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Assam: सीएम सरमा बोले- महिलाओं को 22 से 30 के बीच मां बन जाना चाहिए! बाल विवाह के खिलाफ लाएंगे कानून
Sat, 28 Jan 2023 10:47 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
Published by: नितिन गौतम
Updated Sat, 28 Jan 2023 10:47 PM IST
सार
मातृत्व पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को मां बनने के लिए बहुत ज्यादा इंतजार भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे शरीर में कई परेशानियां हो सकती हैं।
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मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा
- फोटो : Himanta Biswa Sarma/Twitter
विस्तार
असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को अपने एक बयान में कहा कि महिलाओं को सही समय पर मां बन जाना चाहिए वरना उन्हें शारीरिक परेशानियां हो सकती हैं। सरकार के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार कम उम्र में लड़कियों की शादी और कम उम्र में मातृत्व को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। बता दें कि असम सरकार राज्य में बाल विवाह को रोकने के लिए पोक्सो एक्ट लाने की तैयारी कर रही है।
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सरमा ने कहा कि 14 साल से कम उम्र की लड़कियों से शारीरिक संबंध बनाना अपराध है, फिर चाहे वह नाबालिग का पति ही क्यों ना हो। ऐसे में अगले पांच से छह महीने में हजारों लोग गिरफ्तार हो सकते हैं। एक महिला की शादी की कानूनी उम्र 18 साल है और जो लोग नाबालिग लड़कियों से शादी करते हैं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। कई लोगों को उम्रकैद भी हो सकती है। मातृत्व पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को मां बनने के लिए बहुत ज्यादा इंतजार भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे शरीर में कई परेशानियां हो सकती हैं। मां बनने की सही उम्र 22 साल से 30 साल के बीच की है। भगवान ने हमारे शरीर को इस तरह से बनाया है कि हर चीज का एक समय है। सीएम ने मुस्कुराते हुए कहा कि जिन महिलाओं की शादी नहीं हुई है, उन्हें जल्दी कर लेनी चाहिए।
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बता दें कि असम कैबिनेट ने सोमवार को पोक्सो एक्ट लागू करने के फैसले को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत 14 साल से कम उम्र की लड़की से शादी करने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। असम में मातृत्व और बाल मृत्यु दर ज्यादा है और इसी पर नियंत्रण के लिए सरकार कानून ला रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में औसत 31 फीसदी शादियां प्रतिबंधित उम्र में हो रही हैं।
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पथारूघाट किसान विद्रोह पर डॉक्यूमेंट्री बनाएगी असम सरकार: मुख्यमंत्री
असम सरकार 1894 के पाथारूघाट किसान विद्रोह के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए बड़े कदम उठाएगी। राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को इसका एलान किया। डारंग जिले में एक कार्यक्रम में विद्रोह के शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए सरमा ने कहा कि इस घटना पर एक डॉक्यूमेंट्री बनाई जाएगी। उसकी राष्ट्रीय स्तर पर स्क्रीनिंग की जाएगी।
गौरतलब है कि 28 जनवरी, 1894 को पाथारूघाट में तत्कालीन ब्रिटिश शासकों द्वारा किसानों पर लगाए गए अनुचित बढ़े हुए कर का विरोध करने वाले किसानों पर बिना किसी उकसावे के गोलियां चलाई गईं थीं। आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, उस नरसंहार में मरने वालों की संख्या 15 थी, हालांकि स्थानीय लोगों का दावा है कि 100 से अधिक लोग मारे गए थे।