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विधेयक मंजूरी: तमिलनाडु सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट, कहा- राष्ट्रपति का रेफरेंस, शीर्ष फैसले को पलटने की कोशिश
Tue, 29 Jul 2025 12:32 AM IST
शिव शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शुक्ला
Updated Tue, 29 Jul 2025 12:32 AM IST
सार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सुप्रीम कोर्ट को एक प्रेसीडेंशियल रेफरेंस भेजा है, जिसमें पूछा गया है कि क्या शीर्ष कोर्ट राज्यपालों और राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजे गए राज्य के विधेयकों को मंजूरी देने के लिए कोई समयसीमा निर्धारित कर सकता है?
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सुप्रीम कोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
तमिलनाडु सरकार ने राज्यपालों की तरफ से विधेयकों को मंजूरी देने की समयसीमा के संबंध में राष्ट्रपति के संदर्भ (रेफरेंस) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। शीर्ष कोर्ट में दाखिल आवेदन में कहा गया है कि तमिलनाडु के राज्यपाल के मामले में फैसला सुनाने के ठीक एक महीने बाद दिया गया यह संदर्भ उक्त फैसले को पलटने का एक प्रयास है।
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दरअसल, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सुप्रीम कोर्ट को एक प्रेसीडेंशियल रेफरेंस भेजा है, जिसमें पूछा गया है कि क्या शीर्ष कोर्ट राज्यपालों और राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजे गए राज्य के विधेयकों को मंजूरी देने के लिए कोई समयसीमा निर्धारित कर सकता है? राज्य का तर्क है कि अनुच्छेद 143 के तहत संदर्भ में राष्ट्रपति की तरफ से उठाए गए प्रश्न सीधे तौर पर तमिलनाडु के राज्यपाल मामले में फैसले पर सीधे असर करने वाले हैं।
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राज्य ने कहा कि यह संदर्भ एक छद्म अपील के अलावा और कुछ नहीं है, जो कानूनन अस्वीकार्य है क्योंकि शीर्ष कोर्टे को अनुच्छेद 143 के तहत अपने ही फैसले को पलटने का कोई अधिकार नहीं है। तमिलनाडु राज्यपाल मामले में शीर्ष कोर्ट ने राष्ट्रपति और राज्यपाल को विधेयकों पर कार्रवाई करने के लिए समयसीमा निर्धारित की थी। राज्य का कहना है कि शीर्ष कोर्ट को राष्ट्रपति संदर्भ पर कोई जवाब दिए बिना ही वापस कर देना चाहिए।
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