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NGT: 'बिहार और बंगाल के पानी में सबसे ज्यादा आर्सेनिक, फसलों को कर रहा प्रभावित', केंद्र का एनजीटी में जवाब

Sun, 22 Dec 2024 12:40 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Sun, 22 Dec 2024 12:40 PM IST
सार

चावलों के आर्सेनिक से प्रभावित होने के मु्द्दे पर सुनवाई कर रही एनजीटी ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। पश्चिम बंगाल और बिहार के पानी में सबसे ज्यादा आर्सेनिक है। दूषित पानी से सिंचाई करने से आर्सेनिक मिट्टी में प्रवेश कर रहा है। इसके बाद यह खाद्य पदार्थों में प्रवेश करता है। केंद्र ने बताया कि फसल में जड़ के जरिये आर्सेनिक का प्रवेश शुरू होता है। जड़ के बाद यह तने और फिर पत्तियों में पहुंचता है।

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'Arsenic is highest in the water of Bihar and Bengal, affecting crops', Centre's reply in NGT
एनजीटी - फोटो : संवाद

विस्तार

पश्चिम बंगाल और बिहार के पानी में सबसे ज्यादा आर्सेनिक है। हालात यह हैं कि भूजल में मौजूद आर्सेनिक फसलों को भी प्रभावित कर रहा है। साथ ही खाद्य पदार्थों के जरिये लोगों के शरीर में पहुंच रहा है। हाल ही में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) को यह जानकारी दी है। चावलों के आर्सेनिक से प्रभावित होने के मु्द्दे पर सुनवाई कर रही एनजीटी ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। 

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एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने आदेश में कहा कि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से इनपुट मांगने के बाद अपना जवाब दाखिल किया था। केंद्र ने अपने जवाब में लिखा है कि पश्चिम बंगाल और बिहार के पानी में सबसे ज्यादा आर्सेनिक है। दूषित पानी से सिंचाई करने से आर्सेनिक मिट्टी में प्रवेश कर रहा है। इसके बाद यह खाद्य पदार्थों में प्रवेश करता है। 
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केंद्र ने जवाब में कहा है कि इसलिए चावल में आर्सेनिक की मात्रा अधिक हो सकती है, क्योंकि चावल भी अधिक पानी वाली फसल है। जिन क्षेत्रों में आर्सेनिक की अधिकता है, वहां पर उगाए गए चावल में आर्सेनिक होगा। अगर इसको दूसरे स्थानों पर ले जाया जाता है तो बड़ी आबादी के आर्सेनिक से प्रभावित होने का खतरा है। मामले में अब एनजीटी ने  भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद को प्रतिवादी बनाते हुए जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई अब 15 अप्रैल को होगी। 
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जड़ से शुरू होता है आर्सेनिक का प्रवेश
केंद्र सरकार ने एनजीटी को बताया कि फसल में जड़ के जरिये आर्सेनिक का प्रवेश शुरू होता है। जड़ के बाद यह तने और फिर पत्तियों में पहुंचता है। एक रिपोर्ट में बताया गया कि पत्तेदार सब्जी जैसे पालक, मैथी और जमीकंद सब्जी जैसे चुकंदर, आलू, मूली में अधिक आर्सेनिक पाया गया है। जबकि पौधे वाली सब्जी जैसे बैंगन, टमाटर, भिंडी, सेम में कम आर्सेनिक मिला है। 


आर्सेनिक के प्रभाव को कम करने के बारे में भी बताया
केंद्र ने एनजीटी को फसलों में आर्सेनिक कम करने के उपाय भी बताए हैं। इसके मुताबिक जिन स्थानों पर आर्सेनिक है, वहां अधिक पानी वाली फसल चावल की जगह कम पानी वाली फसल की जाए। इसके अलावा आर्सेनिक को सहन करने वाली चावल की किस्म को बोया जाए। शुष्क मौसम में ऐसे क्षेत्रों में फलीदार फसलों को उगाया जाए। हरी खाद और सिलिकेट खाद का प्रयोग करके आर्सेनिक को कम किया जा सकता है। इसके अलावा आर्सेनिक वाले पानी को तालाब में इकट्ठा किया जाए और बारिश के पानी से उसे कम किया जाए। 

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