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Aryan Khan Drug Case: आर्यन की जमानत में इस मंत्रालय की क्या भूमिका है, मुकुल रोहतगी ने क्या दी दलील

Thu, 28 Oct 2021 07:38 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Thu, 28 Oct 2021 07:38 PM IST
सार

आर्यन खान को जमानत दिलाने में पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी का बड़ा हाथ है। लेकिन माना जा रहा है कि रोहतगी ने जो दलीलें अदालत के सामने पेश की उसमें सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्रालय की भी बड़ी भूमिका है। 
 

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Aryan Khan Drug Case: What is the role of this ministry in Aryan's bail, what did Mukul Rohatgi argue
आर्यन खान - फोटो : PTI

विस्तार

ड्रग्स केस में फंसे शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को बड़ी मुश्किलों के बाद आखिरकार आज जमानत मिली है। आर्यन खान के साथ गिरफ्तार हुए दो और आरोपियों को भी बॉम्बे हाई कोर्ट ने जमानत दे दी है। हालांकि अदालत से आदेश की कॉपी न मिलने के कारण तीनों को शुक्रवार या शनिवार तक रिहा किया जाएगा। 
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रोहतगी ने आर्यन को जमानत दिलाने में अन्य दलीलों के साथ-साथ यह भी कहा कि नए लड़के हैं। इन्हें सुधार गृह में भेजा जा सकता है। इन पर मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिए। मैंने अखबारों में भी पढ़ा है कि सरकार ‘सुधारों’ के बारे में बात कर रही है।
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रोहतगी यहां जिस ‘सुधार’ की बात कह रहे थे, वह दरअसल सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्रालय की सिफारिश है जिसमें कहा गया है कि निजी इस्तेमाल के लिए कम मात्रा में ड्रग्स को रखने को अपराध की श्रेणी से हटा दिया जाए। मंत्रालय ने राजस्व विभाग को नशीली दवा एवं मादक पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम की समीक्षा में यह सुझाव दिया गया है। बताया जा रहा है कि रोहतगी ने इसी सिफारिश का हवाला अपनी दलील में दिया है।
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क्या है सिफारिश
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मंत्रालय ने अपनी सिफारिश में कहा है कि यदि कोई व्यक्ति निजी इस्तेमाल के लिए कम मात्रा में ड्रग्स के साथ पकड़ा जाता है तो उस व्यक्ति को जेल नहीं भेजा जाना चाहिए। बल्कि सरकारी केंद्रों पर उपचार के लिए भेजा जाना चाहिए। मौजूदा एनडीपीएस अधिनियम के तहत राहत या छूट का कोई प्रावधान नहीं है और आरोपी सजा और जेल जाने से तभी बचा सकता है, जब वह खुद पुनर्वास केंद्र जाना चाहे।
 
पिछले महीने ही राजस्व विभाग ने जो एनडीपीएस अधिनियम का नोडल प्राधिकरण है उसने गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और सीबीआई सहित कई मंत्रालयों और विभागों से कानून में बदलाव के लिए सुझाव मांगे थे। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने इसी संबंध में राजस्व विभाग को अपने सुझाव भेजे हैं।

क्या है धारा 27
भारत में ड्रग्स रखना या इसका सेवन करना एक अपराध है और एनडीपीएस एक्ट की धारा 27 में किसी भी नशीली दवा या साइकोट्रोपिक पदार्थ के सेवन के लिए एक साल तक की कैद और 20,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यह अधिनियम पहली बार या मनोरंजन के लिए बार-बार ड्रग्स लेने वालों के बीच कोई अंतर नहीं करता है। यही वह प्रावधान है जिसके लिए मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया है कि जेल और जुर्माने के प्रावधान की जगह आरोपियों के लिए सरकार की ओर से संचालित पुनर्वास और परामर्श केंद्रों में कम से कम 30 दिनों तक अनिवार्य उपचार लेना जरूरी बना दिया जाए। धारा 27 का इस्तेमाल कई हाई-प्रोफाइल मामलों में किया जा चुका है और आर्यन खान की गिरफ्तारी भी इसी धारा में हुई थी।


एनडीपीएस अधिनियम क्या है?
14 नवंबर 1985 को एनडीपीएस अधिनियम लागू हुआ है। तब से है अब तक इसमें चार बार संशोधन हो चुका है। यह अधिनियम भारत के बाहर के सभी भारतीय नागरिकों और भारत में पंजीकृत जहाजों और विमानों पर सवार सभी व्यक्तियों पर भी लागू होता है। 

 
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