फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Assembly election result 2019: Sikkim, Arunachal Pradesh, Andhra Pradesh and Odisha

विधानसभा चुनाव परिणाम 2019: जानिए ओडिशा, आंध्र, सिक्किम और अरुणाचल का हाल

Thu, 23 May 2019 10:48 AM IST
Shilpa Thakur न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Thu, 23 May 2019 10:48 AM IST
विज्ञापन
सार
  • लोकसभा चुनाव के साथ कई राज्यों में विधानसभा चुनाव भी हुए हैं।
  • ओडिशा, आंध्र प्रदेश, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए हैं।
  • ओडिशा में विधानसभा की कुल 146 सीट हैं।
  • आंध्र प्रदेश में कुल 175 विधानसभा सीट हैं।
  • सिक्किम में विधानसभा की कुल 32 सीट हैं।
  • अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा की कुल 60 सीट हैं।
loader
Assembly election result 2019: Sikkim, Arunachal Pradesh, Andhra Pradesh and Odisha
चार राज्यों में विधानसभा चुनाव - फोटो : social media

विस्तार

देश में लोकसभा और कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं। जिनके नतीजों पर सबकी नजर टिकी हैं। लोकसभा चुनाव के साथ जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं, वो राज्य हैं- ओडिशा, आंध्र प्रदेश, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश।

ओडिशा-

2014 में कैसी थी स्थिति?

ओडिशा में विधानसभा की कुल 147 सीटें हैं। यहां 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी बीजू जनता दल (बीजेडी) को 117 सीटें मिली थीं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 10 सीटें जीती थीं। कांग्रेस को 16 सीटें मिली थीं जबकि अन्य को 4 सीटें मिली थीं। हालांकि इस बार ओडिशा में 146 सीटों पर चुनाव हो रहा है। 

 
पार्टी का नाम सीटों की संख्या
बीजू जनता दल 117
भारतीय जनता पार्टी 10
कांग्रेस 16
अन्य 4
 
 

क्यों मजबूत है बीजेडी?

राज्य में बीते 19 सालों से बीजेडी सबसे मजबूत पार्टी बनी हुई है। यहां के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने राज्य की बेहतरी के लिए बहुत सी योजनाओं की शुरुआत की। इनमें महिलाओं, स्कूली छात्राओं, किसानों और यहां तक कि पत्रकारों के लिए भी कई योजनाएं शामिल हैं। 

इसके अलावा यहां आए फैनी चक्रवात के बाद भी राज्य सरकार ने लोगों की भलाई के लिए बहुत सी योजनाओं पर काम किया है। लोगों को ना केवल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया बल्कि उन्हें भोजन और अन्य जरूरी सुविधाएं भी मुहैया कराई गईं। इसके अलावा राज्य में संचार संबंधी सेवाएं बेहतर हुई हैं। कानून व्यवस्था भी बेहतर मानी जाती है। 

इसके साथ ही ओडिशा सरकार ने महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए भी बहुत सी योजनाओं की शुरुआत की है। जिनमें खुशी और महिला किसानों को निःशुल्क इंटरनेट-सक्षम स्मार्टफोन उपलब्ध कराने के लिए फ्री स्मार्टफोन योजना प्रमुख हैं। यहां उनके लिए करीब 70 लाख सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाए गए हैं। इसके अलावा यहां चुनावों में भी जाति धर्म का कोई प्रभाव नहीं है।  

कहां कमजोर पड़ सकती है बीजेडी?

