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Assembly Elections 2026: इसी साल हो सकते हैं यूपी-पंजाब समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव, जानें वजह
सार
फरवरी में शुरू होने वाली जनगणना के लिए बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों की आवश्यकता होगी, जिससे चुनावी व्यवस्थाओं पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से तय वक्त से पहले चुनाव का विचार किया जा रहा है...
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पांच राज्यों में चुनाव इसी साल होने की संभावना
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
विस्तार
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव इसी साल नवंबर-दिसंबर महीने में हो सकते हैं। दरअसल अगले साल फरवरी में प्रस्तावित जनगणना के दूसरे चरण में बाधा नहीं आने देने के लिए केंद्र सरकार इन राज्यों में फरवरी-मार्च से पहले चुनाव कराने पर विचार कर रही है।
भाजपा नेतृत्व ने तो इस संबंध में सभी राज्य इकाईयों को आगाह करते हुए चुनावी तैयारियों को इसी महीने अंतिम रूप देने का निर्देश भी दे दिया है। हां, इस संबंध में उत्तराखंड को राहत मिल सकती है। दरअसल इन राज्यों में अगले साल फरवरी-मार्च में चुनाव प्रस्तावित हैं। मुश्किल यह है कि इसी दौरान जनगणना का दूसरा चरण शुरू होना है जो 9 फरवरी से 28 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान राज्य के कर्मचारी इसके तहत सामाजिक और आर्थिक जानकारी एकत्रित करेंगे। इसके लिए यूपी में कम से कम 5.5 लाख, उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा में 50-50 हजार, पंजाब में दो लाख सरकारी कर्मचारियों की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में चुनावी के लिए कर्मचारियों की जरूरत पूरी नहीं हो सकेगी।
अंतिम मतदाता सूची नहीं है बाधा
चुनाव आयोग के सूत्रों ने सरकार की ओर से इन राज्यों में जल्द चुनाव कराने की सूचना मिलने से इंकार किया। हालांकि सूत्र ने कहा कि अगर नवंबर में चुनाव होते हैं तो इसके लिए मतदाता सूची बाधा नहीं बनेगी। वह इसलिए कि इन राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जरूरत पड़ने पर जनवरी में तैयार होने वाली अंतिम मतदाता सूची को तय समय से तीन महीने पहले ही अंतिम रूप दिया जा सकता है।
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तीन राज्य इकाईयों ने की पुष्टि
तय समय से पहले चुनाव संबंधी चर्चाओं की पुष्टि भाजपा के तीन राज्यों के इकाईयों ने की। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब इकाई से जुड़े सूत्रों ने बताया कि नेतृत्व ने जल्द चुनाव के लिए तैयार रहने और इसके लिए बूथ कमेटियों को अंतिम रूप देने, संगठन की नियुक्तियां पूरी करने समेत सभी चुनावी तैयारियों को जुलाई के पहले सप्ताह तक अंतिम रूप देने के लिए कहा है। हालांकि उत्तराखंड राज्य इकाई के सूत्र ने कहा कि चूंकि यहां पहाड़ी इलाकों में दूसरे चरण की जनगणना सितंबर में ही हो जाएगी, ऐसे में इस राज्य को जल्द चुनाव से छूट मिल सकती है।
विपक्ष में भी हलचल
जल्द चुनाव की संभावनाओं के मद्देनजर विपक्षी खेमे में भी हलचल है। बीते सोमवार को विपक्षी इंडिया ब्लॉक की बैठक में इन संभावनाओं पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के बीच बातचीत भी हुई।
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भाजपा नेतृत्व ने तो इस संबंध में सभी राज्य इकाईयों को आगाह करते हुए चुनावी तैयारियों को इसी महीने अंतिम रूप देने का निर्देश भी दे दिया है। हां, इस संबंध में उत्तराखंड को राहत मिल सकती है। दरअसल इन राज्यों में अगले साल फरवरी-मार्च में चुनाव प्रस्तावित हैं। मुश्किल यह है कि इसी दौरान जनगणना का दूसरा चरण शुरू होना है जो 9 फरवरी से 28 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान राज्य के कर्मचारी इसके तहत सामाजिक और आर्थिक जानकारी एकत्रित करेंगे। इसके लिए यूपी में कम से कम 5.5 लाख, उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा में 50-50 हजार, पंजाब में दो लाख सरकारी कर्मचारियों की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में चुनावी के लिए कर्मचारियों की जरूरत पूरी नहीं हो सकेगी।
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अंतिम मतदाता सूची नहीं है बाधा
चुनाव आयोग के सूत्रों ने सरकार की ओर से इन राज्यों में जल्द चुनाव कराने की सूचना मिलने से इंकार किया। हालांकि सूत्र ने कहा कि अगर नवंबर में चुनाव होते हैं तो इसके लिए मतदाता सूची बाधा नहीं बनेगी। वह इसलिए कि इन राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जरूरत पड़ने पर जनवरी में तैयार होने वाली अंतिम मतदाता सूची को तय समय से तीन महीने पहले ही अंतिम रूप दिया जा सकता है।
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तीन राज्य इकाईयों ने की पुष्टि
तय समय से पहले चुनाव संबंधी चर्चाओं की पुष्टि भाजपा के तीन राज्यों के इकाईयों ने की। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब इकाई से जुड़े सूत्रों ने बताया कि नेतृत्व ने जल्द चुनाव के लिए तैयार रहने और इसके लिए बूथ कमेटियों को अंतिम रूप देने, संगठन की नियुक्तियां पूरी करने समेत सभी चुनावी तैयारियों को जुलाई के पहले सप्ताह तक अंतिम रूप देने के लिए कहा है। हालांकि उत्तराखंड राज्य इकाई के सूत्र ने कहा कि चूंकि यहां पहाड़ी इलाकों में दूसरे चरण की जनगणना सितंबर में ही हो जाएगी, ऐसे में इस राज्य को जल्द चुनाव से छूट मिल सकती है।
विपक्ष में भी हलचल
जल्द चुनाव की संभावनाओं के मद्देनजर विपक्षी खेमे में भी हलचल है। बीते सोमवार को विपक्षी इंडिया ब्लॉक की बैठक में इन संभावनाओं पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के बीच बातचीत भी हुई।