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मंकी फीवर की चपेट में आया गोवा का सत्तारी तालुका, 35 लोग प्रभावित
एजेंसी, पणजी
Updated Sun, 11 Mar 2018 06:56 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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गोवा में इस साल कम से कम 35 लोगों के क्यासानूर फॉरेस्ट डिसीज (केएफडी) से पीड़ित होने की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। केएफडी को ‘मंकी फीवर’ भी कहते हैं।
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उत्तरी गोवा जिले के सत्तारी तालुका में 2016 में इस बुखार से तीन लोगों की मौत हो गई थी जबकि 2015 में एक व्यक्ति की मौत हुई थी। वालपाई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के एक अधिकारी ने बताया कि जिन 35 लोगों में इस रोग की पुष्टि हुई है वे सभी सत्तारी तालुका के रहने वाले हैं। इस वायरल संक्रमण के लिए उन्हें उपचार दिया जा रहा है।
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उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक इस रोग के कारण कोई मौत नहीं हुई है। अधिकारी ने बताया कि अधिकतर मामले सत्तारी के सनवोरदर्म पंचायत इलाके में सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने टीकाकरण अभियान तेज कर दिया है वहां के गांवों में कीट भगाने वाला तेल बांटा जा रहा है।
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जानिए, क्या है मंकी फीवर :
स्थानीय भाषा में केएफडी को ‘मकड़ ताप’ कहा जाता है। यह टिक नाम के एक वायरस से फैलता है जो कि फ्लाविवायरस के समुदाय का है। इससे होने वाली बीमारी को टिक बॉर्न एन्सेफलाइटिस (टीबीई) कहते हैं। यह वायरस बंदरों के जरिए मानवों तक फैलता है। इसमें तेज बुखार और बदन दर्द होता है जिससे रक्तस्राव होने लगता है। पिछले वर्ष 88 लोग इससे संक्रमित पाए गए थे लेकिन किसी की मौत नहीं हुई थी। इस बीमारी की सबसे पहले पहचान कर्नाटक के शिमोगा जिले के क्यासानुर जंगल में 1957 में हुई थी। बाद में इसका नाम उसी जंगल के नाम पर रख दिया गया।