वैसे तो ओडिशा में बीजेडी की स्थिति काफी मजबूत है। लेकिन ऐसा नहीं है कि इस राज्य की जनता को किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं है। राज्य में निचली जाति के लोगों को अभी भी छुआछूत का सामना करना पड़ता है। यहां नौकरियों की भी कमी है, जिसके कारण युवाओं को नौकरी की तलाश में दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है। इसके अलावा स्वास्थ्य के मामले में भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। यहां कॉर्पोरेट घरानों ने भारी निवेश किया है, बावजूद इसके गुजरात के कपड़ा उद्योग में सबसे अधिक श्रमिक ओडिशा के ही हैं।

चंद्रबाबू नायडू
चंद्रबाबू नायडू - फोटो : File Photo

आंध्र प्रदेश-

आंध्र प्रदेश में कुल 175 विधानसभा सीट हैं। यहां 2014 में हुए चुनाव के बाद तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के हिस्से में 102 सीटें आई थीं। वाईएसआर कांग्रेस को 67 सीट, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 4 सीट, नवोदयम को एक और एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार को मिली थी।
 

पार्टी का नाम सीटों की संख्या
तेलुगु देशम पार्टी 102
वाईएसआर कांग्रेस 67
भारतीय जनता पार्टी 4
अन्य 2

 

कौन सी हैं मुख्य पार्टियां?

राज्य में सबसे बड़ी पार्टी टीडीपी है। जिसकी वर्तमान में राज्य में सरकार है। इस पार्टी के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू राज्य के मुख्यमंत्री हैं। यहां मुख्य विपक्षी पार्टी जगन मोहन रेड्डी की वीईएसआर कांग्रेस है। इसके अलावा तेलुगु फिल्मों के अभिनेता पवन कल्याण की जनता सेना पार्टी (जेएसपी) भी इस बार मजबूत स्थिति में दिख रही है। ये पार्टी राज्य में सरकार बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। राज्य में भाजपा और कांग्रेस ने भी सरकार बनाने के लिए भरपूर कोशिश की है। लेकिन लोगों का झुकाव स्थानीय पार्टियों की ओर अधिक रहता है।

2014 के राजनीतिक समीकरण?

आंध्र प्रदेश में इस बार स्थिति पिछले चुनाव से काफी अलग है। 2014 में टीजडीपी और भाजपा के गठबंध की सरकार थी। इस गठबंधन को जेएसपी ने भी पूरा समर्थन दिया था। हालांकि उस वक्त जेएसपी ने किसी सीट पर अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे। इस बार ये पार्टी किसी को भी नुकसान पहुंचा सकती है।

क्या अलग है 2019 में?

इस बार टीडीपी और भाजपा राजनीतिक संबंध तोड़कर मैदान में उतरी हैं। यानि इनका गठबंधन नहीं है। जेएसपी- बसपा, सीपीआई और सीपीएम के साथ गठबंधन करके पहली बार चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस भी यहां अकेले ही चुनाव लड़ रही है। वाईएसआर कांग्रेस की स्थिति पहले से काफी मजबूत हुई है। पार्टी के प्रमुख जगन मोहन रेड्डी ने जनता के लिए 'प्रजा दरबार' जैसी नई शुरुआत की। जहां उन्होंने किसानों, छात्रों और ग्रामीणों की परेशानियों को सुना।

वहीं रेड्डी का ये भी कहना है कि अगर उनकी विशेष राज्य के दर्जे वाली बात मान ली गई, तो उनकी पार्टी भाजपा के साथ गठबंधन कर सकती है।
 

कैसे कमजोर है टीडीपी?

टीडीपी ने राज्य में किसानों के लिए बहुत सी योजनाएं शुरू कीं लेकिन बावजूद इसके राज्य के किसान खुश नहीं हैं। यहां स्कूल तो हैं लेकिन उनमें भी कई तरह की परेशानियां हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शिक्षकों की ड्यूटी कई तरह के सर्वे में लगा दी जाती है। जिसके कारण छात्रों को शैक्षणिक वर्ष में 30-40 दिनों का नुकसान होता है। शिक्षकों की इन ड्यूटी के चलते उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। इसके अलावा नायडू के रहते हुए राज्य को विशेष दर्जा नहीं मिल पाया है, जिसका असर इस बार उनकी सीटों पर पड़ सकता है। वहीं राजधानी अमरावती में अस्थायी विधानसभा और सचिवालय के अलावा किसी और चीज का निर्माण नहीं हुआ है। कई विकास योजनाएं फंड की कमी के कारण अटकी हुई हैं।

क्यों मजबूत है टीडीपी?

