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'देशहित के खिलाफ खड़ा होना वामपथियों की ऐतिहासिक परंपरा'
हिमांशु मिश्र/ अमर उजाला, वृंदावन
Updated Sun, 06 Mar 2016 11:50 PM IST
सार
- हिंसा के बदौलत हासिल करना चाहते हैं हिंसा
- जय हिंद बोलने पर मजबूर हुए नारे लगाने वाले
- विचित्र तरह की राजनीति का चलन
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सपा बसपा पर नहीं बोले जेटली
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जे.एन.यू प्रकण को वित्तमंत्री अरुण जेटली ने राष्ट्रवादी और सामवादियों के बीच वैचारिक जंग का करार देते हुए वामदलों के साथ-साथ कांग्रेस पर भी सीधा सियासी हमला बोला। जेटली ने कहा कि विचित्र तरह की शुरू हुई राजनीति में मूल टकराव राष्ट्रवादी ताकतों और देशहित के खिलाफ हमेशा खड़ा होने की परंपरा वाली साम्यवादियों के बीच है। दुर्भाग्य से इन शब्द के साथ खड़ा होकर राहुल गांधी ने कांग्रेस की देश तोड़ने वाली ताकतों से हमेशा से बनी रहने वाली दूरी खत्म कर दी है।
वैचारिक लड़ाई में भाजपा को जीत हासिल होने का दावा करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि देश तोड़ने का नारा लगाते हुए जेल जाने वाले अब बाहर आकर तिरंगा लहराने और जयहिंद बोलने पर मजबूर हुए है। वित्त मंत्री ने इस मुद्दे पर जारी वैचारिक बहस को घर-घर पहुंचाने का आह्वान किया इससे एक बार फिर साफ हुआ है कि मिशन उत्तर प्रदेश के लिए जुटी पार्टी राष्ट्रवाद को ही मुख्य मुद्दा बनाएगी।
भारतीय जनता युवा मोर्चा के अधिवेशन में शनिवार की तरह ही रविवार को भी जेएनयू और कन्हैया मुद्दा ही छाया रहा। रविवार को जेटली ने इसे राष्ट्रवादी और साम्यवादी विचारधारा का मूल टकराव बताया। जेटली ने कहा कि देशहित के खिलाफ खड़ा होने की वाम राजनीति की ऐतिहासिक परंपरा रही है। चाहे आजादी का आंदोलन हो या चीन का भारत पर हमला या फिर देश पर आपातकाल थोपे जाने की घटना। इन सभी मामलों में वामपंथी शक्तियां देशहित के खिलाफ ही खड़ी हुईं। दरअसल इस विचारधारा वाले् लोगों की हसरत देश को टुकड़े-टुकड़े करने और हिंसा की बदौलत सत्ता पर कब्जा करने की रही है।
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इस खतरे को महात्मा गांधी, भीमराव अम्बेडकर, पंडित नेहरु, इंदिरा गांधी, और यहां तक की राजीव गांधी ने भी पहचाना था। इसी कारण राष्ट्रवाद और देशहित के सवाल पर इन नेताओं ने वामपंथी ताकतों से हमेशा दूरी बरती। हालांकि दुर्भाग्य पूर्ण ढंग से राहुल ने ऐसे तत्वों को समर्थन देकर इस महत्वपूर्ण दूरी को ही खत्म कर दिया।
वित्तमंत्री ने कहा कि देश में विचित्र तरह की राजनीति का चलन शुरु हुआ है। जिहादी विचारधारा का छोटा और माओववादी विचारधारा का एक बड़ा वर्ग आतंकी याकूब मेमन और अफजलगुरू के पक्ष में कार्यक्रम करना चाहते है।
दुर्भाग्यवश राहुल भी आज ऐसी ताकतों के साथ खड़े हैं। उन्होंने इस वैचारिक लडाई को घर-घर पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कार्यकर्ता से कहा कि वैचारिक मामले में पार्टी की जीत हुई है। जहां तक मोदी सरकार के प्रर्दशन का सवाल है तो हमने हर क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन किया है। भ्रष्टाचार विकास और गरीबी के सवाल पर विपक्ष निरोत्तर है। ऐसे में कार्यकर्ता गर्व के साथ लोगों के बीच जाएं।
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वैचारिक लड़ाई में भाजपा को जीत हासिल होने का दावा करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि देश तोड़ने का नारा लगाते हुए जेल जाने वाले अब बाहर आकर तिरंगा लहराने और जयहिंद बोलने पर मजबूर हुए है। वित्त मंत्री ने इस मुद्दे पर जारी वैचारिक बहस को घर-घर पहुंचाने का आह्वान किया इससे एक बार फिर साफ हुआ है कि मिशन उत्तर प्रदेश के लिए जुटी पार्टी राष्ट्रवाद को ही मुख्य मुद्दा बनाएगी।
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भारतीय जनता युवा मोर्चा के अधिवेशन में शनिवार की तरह ही रविवार को भी जेएनयू और कन्हैया मुद्दा ही छाया रहा। रविवार को जेटली ने इसे राष्ट्रवादी और साम्यवादी विचारधारा का मूल टकराव बताया। जेटली ने कहा कि देशहित के खिलाफ खड़ा होने की वाम राजनीति की ऐतिहासिक परंपरा रही है। चाहे आजादी का आंदोलन हो या चीन का भारत पर हमला या फिर देश पर आपातकाल थोपे जाने की घटना। इन सभी मामलों में वामपंथी शक्तियां देशहित के खिलाफ ही खड़ी हुईं। दरअसल इस विचारधारा वाले् लोगों की हसरत देश को टुकड़े-टुकड़े करने और हिंसा की बदौलत सत्ता पर कब्जा करने की रही है।
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इस खतरे को महात्मा गांधी, भीमराव अम्बेडकर, पंडित नेहरु, इंदिरा गांधी, और यहां तक की राजीव गांधी ने भी पहचाना था। इसी कारण राष्ट्रवाद और देशहित के सवाल पर इन नेताओं ने वामपंथी ताकतों से हमेशा दूरी बरती। हालांकि दुर्भाग्य पूर्ण ढंग से राहुल ने ऐसे तत्वों को समर्थन देकर इस महत्वपूर्ण दूरी को ही खत्म कर दिया।
वित्तमंत्री ने कहा कि देश में विचित्र तरह की राजनीति का चलन शुरु हुआ है। जिहादी विचारधारा का छोटा और माओववादी विचारधारा का एक बड़ा वर्ग आतंकी याकूब मेमन और अफजलगुरू के पक्ष में कार्यक्रम करना चाहते है।
दुर्भाग्यवश राहुल भी आज ऐसी ताकतों के साथ खड़े हैं। उन्होंने इस वैचारिक लडाई को घर-घर पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कार्यकर्ता से कहा कि वैचारिक मामले में पार्टी की जीत हुई है। जहां तक मोदी सरकार के प्रर्दशन का सवाल है तो हमने हर क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन किया है। भ्रष्टाचार विकास और गरीबी के सवाल पर विपक्ष निरोत्तर है। ऐसे में कार्यकर्ता गर्व के साथ लोगों के बीच जाएं।