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West Bengal: स्कूल प्रमुखों ने शिक्षा विभाग को लिखा पत्र, टैबलेट खरीद के लिए फंड के दुरुपयोग की जांच की मांग

Sun, 10 Nov 2024 10:51 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता। Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 10 Nov 2024 10:51 PM IST
सार

West Bengal: एएसएफएचएम ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर चिंता जताई कि प्रत्येक्ष कक्षा 12वीं के छात्र लिए टैबलेट खरीदने के लिए आवंटित 10 हजार रुपये की धनराशि सही लाभार्थियों तक नहीं पहुंची।

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Association of school heads in West Bengal demands probe into 'misuse of funds' for tablets
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : प्रतीकात्मक

विस्तार

पश्चिम बंगाल के सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों के प्रमुखों की एक संस्था एएसएफएचएम ने रविवार को उच्चतर माध्यमिक छात्रों के लिए टैबलेट खरीदने के लिए आवंटित धनराशि के कथित दुरुपयोग की गहन जांच की मांग की। 
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एडवांस्ड सोसायटी फॉर हेडमास्टर्स एंड हेड मिस्ट्रीस (एएसएफएचएम) ने राज्य के शिक्षा विभाग से साइबर अपराध के कोण से इस मामले की तहकीकात करने की अपील की है। संस्था ने यह भी आग्रह किया कि भविष्य में स्कूल के प्रधानाध्यापकों को गैर शैक्षिक गतिविधियों से बाहर रखा जाए, ताकि छात्रों के लिए धनराशि के गलत आवंटन से पैदा होने वाले किसी भी मानसिक तनवा और उत्पीड़न से बचा जा सके। 
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एएसएफएचएम ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर चिंता जताई कि प्रत्येक्ष कक्षा 12वीं के छात्र लिए टैबलेट खरीदने के लिए आवंटित 10 हजार रुपये की धनराशि सही लाभार्थियों तक नहीं पहुंची, खासकर पूर्व मेदिनीपुर जिले में। संस्था ने कहा कि यह गंभीर चिंता का विषय है और यह बांग्लार शिक्षा पोर्टल में सुरक्षा खामियों की ओर इशारा करता है। 
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संस्था के महासचिव चंदन माइती ने पीटीआई को बताया कि पैसे का ऐसे दुरुपयोग तभी हो सकता है, जब छात्र के विवरण से छेड़छाड़ की गई हो, जिसमें बैंक की जानकारी भी शामिल होती है। उन्होंने यह भी बताया कि तरुणेर स्वप्नो (युवाओं का सपना) परियोजना के लिए ओटीपी-आधारित लॉगिन ही केवल सूची को अंतिर रूप देने की पुष्टि करता है। लेकिन यह बैंक विवरण में बदलाव या छात्र का फर्जी प्रोफाइल बनाने से रोकने में सक्षम नहीं है। 


माइती ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानाध्यापक केवल उसी सूची पर काम करते हैं, जो उन्हें दी जाती है। इसलिए किसी भी असंगति के लिए वे जिम्मेदार नहीं हो सकते। यह कथित अनियमितता तब सामने आई जब पूर्व मेदिनीपुर जिला प्रशासन ने चार प्रधानाध्यापकों के खिलाफ शिकायत दर्ज की। इन पर छात्रों के लिए आवंटित पैसे को अन्य खातों में स्थानांतरित करने का आरोप था। इसी तरह की खबरें मालदा और पूर्व बर्धमान जिलों से भी आईं। 

 
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