राज्य में टीडीपी की सरकार ने पेंशन की व्यवस्था शुरू की, किसानों का कर्ज माफ किया, किसानों को नकद सब्सिडी दी गई, साथ ही बेरोजगार युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने की व्यवस्था भी शुरू की गई। जिसके चलते टीडीपी थोड़ी मजबूत दिखाई देती है। 

क्यों जरूरी है विशेष राज्य का दर्जा?

आंध्र प्रदेश के लिए विशेष दर्जे की मांग ना केवल वहां की जनता बल्कि राजनीतिक पार्टियां भी करती आ रही हैं। चाहे फिर 2014 में भाजपा और टीडीपी का गठबंधन हो या फिर 2019 में रेड्डी द्वारा गठबंधन की बात करना। दोनों ही पार्टियों की गठबंधन के लिए मुख्य शर्त राज्य के लिए विशेष दर्जे की मांग ही रही है। इन पार्टियों का कहना है कि अगर आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा मिल जाता है, तो इससे उन्हें केंद्र की ओर से अधिक फंड मिलेगा। जिसका इस्तेमाल राजधानी के विकास के अलावा अन्य विकास योजनाओं में भी किया जा सकेगा।

पवन कुमार चामलिंग
पवन कुमार चामलिंग - फोटो : File Photo

सिक्किम-

सिक्किम में लंबे समय से ही क्षेत्रीय पार्टियों का दबदबा रहा है। यहां विधानसभा की कुल 32 सीटें हैं। यहां राष्ट्रीय पार्टियों की स्थिति उतनी मजबूत नहीं है। साल 1994 से ही सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) के नेता पवन कुमार चामलिंग राज्य के मुख्यमंत्री हैं।

2014 में क्या थी स्थिति?

2014 में हुए विधानसभा चुनावों में एसडीएफ को 22 सीटें मिली थीं। वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) को 10 सीटें मिली थीं। इससे पहले 2009 में हुए चुनावों में चामलिंग की पार्टी को पूरी 32 सीटें मिली थीं। वहीं राष्ट्रीय पार्टियों की स्थिति यहां बिल्कुल मजबूत नहीं है। 
 

पार्टी का नाम सीटों की संख्या
सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट 22
सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा 10
सिक्किम नेशनल पीपुल्स पार्टी 0
अन्य 0

 

कौन सी हैं मुख्य पार्टिंयां?

एसडीएफ और एसकेएम के अलावा मुख्य पार्टियों में सिक्किम संग्राम परिषद (एसएसपी), सिक्किम नेशनल पीपुल्स पार्टी (एसएनपीपी) और हमारो सिक्किम पार्टी हैं। बता दें इसी साल पूर्व फुटबॉलर बाईचुंग भूटिया ने इस पार्टी का निर्माण किया है। ये पार्टी अकेले चुनाव लड़ रही है। 

आखिर क्यों राष्ट्रीय पार्टियों को यहां मौका नहीं मिलता?

एसएनपीपी पार्टी के अध्यक्ष डी बारफुंगपा का कहना है कि वह राष्ट्रीय दलों पर अनुच्छेद 371 (एफ) के संरक्षण को लेकर भरोसा नहीं कर सकते हैं। यह सिक्किम के लोगों को मिले विशेष अधिकारों की रक्षा करता है। ठीक ऐसा ही सत्तारूढ़ एसडीएफ के प्रवक्ता के.टी. ग्यालत्सेन का भी कहना है। 

2016 में सबसे अमीर राज्य

अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के मुकाबले सिक्किम की स्थिति अधिक बेहतर मानी जाती है। साल 2016 में ये भारत का तीसरा सबसे अमीर राज्य था। 2016 में सिक्किम देश का पहला और अकेला ऑर्गेनिक स्टेट भी बना। वहीं महिलाओं के काम करने की स्थिति को लेकर एक सर्वे किया गया था। इसमें भी सिक्किम की स्थिति काफी बेहतर रही।

क्यों मजबूत है एसडीएफ?

