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Assam: सीएम हिमंत बिस्वा के 'मियां' वाले बयान पर बिफरे असम के विपक्षी दल, कह डाली ये बड़ी बात
Sun, 16 Jul 2023 06:35 PM IST
हिमांशु मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Sun, 16 Jul 2023 06:35 PM IST
सार
सरमा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि ऐसे शब्द एक मुख्यमंत्री के लिए अशोभनीय हैं। इससे राज्य का एक विशेष समुदाय आहत और नाराज महसूस कर रहा है। यह बयान एक सांप्रदायिक विभाजन पैदा कर रहा है।
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असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा
- फोटो : Social Media
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विस्तार
सब्जियों की बढ़ती कीमतों के लिए स्थानीय बंगाली भाषी मुसलमानों को जिम्मेदार ठहराने पर असम में विपक्षी दलों ने रविवार को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की आलोचना की। विपक्षी दलों के नेताओं ने कहा कि वह सांप्रदायिक राजनीति खेल रहे हैं। एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि सीएम की टिप्पणी से मिया आहत हुए हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने अगले साल के लोकसभा चुनाव से पहले सांप्रदायिक राजनीति में भाजपा और एआईयूडीएफ के बीच मिलीभगत की आशंका जताई।
सरमा ने गुवाहाटी में सब्जियों की बढ़ती कीमतों पर पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा था, 'गांवों में सब्जियों की कीमत इतनी अधिक नहीं होती है। यहां मिया विक्रेता हमसे अधिक शुल्क लेते हैं। अगर असमिया विक्रेता सब्जियां बेचते, तो ऐसा नहीं होता।'
उन्होंने कहा, 'मैं गुवाहाटी के सभी फुटपाथों को साफ कर दूंगा और मैं अपने असमिया लोगों से आगे आने और अपना व्यवसाय शुरू करने का आग्रह करता हूं।' मिया मूल रूप से असम में बंगाली भाषी मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है।
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क्या-क्या बोले विपक्षी दल के नेता?
सरमा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि ऐसे शब्द एक मुख्यमंत्री के लिए अशोभनीय हैं। इससे राज्य का एक विशेष समुदाय आहत और नाराज महसूस कर रहा है। यह बयान एक सांप्रदायिक विभाजन पैदा कर रहा है। अगर इससे कोई घटना होती है, तो सरकार और हिमंत बिस्वा सरमा इसके लिए जिम्मेदार होंगे। अजमल ने यह भी कहा कि सब्जियों की कीमतें मियाओं द्वारा नियंत्रित नहीं हैं। असमिया युवाओं से कृषि अपनाने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा, 'हम असमिया युवाओं का कृषि गतिविधियों में शामिल होने का स्वागत करेंगे। लेकिन मुझे नहीं लगता कि वे ऐसा करेंगे क्योंकि इसके लिए बहुत कड़ी मेहनत की आवश्यकता होती है।'
कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने आरोप लगाया कि लोगों के बीच सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने के लिए सरमा और अजमल दोनों मिलकर मिया-असमिया विवाद पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वे दोनों लोगों को धार्मिक आधार पर बांटना चाहते हैं। भाजपा बेरोजगारी, महंगाई, अवैध प्रवासियों आदि जैसे मुख्य मुद्दों को संबोधित करने में विफल रही है और ध्यान भटकाने के लिए वे इस तरह की रणनीति अपना रहे हैं।'
रायजोर दल के अध्यक्ष और विधायक अखिल गोगोई ने यह भी दावा किया कि सरमा के ऐसे सांप्रदायिक बयान महत्वपूर्ण मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने की एक चाल है। उन्होंने कहा, 'ऐसी सांप्रदायिक राजनीति के तीन मुख्य कारण हैं। भाजपा परिसीमन प्रस्ताव के मसौदे से ध्यान भटकाना चाहती है क्योंकि विपक्ष लोगों के सामने यह कहने में सक्षम है कि दस्तावेज़ स्वदेशी लोगों के हितों का समर्थन नहीं करता है।'
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सरमा ने गुवाहाटी में सब्जियों की बढ़ती कीमतों पर पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा था, 'गांवों में सब्जियों की कीमत इतनी अधिक नहीं होती है। यहां मिया विक्रेता हमसे अधिक शुल्क लेते हैं। अगर असमिया विक्रेता सब्जियां बेचते, तो ऐसा नहीं होता।'
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उन्होंने कहा, 'मैं गुवाहाटी के सभी फुटपाथों को साफ कर दूंगा और मैं अपने असमिया लोगों से आगे आने और अपना व्यवसाय शुरू करने का आग्रह करता हूं।' मिया मूल रूप से असम में बंगाली भाषी मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है।
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क्या-क्या बोले विपक्षी दल के नेता?
सरमा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि ऐसे शब्द एक मुख्यमंत्री के लिए अशोभनीय हैं। इससे राज्य का एक विशेष समुदाय आहत और नाराज महसूस कर रहा है। यह बयान एक सांप्रदायिक विभाजन पैदा कर रहा है। अगर इससे कोई घटना होती है, तो सरकार और हिमंत बिस्वा सरमा इसके लिए जिम्मेदार होंगे। अजमल ने यह भी कहा कि सब्जियों की कीमतें मियाओं द्वारा नियंत्रित नहीं हैं। असमिया युवाओं से कृषि अपनाने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा, 'हम असमिया युवाओं का कृषि गतिविधियों में शामिल होने का स्वागत करेंगे। लेकिन मुझे नहीं लगता कि वे ऐसा करेंगे क्योंकि इसके लिए बहुत कड़ी मेहनत की आवश्यकता होती है।'
कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने आरोप लगाया कि लोगों के बीच सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने के लिए सरमा और अजमल दोनों मिलकर मिया-असमिया विवाद पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वे दोनों लोगों को धार्मिक आधार पर बांटना चाहते हैं। भाजपा बेरोजगारी, महंगाई, अवैध प्रवासियों आदि जैसे मुख्य मुद्दों को संबोधित करने में विफल रही है और ध्यान भटकाने के लिए वे इस तरह की रणनीति अपना रहे हैं।'
रायजोर दल के अध्यक्ष और विधायक अखिल गोगोई ने यह भी दावा किया कि सरमा के ऐसे सांप्रदायिक बयान महत्वपूर्ण मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने की एक चाल है। उन्होंने कहा, 'ऐसी सांप्रदायिक राजनीति के तीन मुख्य कारण हैं। भाजपा परिसीमन प्रस्ताव के मसौदे से ध्यान भटकाना चाहती है क्योंकि विपक्ष लोगों के सामने यह कहने में सक्षम है कि दस्तावेज़ स्वदेशी लोगों के हितों का समर्थन नहीं करता है।'