:45 AM IST
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Attahaas Samman: Padma Shri DP Sinha and Prem Janmejay were awarded with Shikhar Samman, Anuj Khare and Pankaj Prasoon were awarded Youth Award
अट्टहास सम्मान से नवाज गए वरिष्ठ व्यंग्यकार - फोटो : self

दिल्ली के हिंदी भवन में आयोजित एक समारोह में देश के दिग्गज व्यंग्यकारों को वर्ष 2019 और 2020 के 'अट्टहास सम्मान' से नवाजा गया। खचाखच भरे सभागार में   पद्मश्री दया प्रकाश सिन्हा व प्रेम जनमेजय को अट्टहास शिखर सम्मान से और अनुज खरे व पंकज प्रसून को अट्टहास युवा सम्मान प्रदान किया गया। 

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पिछले 40 वर्षों से दिया जा रहा अट्टहास सम्मान व्यंग्य के क्षेत्र का एक प्रतिष्ठित पुरस्कार है। पूर्व में यह ख्यात लेखकर मनोहर श्याम जोशी, शरद जोशी, हुल्लड़ मुरादाबादी, अशोक चक्रधर, सुरेंद्र शर्मा सहित तमाम व्यंग्यकारों को दिया जा चुका है। 
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जब तक मानव सभ्यता रहेगी, तब तक रंगमंच रहेगा : सिन्हा
अट्टहास शिखर सम्मान-2019 से सम्मानित वरिष्ठ नाटककार पद्मश्री दया प्रकाश सिन्हा ने इस मौके पर बोले, 'कहा जाता है कि फिल्म, दूरदर्शन, टीवी सीरियल के युग में नाटक विधा अप्रासंगिक हो गई है, यह सत्य नहीं है। फिल्म में मनुष्य अपने कद से बहुत बड़ा दिखाई देता है। टीवी में वह अपने कद से बहुत छोटा दिखाई देता है। केवल थिएटर में वह अपने कद में दिखाई देता है। जब तक मानव सभ्यता रहेगी तब तक रंगमंच जीवंत रहेगा।' 
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व्यंग्य का पथ बहुत दुर्गम : प्रेम जनमेजय
अट्टहास शिखर सम्मान-2020 से सम्मानित वरिष्ठ व्यंग्यकार प्रेम जनमेजय ने कहा 'व्यंग्य का पथ बहुत दुर्गम है इस पर चलना बहुत कठिन है। जितना चलना  कठिन है, उससे ज्यादा व्यंग्यकारों को सम्मानित करना कठिन है। लेकिन सम्मान उत्प्रेरक होने चाहिए लक्ष्य नहीं। व्यंग्य लेखन के साथ-साथ उस पर विमर्श बहुत आवश्यक है।' 

कुर्सी का पानी से गहरा नाता : पंकज प्रसून
अट्टहास युवा सम्मान-2019 से सम्मानित लखनऊ के व्यंग्यकार पंकज प्रसून ने कहा, 'व्यंग्य हमेशा सत्ता के विरुद्ध ही लिखा जाता है, चाहे वह राजनीतिक सत्ता हो ,चाहे पारिवारिक या फिर सामाजिक। उन्होंने कटाक्ष करते हुए सुनाया- कुर्सी का पानी से गहरा नाता है। कुर्सी छिनते  ही आंखों में पानी भर जाता है और कुर्सी मिलते ही आंखों का पानी मर जाता है।' 

लेखक-श्रोता अनुपात चिंतनीय : अनुज खरे
अट्टहास युवा सम्मान-2020 से सम्मानित भोपाल के व्यंग्यकार अनुज खरे ने कहा- 'व्यंग्य  की क्वालिटी को लेकर काफी चिंता है देश में। इस समय प्रति एकड़ में 200 से ऊपर व्यंग्यकार पाए जा रहे हैं। लेखक ज्यादा हैं, श्रोता कम हैं। लेखक और श्रोता का यह अनुपात भारी चिंता का विषय है।'

इन रचनाकारों का भी सम्मान
समारोह में डॉक्टर कीर्ति काले को हरिशंकर परसाई पुरस्कार, इलाहाबाद के राजेश श्रीवास्तव को महा कवि बिहारी सम्मान, आभा सिंह को शरद जोशी सम्मान, भारती पाठक को रामचंद्र शुक्ल सम्मान दिया गया। लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान लखनऊ के वरिष्ठ लेखक आलोक शुक्ला, प्रसिद्ध  भूवैज्ञानिक दीपक श्रीवास्तव, सुभारती विश्वविद्यालय के कुलाधिपति स्तुति कक्कड़, वरिष्ठ पत्रकार गोपाल मित्र, डॉ एस के शुक्ला, डॉ मधु आचार्य आशावादी एवं रजनीकांत वशिष्ठ को प्रदान किया गया। वरिष्ठ व्यंग्यकार सुभाष चंदर ने अखबारों में बंद होते व्यंग्य के स्तम्भों  पर चिंता जताते हुए कहा कि यह स्थिति व्यंग्य जगत के लिए सुखद नहीं है। व्यंग्य को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचना चाहिए। 

कबीर पहले व्यंग्य कवि : उपाध्याय
माध्यम, एनसीआर एवं दिल्ली के अध्यक्ष राम किशोर उपाध्याय के कहा व्यंग्य लेखन साहित्य का एक अपरिहार्य अस्त्र है जो हमारी संवेदना को व्याप्त विसंगतियों के विरुद्ध उत्तेजित कर चेतना का भाव जगाता है। व्यंग्य कटु हो सकता है किंतु अहितकर नहीं। यह सुधारात्मक कार्य है। विश्व ने अनेक हास्य और व्यंग्यकारों को पैदा किया है। हर भाषा में व्यंग्य लिखा गया है। संत कबीर हिंदी के प्रथम व्यंग्य कवि हुए। उनके दोहे समाज की विसंगतियों पर प्रहार करते हैं और आज भी प्रासंगिक हैं।  

माध्यम के महासचिव एवं वरिष्ठ पत्रकार अनूप श्रीवास्तव ने सभी सम्मानितों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसे सुधी साहित्यकारों के सहयोग से ही अट्टहास सम्मान विगत 40 वर्षों से अनवरत सफलतापूर्वक चल रहा है। डीपी सिन्हा को वर्ष 2019 के लिए अट्टहास शिखर सम्मान की घोषणा के लगभग 15 दिन बाद ही पद्मश्री और सहित्य अकादमी की घोषणा भारत सरकार द्वारा की गई।  


समारोह में माध्यम दिल्ली, एनसीआर के अध्यक्ष राम किशोर उपाध्याय के व्यंग्य  संग्रह 'मूर्खता के महर्षि'  एवं भारती पाठक के यात्रा वृतांत 'घुमक्कड़' एवं कीर्ति काले के व्यंग्य संग्रह 'ओ त्तेरी की'  का  लोकार्पण किया गया।  कार्यक्रम का संचालन आलोक शुक्ला ने किया। इस अवसर पर माध्यम के अध्यक्ष कप्तान सिंह, व्यंग्यकार आलोक पुराणिक, कमलेश पांडे सहित कई गणमान्य लेखक उपस्थित थे। 

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