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Manipur: मणिपुर में शांति बहाली के लिए बिना सोये काम कर रहे असम राइफल्स के जवान, इन चुनौतियां का कर रहे सामना

Wed, 26 Jul 2023 08:34 PM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल Published by: Jeet Kumar Updated Wed, 26 Jul 2023 08:34 PM IST
सार

मणिपुर में शांति बहाली के लिए सेना और अन्य अर्धसैनिक बलों के साथ असम राइफल्स बिना सोये अपना काम कर रही है ताकि पूर्वोत्तर राज्य में शांति स्थापित हो सके।

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Assam Rifles facing challenges working without sleep to restore peace in Manipur
assam rifles - फोटो : social media

विस्तार

मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदाय के बीच मई महीने से शुरू हुई हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही है। झड़पों में अब तक 160 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इस के साथ मणिपुर में शांति बहाली के लिए सेना और अन्य अर्धसैनिक बलों के साथ असम राइफल्स बिना सोये अपना काम कर रही है ताकि पूर्वोत्तर राज्य में शांति स्थापित हो सके। लेकिन असम राइफल्स के लिए दोनों समुदाय के बीच शांति बनाए रखने का काम मौजूदा हालात में कम चुनौतीपूर्ण नहीं है।

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असम राइफल्स के अधिकारियों का कहना है कि मणिपर में सेना के जवानों को अक्सर विरोधी भीड़ और कभी-कभी असहयोगात्मक राज्य मशीनरी का भी सामना करना पड़ता है। पूरे मणिपुर में मौजूदगी वाले असम राइफल्स के साथ सेना और अन्य अर्द्धसैनिक बलों को प्रदेश में शांति बनाए रखने के साथ दोनों समुदायों के नाराज लोगों को समझाने-बुझाने का काम सौंपा गया है।
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अधिकारियों ने कहा कि हमें आलोचना की भी सामना कर करना पड़ रहा है। हममें से कोई भी 96 घंटों तक नहीं सोया है और हमने विस्थापित लोगों के लिए अपने शिविर खोल दिए हैं, चाहे वह मैतेई हों या कुकी। दंगों में फंसा हर व्यक्ति कोई सुरक्षित ठिकाना जानता था तो वह था असम राइफल या सेना का शिविर।
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अधिकारी ने बताया कि लेकिन आज दोनों समुदाय हम पर दूसरे की मदद करने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि हमारा एकमात्र काम यह सुनिश्चित करना है कि शांति बनी रहे और मानव जीवन और गरिमा का सम्मान किया जाए। हाल ही में 31 विधायकों ने राज्य में एकता को बढ़ावा देने की आवश्यकता का हवाला देते हुए असम राइफल्स की 9वीं, 22वीं और 37वीं बटालियन को अन्य केंद्रीय सुरक्षा बलों से बदलने की मांग की थी।

प्रदेश के चुराचांदपुर और बिष्णुपुर जिलों की सीमा पर नौ असम राइफल्स के जवानों को तैनात किया गया है, 22 असम राइफल्स को कांगपोकपी क्षेत्र में और 37 असम राइफल्स को सुगनू क्षेत्रों में तैनात किया गया है। हालांकि, विधायकों की इस मांग ने इन इकाइयों के अधिकारियों और जवानों को हैरान कर दिया है क्योंकि हिंसा भड़कने के बाद बल के जवानों ने कई लोगों की जान बचायी थी । उसके बाद, ये इकाइयां ‘बफर जोन’, जहां दोनों जातीय समूहों के गांव आसपास हैं, इनमें शांति स्थापना में मदद कर रही हैं। 

रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण, इन इकाइयों के संचालन के बारे में बताते हुए, अधिकारी ने बताया कि तीन मई से इकाई के जवानों ने दो पक्षों के संघर्ष के कारण अपने-अपने घरों को छोड़कर भागने वाले अनेक लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

मणिपुर की अखंडता के लिए लड़ते रहेंगे: मुख्यमंत्री
हिंसाग्रस्त मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा है कि वे अपनी खून की आखिरी बूंद तक राज्य की अखंडता की रक्षा करने के लिए लड़ते रहेंगे। वे आज यहां सचिवालय में कारगिल दिवस के आयोजन पर बोल रहे थेे।

मुख्यमंत्री ने राज्य में रहने वाले आप्रवासी कुकियों से प्रभावित होकर अलग मातृभूमि या देश की मांग करने वाले कुछ नागरिक सामाजिक संगठनों के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मूकदर्शक नहीं बनी रहेगी और उचित कार्रवाई करेगी। पहाड़ियों में वन क्षेत्रों के नुकसान को उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण मानते हुए कहा, कुछ लोग राज्य में लागू भारतीय वन अधिनियम की अवहेलना कर रहे हैं, जिसे वह भारतीय संविधान के उल्लंघन के रूप में देखते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्र और राज्य सरकार भारतीय वन अधिनियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी।

पहाड़ों में, विशेषकर कांगपोकपी और चुराचांदपुर जिलों में हाल की चिंताजनक घटनाओं के संबंध में, मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले दिनों में स्थिति पर कड़ी नजर रखी जाएगी। सिंह ने आम जनता से आग्रह किया कि वे इस कठिन समय में राज्य में शासन पर विश्वास न खोएं।


उन्होंने शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए अपनी अपील दोहराई और सभी से शांति और विकास के लिए हिंसा छोड़ने का आग्रह किया। दो आदिवासी महिलाओं को नग्न कर सड़कों पर घुमाने की घटना को मुख्यमंत्री ने विश्व के इतिहास का एक काला अध्याय बताया।

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