Ashok Chavan: महाराष्ट्र में मचने वाली है बड़ी सियासी हलचल! कांग्रेस के इन बड़े नेताओं पर है अन्य दलों की नजर
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विस्तार
महाराष्ट्र कांग्रेस में मिलिंद देवड़ा के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने भी पार्टी का दामन छोड़ दिया है। इससे पहले कांग्रेस के कद्दावर नेता बाबा सिद्दीकी ने भी पार्टी से अलविदा कह दिया। जानकारी के मुताबिक कांग्रेस पार्टी में अभी और बड़ी भगदड़ मच सकती है। दरअसल पार्टी के भीतर तकरीबन 12 से ज्यादा बड़े नेता पार्टी आलाकमान से नाराज बताए जा रहे हैं। जानकारी यही मिल रही है कि अगले कुछ दिन के भीतर अगर विपक्षी दलों के साथ बातचीत बनती है, तो यह लोग भी कांग्रेस का दामन छोड़ सकते हैं। कई नेता तो कांग्रेस के विधायक भी हैं। दरअसल पार्टी के भीतर मची भगदड़ पीछे बड़ी वजह शिवसेना के साथ हुए कांग्रेस का करार का माना जा रहा है। इसी करार के चलते महाराष्ट्र में कुछ कांग्रेस के नेताओं का अपने अपने इलाकों में सियासी समीकरण बिगड़ता हुआ नजर आ रहा है।
जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं, महाराष्ट्र कांग्रेस के कद्दावर नेता एक के बाद एक पार्टी छोड़ते जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक पार्टी के भीतर तकरीबन 12 और ऐसे बड़े नेता हैं, जो जल्द ही पार्टी का दामन छोड़कर किसी अन्य दल में शामिल हो सकते हैं। महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में चर्चा इसी बात की है कि मिलिंद देवड़ा और बाबा सिद्दीकी के कुछ करीबी नेता इन दोनों लोगों के पार्टी छोड़ने के साथ ही कांग्रेस से अलग होने की जुगत में हैं। राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु शितोले कहते हैं कि कांग्रेस पार्टी के भीतर महाराष्ट्र में बड़ी कुछ और नेताओं के पार्टी छोड़ने की चर्चाएं चल रही हैं। उनका कहना है कि जिस तरह महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण सोमवार को न सिर्फ पार्टी, बल्कि विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया, उससे तस्वीर साफ हो चुकी है कि आने वाले दिनों में कई और विकेट कांग्रेस के गिरने वाले हैं।
महाराष्ट्र के सियासी जानकारों का कहना है कि दरअसल कांग्रेस के भीतर मची उठा पटक के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण सामने आ रहे हैं। इसमें एक प्रमुख कारण कांग्रेस और शिवसेना का आपस में हुआ गठजोड़ भी है। राजनीतिक विश्लेषक जितेंद्र वाडवलकर कहते हैं कि दरअसल महाराष्ट्र में कांग्रेस की सियासत हमेशा से एक अलग तरह से होती आई थी, जिसमें मराठी नेता और हिंदी भाषी नेताओं के गुट थे। लेकिन महाअगाड़ी गठबंधन के बाद प्रत्याशियों के न केवल सियासी समीकरण बदलने शुरू हुए, बल्कि नेतृत्व में भी परिवर्तन होने लगा। महाराष्ट्र कांग्रेस पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि यहां पर शुरुआत से हिंदी भाषी नेताओं और मराठी नेताओं के गुट रहे हैं। लेकिन बीते कुछ समय से कांग्रेस की सियासत में हो रहे बदलाव का असर पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं पर भी पड़ रहा है। इसमें कई नेता खुद को आने वाले चुनाव में सीटों के समीकरण के लिहाज से असहज पा रहे हैं। यही वजह है कि जिसको जहां पर जैसा मौका या अन्य पार्टी से मजबूत आश्वासन मिल रहा है, वह कांग्रेस पार्टी छोड़ रहा है।
सियासी जानकार कहते हैं कि मिलिंद देवड़ा मुंबई दक्षिण की लोकसभा सीट से दावेदारी करते हैं। जबकि वहां पर बीते दो बार से शिवसेना के अरविंद सावंत सांसद हैं। ऐसे में मिलिंद देवड़ा के सामने इस सीट पर टिकट मिलने का बड़ा संकट नजर आ रहा था। बाबा सिद्दीकी के मामले में भी कुछ इसी तरह की सियासी अटकलों और कयासों की बात कही जा रही है। महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में चर्चा इस बात की भी हो रही है कि कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे बाबा सिद्दीकी के पार्टी छोड़ने के बाद उनके बेटे और बांद्रा से कांग्रेस के विधायक जीशान सिद्दीकी भी जल्द ही पार्टी छोड़ सकते हैं। जानकारों का कहना है कि नए गठबंधन में सियासी समीकरण ठीक न होने के चलते इस तरह के फैसले लिए जा सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संभव है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस पार्टी के भीतर कुछ और विधायकों या बड़े नेताओं की टूट हो।
सिर्फ गठबंधन ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में बीते कुछ समय में हुई सियासी उठापटक का भी बड़ा असर कांग्रेस की टूट के तौर पर देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि कांग्रेस महाराष्ट्र में सत्ता से बाहर है। जिस तरह से महाराष्ट्र के भीतर दल बदलने के साथ-साथ सत्ता में बने रहने का बैलेंस नेताओं की ओर से किया जा रहा है, उसका बड़ा असर कांग्रेस के नेताओं पर भी पड़ रहा है। राजनीतिक विश्लेषक जितेंद्र वाडवलकर कहते हैं कि सत्ता में रहा राजनेता अगर लंबे समय तक सत्ता से बाहर हो, तो वह फिर सत्ता में वापसी के प्रयास तो करता ही है। महाराष्ट्र की सियासत में बीते कुछ समय से शिवसेना और एनसीपी के टूटने से यह तस्वीर और पुख्ता भी हो रही है। उनका कहना है कि जो नेता सत्ता में ही रहने में यकीन रखते हैं उनकी आस्था पार्टी से डिग जाती है। फिलहाल महाराष्ट्र की सियासत में चर्चा इस बात की भी हो रही है कि कांग्रेस के तकरीबन 12 से ज्यादा बड़े नेता नेतृत्व से खुश नहीं है। इन नेताओं ने अपना विरोध भी पार्टी आलाकमान और जिम्मेदार पदाधिकारी तक पहुंचाया है। ऐसे में अगर इन नेताओं की बात नहीं सुनी गई तो यह नेता भी पार्टी छोड़ सकते हैं।