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Armed Forces: सीमा पर सीना ताने बर्फीली हवाओं से खेल रहे हमारे जांबांज, -27 डिग्री में भी जारी है निगहबानी

Mon, 13 Jan 2025 07:41 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Mon, 13 Jan 2025 07:41 PM IST
सार

Armed Forces: देश की रक्षा में तैनात जवान किसी भी मौसम में अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटते हैं। चाहे कोई भी दिन हो या त्योहार तापमान में चाहे जितनी गिरावट क्यों न हो लेकिन हमारे जांबाज देश की आन-बान, शान के लिए सीना ताने निगहबानी करते हैं।

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Armed Forces: Our brave Soldiers are protecting country in icy winds, surveillance continues in -27 degrees
बर्फीली हवाओं में सेना की निगहबानी जारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आज लोहिड़ी और कल पोंगल, मकर संक्रांति है। पूरा देश इस त्योहार को मनाने की तैयारी कर रहा है और सुबह-सवेरे सीमा पर तैनात एक फौजी अफसर ने शुभकामनाएं भेजी। तापमान पूछा तो बताया -9 डिग्री। रात 10 बजे तक यह तापमान -20 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है। हमारे जवान हाड़ के भीतर घुसने को आतुर इस बर्फीली हवा में सीना ताने अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनकी निगहबानी जारी है और देश उनकी चुस्ती-फुर्ती में चैन की सांस ले रहा है।
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बर्फीली हवाओं से भी ज्यादा जरूरी वतन की रक्षा
लांस नायक का कहना है कि सुबह नाथुला-पास के करीब बर्फीली हवाएं चलती है, लेकिन अब तो इसे झेलने की आदत हो गई है। लांस नायक का कहना है कि इससे भी ज्यादा जरूरी अपने वतन की रक्षा है। सेना मुख्यालय और मौसम विभाग से जानकारी लेने के बाद पता चला कि लेह का तापमान भी -9 डिग्री है। लद्दाख क्षेत्र में यह -14 से -21 डिग्री सेल्सियस के बीच है। शाम 5.30 बजे वेस कैंप थ्वायस का तापमान भी -14 डिग्री था। रात 10 बजे तक यह -22 डिग्री तक चला जाता है। द्रास में -27, बटालिक में -26 डिग्री तक का तापमान है। सियाचिन का तापमान तो -20 डिग्री से लेकर -60 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है। ऐसे समय में जमी बर्फ और बर्फीली हवा के बीच में सैन्य तैनाती की कल्पना से ही रोएं से भर्रा आते हैं। जरा कल्पना कीजिए कि इतने कम तापमान में कैसे हमारे जांबाज देश की आन-बान, शान के लिए सीना ताने निगहबानी करते हैं?
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वायुसेना के पूर्व अधिकारी एयर कमोडोर वीपी सिंह 9 साल पहले थ्वायस में मिले थे। तब उनकी तैनाती थ्वायस में ही थी। वीपी सिंह कहते हैं कि देश के सैनिकों के जोश और जज्बा के सामने मौसम भी हार मान लेता है। सैन्य मुख्यालय के सूत्र बताते हैं कि चीन के 2020 में हुई गलवां झड़प के बाद तो लेह-लद्दाख क्षेत्र में चुनौतियां काफी बढ़ गई हैं। इसका एक बड़ा कारण चीन के साथ भरोसा का घटना भी है। 2020 के बाद से ही सेना के जवान तगातार वहां निगहबानी में डटे हैं। सूत्र का कहना है कि तापमान में चाहे जितनी गिरावट क्यों न हो लेकिन सीमा क्षेत्र और पिट्रेलिंग प्वाइंट की गश्त में कोई कमी नहीं आई है।  
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ITBP के जवान भी मोर्चा लेने में कम नहीं
भारत तिब्बत सीमा पुलिस(आईटीबीपी) के जवान भी जिम्मेदारी निभाने में कम नहीं। चाहे लेह-लद्दाख हो या फिर उत्तराखंड, पूर्वोत्तर की चीन से लगती सीमा, अर्ध सैनिक बल के जवान 18000 डिग्री की ऊंचाई तक गश्त करते हुए मिलते हैं। कहीं कहीं का तापमान -20 डिग्री से लेकर -60 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। दरअसल, आईटीबीपी की अवधारणा ही तिब्बत  सीमा को लेकर हुई है। भारत से लगती चीन की सीमा पर रक्षा और निगरानी के लिए इसके जवान तैनात रहते हैं। उत्तराखंड,लेह-लद्दाख, हिमांचल से अरुणाचल तक चीन से लगती भारत की सीमा पर मौसम हमेशा चुनौतीपूर्ण स्थिति में रहता है।  

पाकिस्तान सीमा पर भी 5-7 फीट तक बर्फ, लेकिन घुसपैठ पर नजर कड़ी
पाकिस्तान से लगती सीमा और निंत्रण रेखा(एलओसी) के पास भी लगातार बर्फबारी हो रही है। त्राल के डा. परवेज बताते हैं कि बर्फबारी काफी है। नियंत्ररेखा के पास करीब पांच से सात फीट तक बर्फ जम चुकी है। तापमान माइनस में है, लेकिन भारतीय सुरक्षा बलों के हौसले कम नहीं हैं। बर्फबारी के बाद ही जम्मू-कश्मीर में सीमापार से आतंकी घुसपैठ की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए भारतीय सुरक्षा बल ऐसे दुरुह मौसम में भी सीमाओं की निगहबानी कर रहे हैं।


दुश्मन के साथ-साथ स्नो बर्न से रहना होता है अलर्ट
सैन्य स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के सूत्र बताते हैं कि स्नो बर्न का खतरा तो रहता ही है। इस दौरान जवानों को शरीर का कोई अंग बाहर न निकालने के लिए सावधान किया जाता है। इसके अलावा फेफड़े में पानी भरना, मस्तिष्क में सूजन और पानी भरना, एक्यूट माऊंटेन सिकनेस, फ्रास्ट बाइट यानी ठंड से अगूठे, अंगुली, नाक, कान, गले का खतरा रहता है।
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