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Atishi: ब्रिटेन जाने के लिए क्यों कोर्ट पहुंचीं आतिशी, जानें मंत्रियों को विदेश यात्रा के लिए क्या हैं नियम?
Thu, 08 Jun 2023 08:21 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Thu, 08 Jun 2023 08:21 PM IST
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आतिशी
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
दिल्ली की शिक्षा मंत्री आतिशी मार्लेना को आधिकारिक विदेश यात्रा के लिए ब्रिटेन जाने की आवश्यक मंजूरी मिल गई है। केंद्र सरकार ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में कहा कि आतिशी चाहें तो डिप्लोमेटिक वीजा के लिए तत्काल आवेदन कर सकती हैं। इसमें कोई बाधा या रुकावट नहीं है। बता दें कि 15 जून को आतिशी कैंब्रिज यूनिवर्सिटी कॉन्फ्रेंस में शामिल होंगी।
Delhi high court
- फोटो :
फाइल फोटो
आतिशी अपनी यात्रा के लिए कोर्ट क्यों गईं?
15 जून को आयोजित होने वाले ‘इंडिया ऐट 100 : टूवर्ड्स बिकमिंग ए ग्लोबल लीडर’ विषय पर एक सम्मेलन को संबोधित करने के लिए कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने आतिशी को आमंत्रित किया है। मंगलवार को उन्होंने अदालत का रुख किया और सरकार को यह निर्देश देने की मांग की कि बहुत देर होने से पहले उन्हें 'राजनीतिक मंजूरी' देने पर फैसला किया जाए। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सभी मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को विदेश जाने से पहले केंद्र से राजनीतिक मंजूरी लेनी होती है।
आतिशी की याचिका में कहा गया है कि यह यात्रा दिल्ली सरकार की शिक्षा, स्वास्थय जैसे मुद्दों के लिए महत्वपूर्ण है। याचिका में तर्क दिया गया है कि विवेकाधीन आधार पर विदेश यात्रा के अधिकार को प्रतिबंधित करना उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन है।
याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार ने पिछले महीने यात्रा के लिए प्रशासनिक मंजूरी दी थी। केंद्र सरकार उपराज्यपाल द्वारा प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के बाद प्रश्नों और स्पष्टीकरण के साथ केवल जवाब दे रही है। इस प्रकार वीजा के लिए आवेदन करने सहित पूरी प्रक्रिया में देरी हो रही है।
प्रस्ताव आगे की मंजूरी की प्रक्रिया के लिए केंद्र सरकार के अधिकारियों को भेजा गया था। 10 दिन से अधिक हो गए हैं और अभी तक उसे कोई मंजूरी जारी नहीं की गई है। अब इसमें देरी वीजा और अन्य औपचारिकताओं के न मिलने का कारण होगी।
15 जून को आयोजित होने वाले ‘इंडिया ऐट 100 : टूवर्ड्स बिकमिंग ए ग्लोबल लीडर’ विषय पर एक सम्मेलन को संबोधित करने के लिए कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने आतिशी को आमंत्रित किया है। मंगलवार को उन्होंने अदालत का रुख किया और सरकार को यह निर्देश देने की मांग की कि बहुत देर होने से पहले उन्हें 'राजनीतिक मंजूरी' देने पर फैसला किया जाए। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सभी मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को विदेश जाने से पहले केंद्र से राजनीतिक मंजूरी लेनी होती है।
आतिशी की याचिका में कहा गया है कि यह यात्रा दिल्ली सरकार की शिक्षा, स्वास्थय जैसे मुद्दों के लिए महत्वपूर्ण है। याचिका में तर्क दिया गया है कि विवेकाधीन आधार पर विदेश यात्रा के अधिकार को प्रतिबंधित करना उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन है।
याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार ने पिछले महीने यात्रा के लिए प्रशासनिक मंजूरी दी थी। केंद्र सरकार उपराज्यपाल द्वारा प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के बाद प्रश्नों और स्पष्टीकरण के साथ केवल जवाब दे रही है। इस प्रकार वीजा के लिए आवेदन करने सहित पूरी प्रक्रिया में देरी हो रही है।
प्रस्ताव आगे की मंजूरी की प्रक्रिया के लिए केंद्र सरकार के अधिकारियों को भेजा गया था। 10 दिन से अधिक हो गए हैं और अभी तक उसे कोई मंजूरी जारी नहीं की गई है। अब इसमें देरी वीजा और अन्य औपचारिकताओं के न मिलने का कारण होगी।
दिल्ली मंत्री आतिशी
- फोटो :
अमर उजाला
विदेश यात्रा करने के लिए मंत्रियों को कौन से नियम फॉलो करने होते हैं?
