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UCC: समान नागरिक संहिता पर विधि आयोग को मिले 46 लाख सुझाव, धार्मिक संगठनों सहित सभी हितधारकों से मांगी थी राय

Tue, 11 Jul 2023 04:36 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 11 Jul 2023 04:36 PM IST
सार

UCC: विधि आयोग को सोमवार शाम तक समिति को करीब 46 लाख प्रतिक्रियाएं मिल चुकी थीं। आयोग ने 14 जून को राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस मुद्दे पर सार्वजनिक और मान्यता प्राप्त धार्मिक संगठनों सहित हितधारकों से राय मांगकर एक नई परामर्श प्रक्रिया शुरू की थी।

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As deadline nears, Law Commission gets 46 lakh responses on Uniform Civil Code
Uniform Civil Code - फोटो : Istock

विस्तार

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर विचार भेजने की समय सीमा दो दिन में समाप्त होने के बाद विधि आयोग को अब तक करीब 46 लाख प्रतिक्रियाएं मिल चुकी हैं। आयोग आने वाले दिनों में कुछ संगठनों और लोगों को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुला सकता है। सूत्रों ने बताया कि इनमें से कुछ निमंत्रण पत्र पहले ही भेजे जा चुके हैं।

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सोमवार शाम तक समिति को करीब 46 लाख प्रतिक्रियाएं मिल चुकी थीं। विधि आयोग ने 14 जून को राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस मुद्दे पर सार्वजनिक और मान्यता प्राप्त धार्मिक संगठनों सहित हितधारकों से राय मांगकर एक नई परामर्श प्रक्रिया शुरू की थी। इससे पहले, 21वें विधि आयोग ने इस मुद्दे की जांच की और दो मौकों पर सभी हितधारकों के विचार मांगे। 21वें विधि आयोग का कार्यकाल अगस्त 2018 में समाप्त हो गया था। 

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इसके बाद, अगस्त 2018 में 'परिवार कानून के सुधार' पर एक परामर्श पत्र जारी किया गया था। आयोग ने एक 'सार्वजनिक नोटिस' में कहा था, 'चूंकि इस विषय की प्रासंगिकता और महत्व व इस विषय पर अदालत के विभिन्न आदेशों को ध्यान में रखते हुए उक्त परामर्श पत्र जारी होने की तारीख से तीन साल से अधिक समय बीत चुका है, इसलिए भारत के 22वें विधि आयोग ने इस विषय पर नए सिरे से विचार करना उचित समझा।'

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इस महीने की शुरुआत में एक संसदीय समिति के समक्ष पेश होते हुए विधि आयोग के प्रतिनिधियों ने नए सिरे से परामर्श प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा था कि पूर्ववर्ती आयोग ने 2018 में अपने सुझाव दिए थे और उसका कार्यकाल भी समाप्त हो गया था। यही कारण है कि उन्होंने एक नई पहल शुरू की है जो अनिवार्य रूप से 'सूचनात्मक' है।  

न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बीएस चौहान की अध्यक्षता वाले पूर्ववर्ती विधि आयोग ने 31 अगस्त 2018 को जारी अपने परामर्श पत्र में कहा था कि भारतीय संस्कृति की विविधता का जश्न मनाया जा सकता है और मनाया जाना चाहिए लेकिन इस प्रक्रिया में समाज के विशिष्ट समूहों या कमजोर तबकों को 'वंचित' नहीं किया जाना चाहिए।

इसमें कहा गया है कि आयोग समान नागरिक संहिता प्रदान करने के बजाय भेदभावपूर्ण कानूनों से निपटता है जो इस स्तर पर न तो जरूरी है और न ही वांछनीय है। परामर्श पत्र में कहा गया है कि ज्यादातर देश अब अंतर को पहचानने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और केवल मतभेद होने का मतलब भेदभाव नहीं है, बल्कि यह एक मजबूत लोकतंत्र का संकेत है।

एक समान नागरिक संहिता का अर्थ है देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना जो धर्म पर आधारित नहीं है। व्यक्तिगत कानूनों और विरासत, गोद लेने और उत्तराधिकार से संबंधित कानूनों को एक सामान्य संहिता द्वारा कवर किए जाने की संभावना है। समान नागरिक संहिता लागू करना भाजपा के चुनावी घोषणापत्र का हिस्सा रहा है। उत्तराखंड आने वाले दिनों में अपना समान नागरिक संहिता लाने जा रहा है।

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