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आपदा की चपेट में सबसे अधिक एशियाई देश - राजनाथ
एजेंसी/ नई दिल्ली
Updated Thu, 03 Nov 2016 06:16 PM IST
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- फोटो : file photo
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गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि मानवजनित और प्राकृतिक आपदा लगातार बढ़ रही है। विशेषकर एशियाई देश इन आपदाओं से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर एशियाई मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (एएमसीडीआरआर) 2016 का उद्घाटन किया।
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आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर एशियाई मंत्रिस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि विश्व की 10 आपदाओं में से आठ केवल एशियाई देशों को प्रभावित करती हैं। इस प्रकार से विश्व की कुल जनसंख्या की एक तिहाई जनसंख्या इन आपदाओं से पीड़ित है।
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गृह मंत्री ने कहा कि भारत यह मानता है कि समाज के प्रत्येक वर्गों जैसे सरकार, व्यवसाय, समुदाय, गैरसरकारी संस्थानों के लिए यह एक सामूहिक जिम्मेदारी है। अगर हम सभी मिलकर संयुक्त रूप से अपनी जिम्मेदारी समझते हुए इस समस्या से निपटने की कोशिश करेंगे तो तो यह ज्यादा प्रभावी सिद्ध होगा। इस प्रकार से यह एक महत्वपूर्ण सम्मेलन हैं, यह इस प्रकार का पहला कदम है जिसमें हम अपने यहां सेंडाई प्रारूप को अपना रहे हैं।
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''आपदा जोखिम की कोई राजनीतिक सीमा नही होती''
सिंह ने कहा कि आपदा जोखिम की कोई राजनीतिक सीमा नही होती बल्कि मानवीय क्रियाकलाप से आपदा का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। आपदा तो एक क्षेत्र में ही आती है लेकिन यह अन्य क्षेत्रों को भी प्रभावित करती है।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरन रिजिजु ने कहा कि सेंडाई प्रारूप दूरदर्शी व महत्वकांक्षी प्रारूप है जिसका उद्देश्य 2030 तक आपदा से होे वाली क्षति को कम करना है। राष्ट्रीय, स्थानीय स्तर पर सेंडाई प्रारूप मुख्य रूप से इसके मार्गदर्शक सिद्धांत और सात वैश्विक लक्ष्यों सफल क्रियान्वयन पर जोर देता है। तीन दिवसीय इस सम्मेलन में एशिया पैसिफिक क्षेत्र के 61 देशों के 1100 प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरन रिजिजु ने कहा कि सेंडाई प्रारूप दूरदर्शी व महत्वकांक्षी प्रारूप है जिसका उद्देश्य 2030 तक आपदा से होे वाली क्षति को कम करना है। राष्ट्रीय, स्थानीय स्तर पर सेंडाई प्रारूप मुख्य रूप से इसके मार्गदर्शक सिद्धांत और सात वैश्विक लक्ष्यों सफल क्रियान्वयन पर जोर देता है। तीन दिवसीय इस सम्मेलन में एशिया पैसिफिक क्षेत्र के 61 देशों के 1100 प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।