2015 के कैबिनेट सचिवालय के एक सर्कुलर के मुताबिक, कैबिनेट सचिवालय और विदेश मंत्रालय को राज्यों//केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों के प्रस्तावित विदेश दौरे, चाहे आधिकारिक या निजी, के बारे में सूचित किया जाना अनिवार्य है। इसके साथ ही पूर्व राजनीतिक मंजूरी और एफसीआरए (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) मंजूरी भी अनिवार्य है। आवेदन की एक प्रति सचिव, आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) को भेजी जानी होती है।
आतिशी के मामले में, सरकार के वकील ने बुधवार को न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह को बताया कि राजनीतिक मंजूरी दे दी गई है और आगे की मंजूरी के लिए प्रस्ताव डीईए को भेजा गया है। उधर सरकार के वकील ने भी सहमति व्यक्त की कि एक बार राजनीतिक मंजूरी मिलने के बाद किसी विभाग की मंजूरी नहीं जरूरी होती।
2015 के कैबिनेट सचिवालय के एक सर्कुलर के मुताबिक, कैबिनेट सचिवालय और विदेश मंत्रालय को राज्यों//केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों के प्रस्तावित विदेश दौरे, चाहे आधिकारिक या निजी, के बारे में सूचित किया जाना अनिवार्य है। इसके साथ ही पूर्व राजनीतिक मंजूरी और एफसीआरए (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) मंजूरी भी अनिवार्य है। आवेदन की एक प्रति सचिव, आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) को भेजी जानी होती है।
आतिशी के मामले में, सरकार के वकील ने बुधवार को न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह को बताया कि राजनीतिक मंजूरी दे दी गई है और आगे की मंजूरी के लिए प्रस्ताव डीईए को भेजा गया है। उधर सरकार के वकील ने भी सहमति व्यक्त की कि एक बार राजनीतिक मंजूरी मिलने के बाद किसी विभाग की मंजूरी नहीं जरूरी होती।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची
- फोटो :
ANI
क्या है राजनीतिक मंजूरी?
राजनीतिक मंजूरी विदेश मंत्रालय से मिलती है। यह न केवल लोक सेवकों के लिए बल्कि किसी भी सरकारी कर्मचारी के लिए आवश्यक है जो विदेश जाना चाहता है। इस मंजूरी के बिना कोई भी लोक सेवक विदेश यात्रा नहीं कर सकता है। विदेश मंत्रालय को हर महीने राजनीतिक मंजूरी के लिए सैकड़ों अनुरोध मिलते हैं। 2016 से आवेदन epolclearance.gov.in पोर्टल पर किया जा सकता है।
राजनीतिक मंजूरी पर निर्णय कई बिंदुओं के आधार पर लिया जाता है। इसमें कार्यक्रम की प्रकृति, अन्य देशों से भागीदारी का स्तर, आमंत्रण की प्रकृति और मेजबान देश के साथ भारत के संबंध शामिल हैं। मंत्रालय के विभिन्न प्रभागों के बीच समन्वय के बाद आवेदनों पर कार्रवाई की जाती है और उन्हें मंजूरी दी जाती है।
राजनीतिक मंजूरी विदेश मंत्रालय से मिलती है। यह न केवल लोक सेवकों के लिए बल्कि किसी भी सरकारी कर्मचारी के लिए आवश्यक है जो विदेश जाना चाहता है। इस मंजूरी के बिना कोई भी लोक सेवक विदेश यात्रा नहीं कर सकता है। विदेश मंत्रालय को हर महीने राजनीतिक मंजूरी के लिए सैकड़ों अनुरोध मिलते हैं। 2016 से आवेदन epolclearance.gov.in पोर्टल पर किया जा सकता है।
राजनीतिक मंजूरी पर निर्णय कई बिंदुओं के आधार पर लिया जाता है। इसमें कार्यक्रम की प्रकृति, अन्य देशों से भागीदारी का स्तर, आमंत्रण की प्रकृति और मेजबान देश के साथ भारत के संबंध शामिल हैं। मंत्रालय के विभिन्न प्रभागों के बीच समन्वय के बाद आवेदनों पर कार्रवाई की जाती है और उन्हें मंजूरी दी जाती है।
दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल
- फोटो :
SOCIAL MEDIA
क्या कभी राजनीतिक मंजूरी अस्वीकार की गई है?
