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पहली बार वोटर बने युवाओं पर कांग्रेस की नजर, अपने पाले में करने के लिए बनाई ये योजना
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 09 Oct 2018 06:28 PM IST
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पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव में इस बार युवा वोटर सियासी दलों की जीत-हार में बड़ी भूमिका अदा करेंगे। इनमें बड़ी
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संख्या में ऐसे युवा हैं जो पहली बार वोट डालेंगे। सियासी दल भी इसे खूब समझ रहे हैं और इसी के इर्द गिर्द अपनी भूमिका भी
तलाश रहे हैं। पहली बार वोट डालने वाले युवा वोटरों पर विभिन्न दलों ने निगाहें गढ़ा दी हैं।
कांग्रेस ने बनाई रणनीति
कांग्रेस ने ऐसे ही नए मतदाताओं को लेकर रणनीति बनानी शुरू कर दी है। कांग्रेस 2019 में भी यही मंत्र लेकर आगे बढ़ रही है।
नए मतदादाताओं की पहचान के लिए कांग्रेस बड़े पैमाने पर अभियान चला रही है। इसके लिए कार्यकर्ता तैयार किए जा रहे हैं जो
इस अभियान को शिद्दत के साथ आगे बढ़ाएंगे।
ये कार्यकर्ता नए वोटरों की हर तरीके से मदद करेंगे। चाहे नए मतदाताओं को अंग्रेजी समझाना हो, या सुरक्षा के मामले पर उत्तर
पूर्व की लड़कियों की रहने की दिक्कतों का मामला सुलझाना हो, कांग्रेस की कोशिश है कि पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं
की मदद कर उन्हें अपने पक्ष में लाया जाए।
पार्टी ने अगस्त से ही इस अभियान पर काम शुरू कर दिया है। कार्यकर्ता कॉलेज स्तर पर वर्कशॉप का आयोजन कर नए मतदाताओं
की पहचान करेगी। पार्टी ऐसे मतदाताओं के मुद्दों को सुलझाने की कोशिश करेगी ताकि उनके मन में पार्टी के प्रति एक सकारात्मक
छवि बन सके।
तलाश रहे हैं। पहली बार वोट डालने वाले युवा वोटरों पर विभिन्न दलों ने निगाहें गढ़ा दी हैं।
कांग्रेस ने बनाई रणनीति
कांग्रेस ने ऐसे ही नए मतदाताओं को लेकर रणनीति बनानी शुरू कर दी है। कांग्रेस 2019 में भी यही मंत्र लेकर आगे बढ़ रही है।
नए मतदादाताओं की पहचान के लिए कांग्रेस बड़े पैमाने पर अभियान चला रही है। इसके लिए कार्यकर्ता तैयार किए जा रहे हैं जो
इस अभियान को शिद्दत के साथ आगे बढ़ाएंगे।
ये कार्यकर्ता नए वोटरों की हर तरीके से मदद करेंगे। चाहे नए मतदाताओं को अंग्रेजी समझाना हो, या सुरक्षा के मामले पर उत्तर
पूर्व की लड़कियों की रहने की दिक्कतों का मामला सुलझाना हो, कांग्रेस की कोशिश है कि पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं
की मदद कर उन्हें अपने पक्ष में लाया जाए।
पार्टी ने अगस्त से ही इस अभियान पर काम शुरू कर दिया है। कार्यकर्ता कॉलेज स्तर पर वर्कशॉप का आयोजन कर नए मतदाताओं
की पहचान करेगी। पार्टी ऐसे मतदाताओं के मुद्दों को सुलझाने की कोशिश करेगी ताकि उनके मन में पार्टी के प्रति एक सकारात्मक
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सबसे पहले छत्तीसगढ़ में मतदान
बता दें कि पांच राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, मिजोरम में चुनाव होने जा रहे हैं। मध्यप्रदेश, राजस्थान और
छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा लगातार 15 साल से सत्ता में है। वहीं राजस्थान में
भाजपा ने 2013 में सत्ता में वापसी की थी।
इन पांचों राज्यों में सबसे पहले मतदान छत्तीसगढ़ में होगा। यहां दो दौर में मतदान होगा। पहले फेज में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में
12 नवंबर को जबकि दूसरे फेज में 20 नवंबर को चुनाव होगा। छत्तीसगढ़ की सत्ता पर भाजपा 15 साल से काबिज है। डॉ. रमन
सिंह मुख्यमंत्री पद की कमान संभाले हुए हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती और पूर्व कांग्रेस नेता अजीत जोगी के बीच गठबंधन के एलान
के बाद मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।
मध्यप्रदेश और मिजोरम में 28 नवंबर को मतदान होगा। मध्यप्रदेश में इस बार भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला है।
भाजपा 15 साल से सत्ता पर काबिज है और इस बार वोटरों में उसके प्रति नाराजगी देखी जा रही है। सीएम शिवराज सिंह से
सामने सत्ता बचाए रखने की चुनौती है। बसपा ने कांग्रेस को झटका देकर शिवराज की चुनौती की थोड़ा कम जरूर किया है लेकिन
रास्ता आसान नहीं है।
बता दें कि पांच राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, मिजोरम में चुनाव होने जा रहे हैं। मध्यप्रदेश, राजस्थान और
छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा लगातार 15 साल से सत्ता में है। वहीं राजस्थान में
भाजपा ने 2013 में सत्ता में वापसी की थी।
इन पांचों राज्यों में सबसे पहले मतदान छत्तीसगढ़ में होगा। यहां दो दौर में मतदान होगा। पहले फेज में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में
12 नवंबर को जबकि दूसरे फेज में 20 नवंबर को चुनाव होगा। छत्तीसगढ़ की सत्ता पर भाजपा 15 साल से काबिज है। डॉ. रमन
सिंह मुख्यमंत्री पद की कमान संभाले हुए हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती और पूर्व कांग्रेस नेता अजीत जोगी के बीच गठबंधन के एलान
के बाद मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।
मध्यप्रदेश और मिजोरम में 28 नवंबर को मतदान होगा। मध्यप्रदेश में इस बार भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला है।
भाजपा 15 साल से सत्ता पर काबिज है और इस बार वोटरों में उसके प्रति नाराजगी देखी जा रही है। सीएम शिवराज सिंह से
सामने सत्ता बचाए रखने की चुनौती है। बसपा ने कांग्रेस को झटका देकर शिवराज की चुनौती की थोड़ा कम जरूर किया है लेकिन
रास्ता आसान नहीं है।