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ऑपरेशन सिंदूर के बाद नई रणनीति: अब भारतीय वायुसेना की प्राथमिकता लंबी दूरी वाली मिसाइलें, मारक क्षमता 200 KM+
Tue, 12 Aug 2025 10:16 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Tue, 12 Aug 2025 10:16 PM IST
सार
Lesson From Operation Sindoor: पहलगाम आतंकी हमले के बाद सेना की तरफ से चलाए सफल 'ऑपरेशन सिंदूर' से भारतीय वायुसेना ने सबक भी सीखी है। दरअसल, इस दौरान वायुसेना ने 300 किमी दूर दुश्मन के बड़े विमान को निशाना बनाया था, जिससे वायुसेना ने सीखा कि लंबी दूरी की मिसाइलें कितनी महत्वपूर्ण होती हैं।
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S-400 Missile Defence System
- फोटो : ANI
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विस्तार
भारतीय वायु सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के अनुभव से सीखा है कि लंबी दूरी की मिसाइलें कितनी महत्वपूर्ण होती हैं। इस ऑपरेशन में भारतीय वायु सेना ने ब्रह्मोस, स्कैल्प, रैम्पेज और क्रिस्टल मेज जैसे मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जिनकी मारक क्षमता 200 किलोमीटर से अधिक है। इन मिसाइलों की मदद से दुश्मन के ठिकानों और सैन्य साधनों को 250 से 450 किलोमीटर की दूरी से ही निशाना बनाया गया, जिससे चीनी एचक्यू-9 वायु रक्षा प्रणाली की चुनौती को भी मात दी गई।
यह भी पढ़ें - Asaduddin Owaisi: 'वह एक सड़कछाप आदमी की तरह बोल रहे', ओवैसी ने आसिम मुनीर को सुनाई खरी-खोटी
डीआरडीओ को बड़ी रेंज वाली मिसाइल बनाने के लिए कहा गया
अब भारतीय वायु सेना लंबी दूरी की एयर-टू-ग्राउंड, एयर-टू-एयर और सरफेस-टू-एयर मिसाइलों को अपने बेड़े में शामिल करने पर जोर दे रही है। इसके लिए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) को अस्त्रा एयर-टू-एयर मिसाइल के बढ़े हुए रेंज वाले वेरिएंट विकसित करने के लिए कहा गया है, जो 200 किलोमीटर से अधिक दूरी तक निशाना साध सके। साथ ही, रूस की R-37 मिसाइलों को भी खरीदने की संभावना देखी जा रही है, जिनका रेंज भी 200 किलोमीटर से ऊपर है।
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दो S-400 खरीदने की भी योजना
भारतीय वायु सेना ने प्रोजेक्ट कुशा के तहत लंबी दूरी की वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली के विकास को तेज करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम की कम से कम दो स्क्वाड्रन खरीदने की योजना भी बनी है। इस प्रणाली की वजह से पाकिस्तान की सेना को अपनी उड़ानों को गहरे इलाकों या कम ऊंचाई पर ही संचालित करना पड़ता है, ताकि वे आसानी से पता न चलें।
यह भी पढ़ें - थरूर की संसदीय समिति ने कहा: अमेरिका से आगे है चीनी नौसेना, PAK-ड्रैगन से समुद्री खतरे को लेकर सतर्क रहे सरकार
भारतीय वायु सेना ने सरकार को अपनी जरूरतों की एक विस्तृत रिपोर्ट भी दी है, जिसमें राफेल लड़ाकू विमान, पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान और कई तरह की लंबी दूरी की हथियार प्रणालियां शामिल हैं। ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित कर दिया कि भविष्य की लड़ाइयों में लंबी दूरी की मारक क्षमता ही निर्णायक भूमिका निभाएगी।
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डीआरडीओ को बड़ी रेंज वाली मिसाइल बनाने के लिए कहा गया
अब भारतीय वायु सेना लंबी दूरी की एयर-टू-ग्राउंड, एयर-टू-एयर और सरफेस-टू-एयर मिसाइलों को अपने बेड़े में शामिल करने पर जोर दे रही है। इसके लिए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) को अस्त्रा एयर-टू-एयर मिसाइल के बढ़े हुए रेंज वाले वेरिएंट विकसित करने के लिए कहा गया है, जो 200 किलोमीटर से अधिक दूरी तक निशाना साध सके। साथ ही, रूस की R-37 मिसाइलों को भी खरीदने की संभावना देखी जा रही है, जिनका रेंज भी 200 किलोमीटर से ऊपर है।
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दो S-400 खरीदने की भी योजना
भारतीय वायु सेना ने प्रोजेक्ट कुशा के तहत लंबी दूरी की वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली के विकास को तेज करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम की कम से कम दो स्क्वाड्रन खरीदने की योजना भी बनी है। इस प्रणाली की वजह से पाकिस्तान की सेना को अपनी उड़ानों को गहरे इलाकों या कम ऊंचाई पर ही संचालित करना पड़ता है, ताकि वे आसानी से पता न चलें।
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भारतीय वायु सेना ने सरकार को अपनी जरूरतों की एक विस्तृत रिपोर्ट भी दी है, जिसमें राफेल लड़ाकू विमान, पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान और कई तरह की लंबी दूरी की हथियार प्रणालियां शामिल हैं। ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित कर दिया कि भविष्य की लड़ाइयों में लंबी दूरी की मारक क्षमता ही निर्णायक भूमिका निभाएगी।
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