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रक्षा मंत्री के तौर पर अरुण जेटली ने कई प्रमुख सैन्य सुधारों को गति दी

Sat, 24 Aug 2019 08:49 PM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Trainee Trainee Updated Sat, 24 Aug 2019 08:49 PM IST
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As a Defense Minister Arun Jaitley gave impetus to many major military reforms
अरूण जेटली

रक्षा मंत्री के तौर पर दो बार अपने छोटे से कार्यकाल में अरुण जेटली ने सैन्य बलों में दीर्घकालिक लंबित सुधारों की दिशा में राह दिखाई और रक्षा निर्माण में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अहम नीतिगत पहल लेकर आए। नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में जेटली ने 26 मई से नौ नवंबर 2014 तक रक्षा मंत्री का पदभार संभाला था, इसके बाद मनोहर पर्रिकर को गोवा से बुलाकर रक्षा मंत्री का पदभार सौंपा गया था।

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गोवा का मुख्यमंत्री बनने के लिये पर्रिकर ने जब केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया तब तत्कालीन वित्त मंत्री जेटली को 14 मार्च 2017 में एक बार फिर रक्षा मंत्रालय का पदभार सौंपा गया। सात सितंबर 2017 को निर्मला सीतारमण ने उनकी जगह रक्षा मंत्री का पदभार संभाला।
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भाजपा के कद्दावर नेता का शनिवार को एम्स में निधन हो गया। पिछले कई महीने से वह स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं से जूझ रहे थे। रक्षा मंत्री के तौर पर जेटली के कार्यकाल में बड़े सुधार किए गए और रक्षा खरीद की प्रक्रिया का सरलीकरण किया गया।
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जेटली ने जो सर्वाधिक अहम पहल की, वह भारत को रक्षा निर्माण के क्षेत्र में एक केंद्र बनाना था। उन्होंने लंबे समय से लंबित रहे साझेदारी मॉडल को मई 2017 में शुरु किया। उनकी बनाई नीति के तहत चुनिंदा निजी भारतीय कंपनियों को विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर भारत में पनडुब्बी, लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और बख्तरबंद वाहन/मुख्य युद्धक टैंक जैसे सैन्य साजो-सामान के निर्माण की इजाजत मिली।

इस नीति ने एक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के माध्यम से भारत की रक्षा क्षेत्र की बड़ी कंपनियों के साथ दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी की स्थापना की परिकल्पना की जिसमें भारतीय कंपनियां विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर घरेलू निर्माण ढांचा की स्थापना करेंगी।


इस नीति के तहत पहली परियोजना को पिछले साल अंतिम रूप दिया गया जिसके तहत भारतीय नौसेना 21,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 111 हेलीकॉप्टर खरीदेगी। रक्षा मंत्री के तौर पर जेटली ने अगस्त 2017 में भारतीय सेना के लिए 65 सुधारात्मक उपायों को मंजूरी दी जिनमें करीब 57,000 अधिकारियों और अन्य रैंक के कर्मियों का पुनर्नियोजन शामिल है।
 

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