कांग्रेस का अब भी पीछा नहीं छोड़ रहा परिवारवाद
- असम में भाजपा ने बना रखा है सूबे के नेताओं के परिवारवाद को मुद्दा
- राम-रहीम दोनों की सरकार होगी
विस्तार
परिवारवाद का सियासी आरोप कांग्रेस का पीछा अब भी नहीं छोड़ रहा है। सोनिया-राहुल के साथ असम कांग्रेस के नेताओं का परिवारवाद भी यहां चुनावी मुद्दा बना हुआ है। कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में आए हेमंत विश्वशर्मा अपने चुनावी सभाओं के दौरान जनता के सामने नेहरू-गांधी परिवार के परिवारवाद को गिनाते हुए सूबे की जनता से प्रदेश कांग्रेस के नेताओं का परिवारवाद गिना रहे हैं।
वे तरुण गोगोई से लेकर सुष्मिता देव तक के नाम का जिक्र कर रहे हैं। शर्मा का कहना है कि कांग्रेस ने यहा असम विधानसभा चुनाव में 35 नेता पुत्रों और पुत्रियों को टिकट दिया है। ऐसे में कार्यकर्ता का नंबर कब लगेगा।
प्रदेश में परिवारवाद को बढ़ावा देने को लेकर मुख्यमंत्री गोगोई पर सियासी हमला बोलते हुए वे जनता से कहते हैं कि गोगोई की राजनीति टीवी सिरियल सास-बहू सरीखे है। उनका ये परिवारवाद सोनिया और राहुल की प्रेरणा से है। ये सुनते ही जनता से तालियां बजती हैं और वंदे मातरम और भारत माता के नारे शुरू हो जाते हैं।
असम राम-रहीम दोनों की सरकार बनेगी
अपने 40 मिनट के संबोधन में शर्मा सबसे पहले बदरूदीन अजमल पर सियासी हमला बोलते हैं। बदरूद्दीन पर हमले के जरिए वे बांग्लादेशी घुसपैठीयों का भय दिखाकर हिंदू मतों के ध्रुविकरण पर बल देते हैं। तो मुस्लिम मतदाताओं को आगाह भी करते हैं कि उनके मत के बल पर अजमल अपनी सियासी रोटी सेंक रहे हैं।
भाषण के अगले हिस्से में वे कांग्रेस की सियासत को बेनकाब करने के लिए सूबे के पिछडे़पन को हथियार बनाते हैं। संबोधन के अंतिम चरण में वे सरकार में रहकर जनता के लिए किए अपने कार्यों को गिनाते हैं।
उसके बाद सबको विश्वास दिलाते हैं कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने पर किसी खास वर्ग की नहीं बल्कि राम-रहीम दोनों की सरकार बनेगी। क्षेत्रीय मतों को साधने के लिए वे कहते हैं कि सोनवाल के नेतृत्व में असमी, बिहारी और बंगाली सबके हित के लिए कार्य होंगे। केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार का हवाला भी देते हैं।