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अरुणाचल का अनोखा शिक्षा मार्च: आधी रात 65 किमी पैदल चलीं 90 छात्राएं, स्कूल में शिक्षकों की कमी से हैं नाराज

Tue, 16 Sep 2025 07:35 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ईटानगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ईटानगर Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 16 Sep 2025 07:35 AM IST
सार

अरुणाचल के केजीबीवी की 90 छात्राओं ने शिक्षकों की कमी के खिलाफ रातभर 65 किमी पैदल मार्च कर लेम्मी मुख्यालय पहुंचकर प्रशासन को जगाया। भूगोल और राजनीति विज्ञान के शिक्षकों की मांग कर रहीं छात्राओं का कहना है कि कई बार अपील के बावजूद सुनवाई नहीं हुई। "बिना शिक्षक का स्कूल सिर्फ इमारत है" जैसे पोस्टर छाए रहे।

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Arunachal Pradesh unique education march 90 girl students walked 65 km at midnight News In Hindi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : FreePik

विस्तार

अरुणाचल प्रदेश के पक्के केसांग जिले की कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) की 90 से ज्यादा छात्राओं ने शिक्षकों की कमी को लेकर अनोखा विरोध किया। छात्राएं रविवार को न्यंग्नो गांव से रातभर 65 किलोमीटर पैदल मार्च कर सोमवार सुबह लेम्मी जिला मुख्यालय पहुंचीं। नीली यूनिफॉर्म में छात्राओं का यह मार्च पूरी रात चला। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें छात्राएं छाता और बैग लेकर नारे लगाती दिखीं। हालांकि, वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
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प्रदर्शन की अगुवाई कक्षा 11 और 12 की छात्राओं ने की। उन्होंने भूगोल और राजनीति विज्ञान के शिक्षकों की नियुक्ति की मांग रखी। पोस्टरों पर लिखा था- बिना शिक्षक का स्कूल सिर्फ इमारत है। छात्राओं का कहना है कि बार-बार अपील करने के बावजूद विभाग ने सुनवाई नहीं की। आधी रात हुए इस मार्च ने अभिभावकों और प्रशासन को हिलाकर रख दिया।
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गौरतलब है कि विद्यालय 2011-12 में स्थापित हुआ था और इसे सई डोनी चैरिटेबल ट्रस्ट नामक एनजीओ संचालित करता है। यहां 90 से अधिक छात्राएं, एक प्रधानाचार्या, वार्डन और 13 शिक्षक हैं। विभाग ने हाल ही में दो संविदा शिक्षक नियुक्त किए थे और तीन और पदों के लिए इंटरव्यू भी लिया गया था। छात्राओं के इस मार्च ने तत्काल असर दिखाया और मांगें पूरी कर दी गईं।

विभाग ने गाड़ियों से स्कूल वापस लौटाया
पक्के केसांग के स्कूल शिक्षा के उप निदेशक (डीडीएसई) दीपक तायेंग ने माना कि शिक्षकों की कमी है। उन्होंने कहा कि बिना हॉस्टल वॉर्डन को जानकारी दिए छात्राएं मार्च पर निकल पड़ीं। विभाग ने अब भूगोल और राजनीति विज्ञान शिक्षक की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। छात्राओं को विभाग द्वारा भेजी गई गाड़ियों से स्कूल लौटाया गया।

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