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Hindi News ›   India News ›   Arrest of President's medal awardee cop illegal: HC; orders Maharashtra govt to pay him Rs 2 lakh

Bombay High Court: राष्ट्रपति पदक विजेता पुलिस अधिकारी की गिरफ्तारी अवैध करार, दो लाख मुआवजा देने का भी आदेश

Tue, 26 Nov 2024 03:36 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 26 Nov 2024 03:36 PM IST
सार

Bombay High Court: बंबई उच्च न्यायालय ने हत्या मामले में एक राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता पुलिस अधिकारी की गिरफ्तारी को अवैध करार दिया। अदालत ने कहा कि गिरफ्तार करने की शक्ति का सावधानीपूर्व प्रयोग नहीं किया गया है। इसके साथ ही अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को पुलिसकर्मी को दो लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। 

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Arrest of President's medal awardee cop illegal: HC; orders Maharashtra govt to pay him Rs 2 lakh
बंबई उच्च न्यायालय - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

बंबई उच्च न्यायालय ने हत्या मामले में एक राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता पुलिस अधिकारी की गिरफ्तारी को अवैध करार दिया। इसके साथ ही अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह पुलिसकर्मी को दो लाख रुपये का मुआवजा प्रदान करे। 

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मार्च 2013 में गिरफ्तार हुआ था पुलिस अधिकारी
पुलिस अधिकारी संभाजी पाटिल ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी और सतारा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के खिलाफ जांच की मांग की थी, जिन्होंने उन्हें गिरफ्तार किया था। उन्होंने दस लाख रुपये के मुआवजे की भी मांग की थी। पाटिल को मार्च 2013 में गिरफ्तार किया गया था। उन पर 2019 के एक हत्या मामले में सबूतों को नष्ट करने और जानबूझकर दोषपूर्ण रिपोर्ट तैयार करने का आरोप लगा था। गिरफ्तारी के एक दिन बाद उन्हें जमानत दे दी गई थी। 
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'गिरफ्तार करने की शक्ति का प्रयोग सावधानीपूर्वक नहीं किया' 
न्यायमूर्ति ए.एस. चांदुरकर और न्यायमूर्ति राजेश पाटिल की खंडपीठ ने सोमवार को कहा कि गिरफ्तार करने की शक्ति का सावधानी से प्रयोग नहीं किया गया और पुलिस अधिकारी को अवैध तरीके से गिरफ्तार किया गया। खंडपीठ ने आगे गौर किया कि यह ऐसा कोई असामान्य मामला नहीं था कि जहां याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी जरूरी थी। पीठ ने कहा, याचिकाकर्ता ने अपनी अवैध गिरफ्तारी की वजह से सार्वजनिक कानून में मुआवजे की मांग की है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। 
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याचिकाकर्ता को 2004 में मिला था राष्ट्रपति पुलिस पदक
अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि याचिकाकर्ता पुलिस अधिकारी को उनकी सराहनीय सेवा के लिए जनवरी 2004 में राष्ट्रपति पुलिस पदक और उसी वर्ष उत्कृष्ट सेवा प्रदान करने के लिए उन्हें पुलिस महानिदेशक का प्रतीक चिह्न मिला था। उच्च न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता राज्य सरकार से दो लाख रुपये पाने का हकदार है। इसने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया कि वह आठ हफ्तों के भीतर याचिकाकर्ता को राशि का भुगतान करे। 


पूरा मामला क्या था
पाटिल 2009 में सतारा जिले के कराड शहर थाने के प्रभारी अधिकारी के रूप में सेवा दे रहे थे, जब उनके खिलाफ हत्या के मामले में जांच शुरू की गई थी। उनके तबादले के बाद मामले की जांच दूसरे अधिकारी से कराई गई। 2012 में याचिकाकर्ता को सतारा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने उनके द्वारा की गई जांच के तरीके को समझाने के लिए बुलाया था। इसके बाद मार्च 2013 में याचिकाकर्ता अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के सामने पेश हुआ और उसे बताया गया कि उसे सबूत नष्ट करने और जानबूझकर झूठी रिपोर्ट तैयार करने के आरोप में गिरफ्तार किया जा रहा है। 

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