2011 की जनगणना के मुताबकि सिक्किम में साक्षरता दर 81.42 फीसदी थी। जिसे पूरा 100 फीसदी करने के लिए मुख्यमंत्री चामलिंग ने अभियान भी चलाए। राज्य में युवाओं को खुश करने और बोरोजगारी को खत्म करने के लिए सरकार ने 9 पॉइंट एजेंडा की घोषणा की थी। 
 
युवाओं को राजनीति में मौका देने के लिए मौजूदा विधायकों के स्थान पर 32 में से 18 सीटों में युवाओं को स्थान दिया जा रहा है। ये भारत का पहला ऐसा राज्य है जहां न्यूनतम समर्थन आय की गारंटी दी गई है। वहीं पार्टी ने अपने मेनिफेस्टो में नेपाल की लिंबू-तमांग जनजाति को भी आरक्षण देने की बात कही है। पार्टी ने ये भी कहा है कि इस जनजाति के साथ किसी तरह का अन्याय नहीं किया जाएगा।

कहां कमजोर है एसडीएफ?

लंबे समय से सत्ता में काबिज एसडीएफ जिन मुद्दों पर कमजोर है, उनमें से एक है आत्महत्या। 2015 में सिक्किम में सुसाइड रेट (10 हजार लोगों पर) 37.5 फीसदी था। यह न केवल भारत के 10.6 फीसदी औसत से तीन गुना अधिक है बल्कि दुनिया के 11.4 फीसदी औसत से भी ज्यादा है। बेरोजगारी दर के मामले में भी सिक्किम काफी आगे है। हालांकि यहां शिक्षा व्यवस्था अच्छी है लेकिन रोजगार की कमी के चलते इसका कोई प्रभाव नहीं रह जाता है। 

पेमा खांडू
पेमा खांडू - फोटो : File photo

अरुणाचल प्रदेश-

अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा की कुल 60 सीट हैं। यहां 2014 में हुए चुनाव में कांग्रेस को 42 सीटें मिली थीं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 11 सीट, पीपल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (पीपीए) को 5 और निर्दलीय उम्मीदवार को 2 सीट मिली थीं। 
 

पार्टी का नाम सीटों की संख्या
कांग्रेस 42
भारतीय जनता पार्टी 11
पीपल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल 5
अन्य 2



जिसके बाद यहां नबाम तुकी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी। हालंकि काफी राजनीतिक उथल-पुथल, नेताओं का एक दल से दूसरे दल में जाने के कारण साल 2016 में यहां पीपीए ने भाजपा के समर्थन से सरकार बनाई। राज्य के मुख्यमंत्री पेमा खांडू हैं। 

पेमा खांडू राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दोरजी खांडू के बेटे हैं। जो कांग्रेस पार्टी से थे। दोराजी का 30 अप्रैल, 2011 को एक हवाई हादसे में निधन हो गया था। पेमा खांडू ने इसके बाद निर्विरोध अपने पिता के निर्वाचन क्षेत्र मुक्तो से चुनाव जीता। उस वक्त वो भी कांग्रेस के उम्मीदवार थे। हालांकि 2016 में वह भाजपा में शामिल हो गए। 

इस बार चुनाव 60 पर नहीं बल्कि 57 सीटों पर हो रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि भाजपा के तीन प्रत्याक्षी पहले ही निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए हैं।  

कौन सी हैं मुख्य पार्टियां?

मुख्य पार्टियों में नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी), कांग्रेस, भाजपा और पीपीए हैं। फिलहाल राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार है। जिसे मुख्य विपक्षी पार्टी एनपीपी का भरपूर समर्थन प्राप्त है। 



विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed