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Assam Election: चुनाव से पहले जुबानी जंग तेज, हिमंत का तंज- पाकिस्तान-बांग्लादेश में जाकर सरकार बनाए कांग्रेस

Fri, 27 Mar 2026 12:39 AM IST
Shivam Garg एन. अर्जुन, गुवाहाटी
एन. अर्जुन, गुवाहाटी Published by: Shivam Garg Updated Fri, 27 Mar 2026 12:39 AM IST
सार

असम चुनाव 2026 से पहले भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, वहीं गौरव गोगोई ने भाजपा की राजनीति पर सवाल उठाए।

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Assam Elections 2026: War of Words Intensifies Between BJP and Congress, Himanta Targets Opposition
हिमंत बिस्वा सरमा / गौरव गोगोई - फोटो : ANI

विस्तार

असम विधानसभा चुनाव के लिए 9 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले सियासी पारा चढ़ गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए उसकी प्रासंगिकता पर सवाल उठाए हैं। सरमा ने तंज कसा कि कांग्रेस भारत में सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है, वह शायद बांग्लादेश या पाकिस्तान में सरकार बना सकती है। उन्होंने दावा किया कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को छोड़कर कोई भी स्थानीय व्यक्ति कांग्रेस को वोट नहीं देगा। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि जनता पिछले 60 वर्षों का शासन देख चुकी है और अब भाजपा के विकास कार्यों के साथ है।

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भाजपा की डर की राजनीति से ऊब चुके हैं लोग: गौरव गोगोई
असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री के दावों को खारिज करते हुए कहा कि राज्य में बदलाव की लहर है। गोगोई के अनुसार, जनता भाजपा की डर की राजनीति से बाहर निकलना चाहती है और विपक्षी गठबंधन को भारी समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि लोग एक नए असम की कल्पना के साथ उत्साहित हैं।
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राष्ट्रीय राजनीति में कब जाएंगे हिमंत बिस्वा सरमा, खुद बता दिया
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राष्ट्रीय राजनीति में जाने को लेकर चल रही अटकलों पर खुलकर जवाब दिया है। उन्होंने साफ कहा कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान असम पर है और राष्ट्रीय स्तर पर कदम तभी उठाएंगे, जब समय और परिस्थितियां अनुकूल हों। एक सवाल के जवाब में सरमा ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा जब आप लोग भगा देंगे, तब चला जाऊंगा, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी उनकी प्राथमिकता राज्य की राजनीति और यहां चल रहे बदलावों को पूरा करना है।
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मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि उनका राजनीतिक एजेंडा दीर्घकालिक है। उन्होंने कहा कि असम की राजनीति में जमी हुई संरचनाओं की रीढ़ को पहले कमजोर करना जरूरी है। उनके मुताबिक, अभी तक जो बदलाव हुए हैं, वे सतही स्तर पर हैं और आने वाले पांच वर्षों में इसका गहरा असर दिखेगा। उन्होंने कहा, अभी प्रभाव केवल सतही है, इसे मूल तक पहुंचाना होगा।


राष्ट्रीय राजनीति पर दीर्घकालिक नजर
हिमंत ने यह भी साफ किया कि राष्ट्रीय राजनीति में जाना उनके दीर्घकालिक प्लान का हिस्सा जरूर है, लेकिन यह तत्काल नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जब तक राज्य में उनकी राजनीतिक रणनीति पूरी तरह सफल नहीं होती, तब तक वह आगे नहीं बढ़ेंगे। पहले यहां की स्थिति को बदलना होगा, उसके बाद ही आगे की दिशा तय होगी।

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