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असम: ‘कब्जाधारियों’ को हर सरकार मुहैया कराती रही हैं सरकारी सुविधाएं, 7000 से ज्यादा लोग हुए बेघर

एजेंसी, ढालपुर। Published by: देव कश्यप Updated Tue, 28 Sep 2021 02:55 AM IST

सार

दरांग जिले के प्रभावित इलाकों में आधार केंद्र, बिजली कनेक्शन, बैंक व स्कूल भी मौजूद हैं।अब तक हर सरकार ने कब्जाधारियों को वे सभी सुविधाएं मुहैया कराईं जो स्थायी निवासियों को दी जाती है। लेकिन अब हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार इन लोगों को ‘अतिक्रमणकारी’ बताकर हटा रही है।
असम के दरांग में झड़प।
असम के दरांग में झड़प। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

असम में दरांग जिले का सिपाझार इलाका पिछले हफ्ते ‘अवैध कब्जाधारियों’ के खिलाफ खूनी अतिक्रमण विरोधी अभियान के चलते देश दुनिया में चर्चा में है, लेकिन यहां की हकीकत कुछ और है। प्रदेश में चाहे भाजपा के सर्बानंद सोनोवाल की सरकार रही हो या फिर किसी और की, हर सरकार ने कब्जाधारियों को बिजली कनेक्शन, उचित मूल्य की दुकानें, बैंक और स्कूल जैसी सुविधाएं मुहैया कराईं जो स्थायी निवासियों को दी जाती है। प्रदेश की हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व वाली मौजूदा भाजपा सरकार इन लोगों को ‘अतिक्रमणकारी’ बताकर हटा रही है।
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दशकों से कई विकास योजनाओं को लागू कर उनकी बस्तियों को ‘वैध’ किए जाने के बाद अब सरकार द्वारा लिए जा रहे प्रतिशोध से ढालपुर के प्रथम, द्वितीय और तृतीय गांवों के विस्थापित लोग आश्चर्य जता रहे हैं। तीनों प्रभावित गांवों में सरकार द्वारा दी गई सुविधाएं मौजूद हैं। इनमें केंद्र के स्वच्छ भारत मिशन के तहत निर्मित शौचालय भी शामिल हैं। इतना ही नहीं, नदी के टापू पर स्थित इन गांवों में रहने वाले लोगों को आधार कार्ड मुहैया कराने के लिए पांच केंद्र भी बने हैं। हालांकि दरांग जिला प्रशासन का कहना है कि ये केंद्र पहले की सरकारों ने बनाए थे और इन्हें नियमों के तहत हटाया जाएगा। 


बेदखली अभियान 7000 से ज्यादा लोग हुए बेघर
विभिन्न सूत्रों के अनुसार, पिछले हफ्ते दो अलग-अलग दिन हुई कार्रवाई के दौरान करीब 1200-1400 घरों को गिराया गया। इसके चलते 7000 से अधिक लोग बेघर हो गए। इस बेदखली अभियान का स्थानीय लोगों ने पुरजोर विरोध किया। 23 सितंबर को पुलिस फायरिंग में 12 वर्षीय लड़के समेत दो लोगों की जान चली गई। इस मृत बच्चे को गोली लगने से पहले ही अपना पहला पहचान पत्र आधार कार्ड मिला था। फायरिंग में पुलिसकर्मियों समेत 20 से ज्यादा लोग घायल हुए। 

1983 के बाद कटाव प्रभावित लोगों के तौर पर पहचान शुरू हुई
धौलपुर द्वितीय गांव निवासी सफर अली का घर भी 23 सितंबर को ढहा दिया गया। उन्होंने बताया कि 1983 के बाद, सरकार ने उन लोगों की कटाव प्रभावितों के तौर पर पहचान शुरू की जोकि दरअसल असम के निचले बाढ़ प्रभावित जिलों से विस्थापित हुए थे। बाद के सालों में, हमें बिजली के कनेक्शन दिए गए। धीरे-धीरे इस इलाके में स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, आंगनवाड़ी केंद्र, उचित मूल्य की दुकानें, पोस्ट ऑफिस और बैंकों की उपशाखाएं भी खुलीं। साथ ही सरकार ने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत कई घर भी बनवाए। सरकार ने घरों में सोलर पैनल और सेप्टिक शौचालय भी बनवाएं। यह सब पिछली भाजपा सरकार में हुआ। स्वच्छ भारत मिशन के तहत भी कई शौचालय बनवाए गए। 

अगर हम कब्जाधारी है तो हमें सुविधाएं क्यों दी गईं?
अली ने कहा कि सरकार ने हमें सोलर पैनल मुहैया कराएं क्योंकि यहां बिजली आपूर्ति नियमित नहीं है। उन्होंने गुस्से में सवाल किया कि यदि हम कब्जाधारी है तो प्रशासन ने धौलपुर में रहने वाले लोगों का जीवनस्तर सुधारने में मदद क्यों की? धौलपुर प्रथम निवासी फैजुर रहमान ने बताया कि पूरे धौलपुर इलाकों बेदखली के चिह्नित किया गया है लेकिन इस पूरे इलाके में बड़ी संख्या में सरकारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इनमें तीन स्वास्थ्य केंद्र, 38 प्राइमरी स्कूल, दो एमई स्कूल, 42 आंगनवाड़ी केंद्र और 13 उचित मूल्य की दुकानें। एसबीआई, सेंट्रल बैंक, एचडीएफसी और असम ग्रामीण विकास बैंक की चार उपशाखाएं और 10 कॉमन सर्विस सेंटर भी हैं। उन्होंने कहा कि यदि हम यहां गैरकानूनी रूप से रह रहे थे तो ऐसे में सरकार ने ये सुविधाएं क्यों मुहैया कराई?

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