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तो पहले भी हुए हैं सर्जिकल स्ट्राइक, लेकिन माना पहली बार 

Fri, 30 Sep 2016 02:08 PM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Fri, 30 Sep 2016 02:08 PM IST
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Army did surgical strike ealier too but disclose first time
जवान

भारतीय सेना के गुरुवार को एलओसी पर सर्जिकल स्ट्राइक कर आतंकी ठिकाने नष्ट करने और उन्हें बड़ा नुकसान पहुँचाने का दावा किया। हालांकि पाकिस्तानी सेना ने इन दावों का खंडन किया है। रक्षा विशेषज्ञ अजय साहनी ने बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव को बताया कि क्या होती है सर्जिकल स्ट्राइक और भारत की इस कार्रवाई में नया क्या है।

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कोई भी ऐसा सैन्य ऑपरेशन जिसमें खुफिया जानकारी के आधार पर किसी चिन्हित ठिकाने को नष्ट किया जाता है तो उसे ही सर्जिकल स्ट्राइक कहते हैं। इसमें सिर्फ ठिकाने को नुकसान पहुँचता है, उसके आस पास की इमारतों या नागरिकों को कोई नुकसान नहीं होता है।
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ऐसा नहीं है कि भारत ने पहली बार एलओसी के पार या सीमा पार ऐसा ऑपरेशन किया हो, ऐसा पहले भी होता रहा है, लेकिन ये पहली बार है जब सर्जिकल स्ट्राइक को स्वीकार किया गया है। इससे पहले भी कई बार भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक की है। जब भी दूसरी तरफ से कुछ कार्रवाई होती थी तो सर्जिकल स्ट्राइक उसका रूटीन रेस्पांस होता था।

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भारतीय डीजीएमओ को फोन कर दी सर्जिकल स्ट्राइक की जानकारी

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सेना के दावे

जब भारतीय सैनिकों को मारा गया था तब भी ऐसी सर्जिकल स्ट्राइक की गईं थीं। लेकिन ये पहली बार हुआ है जब न सिर्फ सरकार ने इसे अधिकारिक तौर पर माना है बल्कि भारत के डीजीएमओ ने फोन करके पाकिस्तान के डीजीएमओ को जानकारी भी दी है।

मुझे लगता है कि जिस तरह से इस ऑपरेशन का प्रचार किया जा रहा है उससे साफ जाहिर होता है कि इसका मकसद जितना उस तरफ नुकसान पहुंचाना था, उतना ही था कि भारत में जो राजनीतिक लोग हैं उन्हें लुभाना या उसका रुख बदलना।

क्योंकि एक तबके में ये ख्याल आ रहा था कि ये सरकार नाकाम हो रही है। पाकिस्तान को लेकर जो वादे किए गए वो पूरे नहीं किए जा रहे हैं और मोदी ने जो स्ट्रांगमैन या सशक्त नेता की छवि पेश की है वो उस पर खरे नहीं उतर रहे हैं, वो भी बाकी सरकारों की तरह नकारा हैं।

राजनीतिक कारणों से हो रहा सर्जिकल स्ट्राइक का प्रचार

Army did surgical strike ealier too but disclose first time
एलअाेसी

भारतीय सेना पहले भी इस तरह जवाब देती रही है लेकिन जिस तरह इस बार प्रचार किया जा रहा है उससे लगता है कि इसका मकसद राजनीतिक है। लेकिन इस ऑपरेशन का सिर्फ यही मकसद नहीं है।

इसका असर पाकिस्तान पर भी होगा और अंतरराष्ट्रीय असर भी होगा। पिछले दस दिनों में भारत ने ये साफ संदेश दिया है कि जो पुराना हमारा रेस्पांस देने का ढांचा था हम उससे बाहर निकल आए हैं।

हम बात करेंगे या नहीं करेंगे के नकारा चक्र से बाहर निकल चुके हैं और ये साफ कर दिया है कि हम सैन्य और अन्य विकल्प भी देखेंगे।

ये अगले बड़े ऑपरेशन की झलक भी हो सकती है?

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कै‌ब‌िनेट

इस ऑपरेशन से ये संकेत बिलकुल साफ हो गया है कि अब सैन्य विकल्प पर भी चर्चा हो रही है और इसका इस्तेमाल भी किया जा सकता है। एक और खास बात ये है कि भारत ने इसके बारे में बहुत अधिक अधिकारिक जानकारी नहीं दी है।

इतनी ही जानकारी दी गई है जिससे भारत के लोगों को तो पूरा संदेश मिल गया लेकिन बहुत ज्यादा जानकारी न देकर और बहुत बड़े दावे न करके इसका खंडन करने की गुंजाइश भी छोड़ दी। इसका भी रणनीतिक महत्व है। जरूरी नहीं है कि पाकिस्तान इसे बढ़ाए।

पाकिस्तान अपने लोगों को ये बता सकता है कि ये कोई बड़ी बात नहीं है, जो गोलीबारी होती रही है ऐसा ही है। यानि पाकिस्तान को नाक बचाने का अवसर भी दिया गया है। इसके खतरे भी हैं। यदि पाकिस्तान ने मुंहतोड़ जवाब दिया तो भारत को और भी कड़ा जवाब देना होगा और ये बिगड़ते हालात युद्ध तक पहुँच सकते हैं।

भारत और पाकिस्तान के युद्ध की जब भी बात आती है तो परमाणु हथियारों की भी बात होती है। लोगों के दिमाग में ये बात रहती है कि एक-नहीं तो दूसरा तो पागल है ही, परमाणु हथियारों का भी इस्तेमाल हो सकता है। ये एक अनदेखा डर है। ये डर भारत की ओर ज्यादा है।

नए विकल्पों पर विचार कर रही है सरकार

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भ्‍ाारतीय सेना - फोटो : File Photo

परमाणु हथियारों के युग में भी युद्ध हो सकते हैं। यूक्रेन में संघर्ष चल रहा है। इराक, सीरिया और लीबिया में संघर्ष चल रहा है। परमाणु हथियारों का ये मतलब नहीं है कि हाथ बांधकर बैठ जाएं।

इस ऑपरेशन का समय और योजना ऐसी रही है कि अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय का बहुत अधिक दबाव भारत पर नहीं आएगा। भारत ने पहले इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में बात की। पड़ोसी देशों अफगानिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और भूटान से भी बात की गई।

आज भारत की विश्वसनीयता और स्वीकार्यता पहले से कहीं अधिक ज्यादा है। भारत का प्रतिक्रिया देने का पुराना ढांचा खत्म हो चुका है और अब सरकार नए विकल्पों पर विचार करेगी। भारत की मौजूदा सरकार ये स्पष्ट दिखा रही है कि भले ही हम दो ढाई साल से कुछ न कर पाएं हों लेकिन अब हमारी नीति स्पष्ट है और सभी विकल्प खुले हैं।

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