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जिग्नेश मेवाणी रिहाई: हाई कोर्ट ने कहा- निचली अदालत ने टिप्पणी कर सीमा लांघी, पुलिस और सरकार का मनोबल गिराया
Mon, 02 May 2022 08:31 PM IST
Amit Mandal
एएनआई, गुवाहाटी
एएनआई, गुवाहाटी
Published by: Amit Mandal
Updated Mon, 02 May 2022 08:31 PM IST
सार
महाधिवक्ता देबोजीत सैकिया ने कहा कि हाई कोर्ट ने ने भी बहुत स्पष्ट रूप से कहा कि जिला और सत्र न्यायाधीश को जिस तरह की टिप्पणियां की हैं, उसका उसे कोई अधिकार नहीं था।
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Jignesh Mewani
- फोटो : social media
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विस्तार
गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी की गिरफ्तारी और निचली अदालत द्वारा उनकी रिहाई को लेकर असम सरकार ने गौहाटी हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। असम सरकार के महाधिवक्ता देबोजीत सैकिया ने कहा कि आज राज्य सरकार ने जिग्नेश मेवाणी को मिली जमानत को चुनौती दी है। बारपेटा रोड पीएस के जांच अधिकारी गौहाटी हाई कोर्ट के समक्ष 5 मई को गौहाटी हाई कोर्ट के लोक अभियोजक के माध्यम से एक अलग याचिका दायर करेंगे।
महाधिवक्ता देबोजीत सैकिया ने कहा कि हाई कोर्ट ने ने भी बहुत स्पष्ट रूप से कहा कि जिला और सत्र न्यायाधीश को जिस तरह की टिप्पणियां की हैं, उसका उसे कोई अधिकार नहीं था। हाई कोर्ट ने जिग्नेश मेवाणी को 27 मई को मामले की आगे की सुनवाई के लिए एक नोटिस भी जारी किया। अदालत ने निर्देश दिया कि जिग्नेश मेवाणी को दी गई जमानत के संबंध में अगर उन्हें सलाह दी जाती है या वे पीड़ित हैं, तो लोक अभियोजक के माध्यम से पुलिस विभाग एक अलग मामला दर्ज कर सकता है
हाई कोर्ट ने क्या-क्या कहा
हाई कोर्ट ने सोमवार को कहा कि बारपेटा अदालत ने गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी को एक महिला पुलिस अधिकारी के साथ मारपीट करने के मामले में जमानत देने के अपने आदेश में की गई टिप्पणियों की सीमा लांघी है और पुलिस बल और असम सरकार का मनोबल गिराया है। जस्टिस देबाशीष बरुआ ने बारपेटा जिला और सत्र न्यायाधीश अपरेश चक्रवर्ती द्वारा की गई टिप्पणियों को चुनौती देने वाली असम सरकार द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दलित नेता और निर्दलीय विधायक मेवाणी को जमानत देने पर कोई राय नहीं दी।
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बारपेटा अदालत ने मेवाणी के खिलाफ झूठी प्राथमिकी दर्ज करने के लिए राज्य पुलिस की खिंचाई की थी और हाई कोर्ट से अनुरोध किया था कि वह असम पुलिस को वर्तमान मामले की तरह झूठी प्राथमिकी दर्ज करने से रोकने के लिए निर्देश देने पर विचार करे। साथ ही कहा था कि पुलिसकर्मियों द्वारा आरोपियों को गोली मारकर हत्या करना या घायल करना राज्य में एक नियमित घटना बन गई है।
निचली अदालत ने दी थी जमानत
असम के बारपेटा की अदालत ने गुजरात के कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी को जमानत देते हुए कहा था कि पुलिस ने विधायक को फंसाने के लिए झूठा और मनगढ़ंत केस बनाया था। इतने संघर्ष से हासिल लोकतंत्र को पुलिस राज्य में बदलने की सोच भी अकल्पनीय है। कोर्ट ने शुक्रवार को महिला कांस्टेबल पर कथित हमले के मामले में जमानत देते हुए कहा, पुलिस लोगों को फंसाने में अव्वल होती जा रही है, हाईकोर्ट को पुलिस की कार्यप्रणाली को संज्ञान में लेना चाहिए। बारपेटा जिला एवं सत्र न्यायाधीश अपरेश चक्रवर्ती ने राज्य में चल रही पुलिस ज्यादतियों का हवाला देते हुए गुवाहाटी हाईकोर्ट से पुलिस बल को खुद में सुधार करने का निर्देश देने का आग्रह किया है।
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महाधिवक्ता देबोजीत सैकिया ने कहा कि हाई कोर्ट ने ने भी बहुत स्पष्ट रूप से कहा कि जिला और सत्र न्यायाधीश को जिस तरह की टिप्पणियां की हैं, उसका उसे कोई अधिकार नहीं था। हाई कोर्ट ने जिग्नेश मेवाणी को 27 मई को मामले की आगे की सुनवाई के लिए एक नोटिस भी जारी किया। अदालत ने निर्देश दिया कि जिग्नेश मेवाणी को दी गई जमानत के संबंध में अगर उन्हें सलाह दी जाती है या वे पीड़ित हैं, तो लोक अभियोजक के माध्यम से पुलिस विभाग एक अलग मामला दर्ज कर सकता है
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हाई कोर्ट ने क्या-क्या कहा
हाई कोर्ट ने सोमवार को कहा कि बारपेटा अदालत ने गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी को एक महिला पुलिस अधिकारी के साथ मारपीट करने के मामले में जमानत देने के अपने आदेश में की गई टिप्पणियों की सीमा लांघी है और पुलिस बल और असम सरकार का मनोबल गिराया है। जस्टिस देबाशीष बरुआ ने बारपेटा जिला और सत्र न्यायाधीश अपरेश चक्रवर्ती द्वारा की गई टिप्पणियों को चुनौती देने वाली असम सरकार द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दलित नेता और निर्दलीय विधायक मेवाणी को जमानत देने पर कोई राय नहीं दी।
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बारपेटा अदालत ने मेवाणी के खिलाफ झूठी प्राथमिकी दर्ज करने के लिए राज्य पुलिस की खिंचाई की थी और हाई कोर्ट से अनुरोध किया था कि वह असम पुलिस को वर्तमान मामले की तरह झूठी प्राथमिकी दर्ज करने से रोकने के लिए निर्देश देने पर विचार करे। साथ ही कहा था कि पुलिसकर्मियों द्वारा आरोपियों को गोली मारकर हत्या करना या घायल करना राज्य में एक नियमित घटना बन गई है।
निचली अदालत ने दी थी जमानत
असम के बारपेटा की अदालत ने गुजरात के कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी को जमानत देते हुए कहा था कि पुलिस ने विधायक को फंसाने के लिए झूठा और मनगढ़ंत केस बनाया था। इतने संघर्ष से हासिल लोकतंत्र को पुलिस राज्य में बदलने की सोच भी अकल्पनीय है। कोर्ट ने शुक्रवार को महिला कांस्टेबल पर कथित हमले के मामले में जमानत देते हुए कहा, पुलिस लोगों को फंसाने में अव्वल होती जा रही है, हाईकोर्ट को पुलिस की कार्यप्रणाली को संज्ञान में लेना चाहिए। बारपेटा जिला एवं सत्र न्यायाधीश अपरेश चक्रवर्ती ने राज्य में चल रही पुलिस ज्यादतियों का हवाला देते हुए गुवाहाटी हाईकोर्ट से पुलिस बल को खुद में सुधार करने का निर्देश देने का आग्रह किया है।