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तकनीक: आखिर क्यों खराब है आपका मूड, अब AI नींद के पैटर्न से करेगा भविष्यवाणी

Sat, 23 Nov 2024 04:55 AM IST
दीपक कुमार शर्मा एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 23 Nov 2024 04:55 AM IST
सार

प्रमुख शोधकर्ता किम जे क्यूंग ने कहा, केवल नींद और जागने के पैटर्न के डाटा के आधार पर मूड बदलने की भविष्यवाणी करने वाले एआई मॉडल को विकसित कर डाटा इकट्ठा करने की लागत को कम कर दिया है। इससे बीमारी के लक्षणों को पहचानने की दिशा में भी सुधार आया है। 

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Artifical Intelligence will now predict mood disorders using sleep patterns
एआई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शोधकर्ताओं ने एक ऐसा एआई टूल विकसित किया है जो स्मार्ट वॉच जैसे पहने जाने वाले डिवाइस से रिकॉर्ड किए गए नींद के पैटर्न का विश्लेषण कर अवसाद जैसे मूड डिसऑर्डर का पूर्वानुमान लगा सकता है। यह खुलासा दक्षिण कोरिया के इंस्टीट्यूट फॉर बेसिक साइंस के शोधकर्ताओं ने किया है। अध्ययन एनपीजे डिजिटल मेडिसिन पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

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मूड डिसऑर्डर में बाइपोलर डिसऑर्डर भी शामिल है। अक्सर इससे ग्रस्त लोग भावनाओं में अत्यधिक उतार-चढ़ाव का अनुभव करते हैं। उन्हें लंबे वक्त तक अत्यधिक उदासी, खुशी, या बेचैनी का अनुभव हो सकता है। ये डिसऑर्डर नींद और जागने की लय (स्लीप-वेक रिदम) से गहराई से जुड़े होते हैं और इनमें गड़बड़ी मूड बदलने को उकसा सकती है। शोधकर्ताओं की टीम ने पहने जाने वाले डिवाइस के आंकड़ों का इस्तेमाल किया। टीम के मुताबिक,ऐसे पहने जाने वाले उपकरणों के बढ़ते चलन से सेहत से जुड़े आंकड़े जुटाने में खासी मदद और आसानी होती है। 
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मरीजों के लिए वरदान साबित होगा मॉडल
प्रमुख शोधकर्ता किम जे क्यूंग ने कहा, केवल नींद और जागने के पैटर्न के डाटा के आधार पर मूड बदलने की भविष्यवाणी करने वाले एआई मॉडल को विकसित कर डाटा इकट्ठा करने की लागत को कम कर दिया है। इससे बीमारी के लक्षणों को पहचानने की दिशा में भी सुधार आया है। उनका अध्ययन मूड डिसऑर्डर से जूझ रहे मरीजों के लिए इलाज सस्ता और आसान बना सकता है।  शोधकर्ताओं के मुताबिक, उनका यह डिवाइस शुरू में बीमारी के लक्षणों को पकड़ने और इलाज में मदद कर सकता है। इसके साथ ही महज नींद के डाटा के आधार पर मूड डिसऑर्डर की निगरानी और  प्रबंधन का एक किफायती तरीका देता है।
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प्रमुख शोधकर्ता किम जे क्यूंग ने कहा, केवल नींद और जागने के पैटर्न के डाटा के आधार पर मूड बदलने की भविष्यवाणी करने वाले एआई मॉडल को विकसित कर डाटा इकट्ठा करने की लागत को कम कर दिया है। इससे बीमारी के लक्षणों को पहचानने की दिशा में भी सुधार आया है। उनका अध्ययन मूड डिसऑर्डर से जूझ रहे मरीजों के लिए इलाज सस्ता और आसान बना सकता है।  शोधकर्ताओं के मुताबिक, उनका यह डिवाइस शुरू में बीमारी के लक्षणों को पकड़ने और इलाज में मदद कर सकता है। इसके साथ ही महज नींद के डाटा के आधार पर मूड डिसऑर्डर की निगरानी और  प्रबंधन का एक किफायती तरीका देता है।


न देर तक जागें और न सोएं
अध्ययन के अनुसार आपके शरीर की आंतरिक घड़ी यानी सर्कैडियन रिदम आपके मूड और मानसिक सेहत पर असर डाल सकती है। सर्कैडियन रिदम का देरी से चलना यानी अगर आपकी नींद का समय आगे खिसकता है (आप देर से सोते और देर से जागते हैं) तो इससे उदासी या डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है। सर्कैडियन रिदम का जल्दी चलना मतलब अगर आपकी नींद का समय पहले हो जाता है (आप जल्दी सोते और जल्दी जागते हैं) तो इससे उतेजित अवस्था का खतरा बढ़ सकता है।

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