अक्टूबर 2019 में केंद्र से मंजूरी से न मिलने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने डेनमार्क में एक सम्मेलन को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। पिछली यूपीए सरकार ने असम के कांग्रेसी सीएम तरुण गोगोई को अमेरिका और इजराइल और झारखंड के भाजपाई मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा को थाईलैंड के लिए राजनीतिक मंजूरी देने से इनकार कर दिया था।
अक्टूबर 2019 में केंद्र से मंजूरी से न मिलने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने डेनमार्क में एक सम्मेलन को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। पिछली यूपीए सरकार ने असम के कांग्रेसी सीएम तरुण गोगोई को अमेरिका और इजराइल और झारखंड के भाजपाई मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा को थाईलैंड के लिए राजनीतिक मंजूरी देने से इनकार कर दिया था।
PMO South Block
- फोटो :
SOCIAL MEDIA
क्या राजनीतिक मंजूरी के अलावा भी कोई अतिरिक्त मंजूरी जरूरी होती है?
केंद्रीय मंत्रियों को आधिकारिक और व्यक्तिगत दोनों यात्राओं के लिए विदेश मंत्रालय से राजनीतिक मंजूरी के अलावा प्रधानमंत्री कार्यालय से मंजूरी की आवश्यकता होती है। लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों को क्रमशः अध्यक्ष और सभापति से मंजूरी की आवश्यकता होती है, लेकिन केवल तभी जब यात्रा आधिकारिक हो।
वहीं, सरकारी कर्मचारियों के लिए सभी विदेशी यात्राओं, आधिकारिक या व्यक्तिगत, के लिए अनुमोदन की आवश्यकता होती है। संयुक्त सचिव के स्तर तक के अधिकारियों के लिए, विदेश मंत्रालय की राजनीतिक मंजूरी के बाद संबंधित मंत्री द्वारा मंजूरी दी जाती है। उस रैंक से ऊपर के अधिकारियों के लिए, सचिवों की एक स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा प्रस्ताव को मंजूरी दी जाती है।
यात्रा की अवधि, यात्रा किए जा रहे देश और प्रतिनिधिमंडल में सदस्यों की संख्या के अनुसार मंजूरी के नियम अलग-अलग होते हैं। यदि संयुक्त राष्ट्र के अलावा अन्य संगठनों द्वारा दौरा करने वाले भारतीय अधिकारी की मेजबानी की जाती है, तो गृह मंत्रालय से एफसीआरए मंजूरी की आवश्यकता होती है।
केंद्रीय मंत्रियों को आधिकारिक और व्यक्तिगत दोनों यात्राओं के लिए विदेश मंत्रालय से राजनीतिक मंजूरी के अलावा प्रधानमंत्री कार्यालय से मंजूरी की आवश्यकता होती है। लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों को क्रमशः अध्यक्ष और सभापति से मंजूरी की आवश्यकता होती है, लेकिन केवल तभी जब यात्रा आधिकारिक हो।
वहीं, सरकारी कर्मचारियों के लिए सभी विदेशी यात्राओं, आधिकारिक या व्यक्तिगत, के लिए अनुमोदन की आवश्यकता होती है। संयुक्त सचिव के स्तर तक के अधिकारियों के लिए, विदेश मंत्रालय की राजनीतिक मंजूरी के बाद संबंधित मंत्री द्वारा मंजूरी दी जाती है। उस रैंक से ऊपर के अधिकारियों के लिए, सचिवों की एक स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा प्रस्ताव को मंजूरी दी जाती है।
यात्रा की अवधि, यात्रा किए जा रहे देश और प्रतिनिधिमंडल में सदस्यों की संख्या के अनुसार मंजूरी के नियम अलग-अलग होते हैं। यदि संयुक्त राष्ट्र के अलावा अन्य संगठनों द्वारा दौरा करने वाले भारतीय अधिकारी की मेजबानी की जाती है, तो गृह मंत्रालय से एफसीआरए मंजूरी की आवश्यकता होती है।