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Armed forces Jobs: अग्निपथ की आड़ में सेना-वायुसेना में भर्ती होने का सपना टूटा, युवा लगा रहे भर्ती की गुहार

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 11 Jan 2024 06:11 PM IST
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सार
दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहुंचे हजारों युवाओं को संबोधित करते हुए कर्नल चौधरी ने कहा, अग्निपथ योजना, देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। देश के अंदर ऐसी स्कीम लाई गई है, जिसके तहत सैनिकों के अंदर ही भेदभाव कर दिया गया...
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Armed forces Jobs: youth appealed to give appointment letters for recruitment in Army and Air Force
कांग्रेस पार्टी के 'पूर्व सैनिक विभाग' के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल रोहित चौधरी - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

सेना और वायुसेना में भर्ती होकर देश सेवा का जुनून पाले हजारों युवाओं ने गुरुवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर सरकार से नियुक्ति पत्र देने की गुहार लगाई। कांग्रेस पार्टी के 'पूर्व सैनिक विभाग' के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल रोहित चौधरी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा, केंद्र सरकार ने डेढ़ लाख से ज्यादा युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। ये सभी युवा, सेना में भर्ती होने के काबिल थे। इन्होंने भर्ती के दो पड़ाव भी पार कर लिए थे। कर्नल रोहित चौधरी ने सरकार से मांग की है कि इन युवाओं को तुरंत ज्वाइनिंग दी जाए।

अग्निपथ योजना लागू होने से पहले करीब डेढ़ लाख युवा, जिन्होंने आर्मी, एयरफोर्स और नेवी में भर्ती के लिए आवेदन दिया था, केंद्र सरकार ने उन युवाओं के 'नाम-नमक-निशान' के सपने को चूर-चूर कर दिया।

जंतर मंतर पहुंचे युवा
जंतर मंतर पहुंचे युवा - फोटो : Amar Ujala

फौज में तीन चीजों के लिए लड़ी जाती है लड़ाई

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहुंचे हजारों युवाओं को संबोधित करते हुए कर्नल चौधरी ने कहा, अग्निपथ योजना, देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। देश के अंदर ऐसी स्कीम लाई गई है, जिसके तहत सैनिकों के अंदर ही भेदभाव कर दिया गया। बिहार के चंपारण से अनेक युवा, 1100 किलोमीटर पैदल चलकर दिल्ली पहुचे हैं। फौज में तीन चीजों के लिए लड़ाई लड़ी जाती है। ये हैं 'नाम, नमक और निशान'। नाम आपका, नाम आपके परिवार का, नाम आपकी पलटन का, नाम आपके गांव का। नमक, हम इस देश के नागरिक हैं, इसकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। हमने इस देश का नमक खाया है। आज हम देश के लिए लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। निशान, कोई भी लड़ाई किसी झंडे के नीचे ही लड़ी जाती है। एक निशान तय करना पड़ता है। हां, दस सेनापति हो जाते हैं, वहां पर सेना का हारना निश्चित है। सेना का सेनापति और यूनिटी ऑफ कमांड, यह आवाज एक होनी चाहिए।

अनिल बिश्नोई
अनिल बिश्नोई - फोटो : Amar Ujala

दर-दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ा

राजस्थान से दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहुंचे अनिल बिश्नोई ने बताया, जून 2021 में हम परीक्षा देने की तैयारी कर रहे थे। तमाम तरह की मुश्किलों को झेलते हुए जब हजारों युवा, परीक्षा सेंटर पर पहुंचे, तो वहां पता चला कि परीक्षा रद्द कर दी गई है। करीब डेढ़ लाख युवाओं को निराश होकर अपने घर लौटना पड़ा। हम इस आस में बैठे थे कि हमने शारीरिक परीक्षा और मेडिकल जांच का पड़ाव पार कर लिया है। केवल एग्जाम बाकी था। उसी बीच अग्निपथ योजना आ गई। हालांकि यह भर्ती तो उससे पहले की थी। इस वजह से हमारी भर्ती को अधर में लटका दिया गया। हमें दर-दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ दिया गया। आयु निकलने के चलते हमारे पास दूसरा चांस नहीं था। कोविड के कारण हमारी परीक्षा टाल दी गई। हमें उम्मीद थी कि देर-सवेर परीक्षा होगी और हमें सेना में सेवा करने का मौका मिलेगा। अनिल सहित दूसरे युवाओं ने मोदी सरकार से मांग की है कि राम लला की खुशी हमें तभी मिलेगी, जब हमें हमारी ज्वाइनिंग मिलेगी।

राहुल गांधी ने की थी इन युवाओं से मुलाकात

कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कुछ समय पहले ही इन युवाओं से मुलाकात की थी। तब राहुल ने कहा था कि सरकार ने 'अग्निपथ' योजना की आड़ में सेना एवं वायुसेना में स्थायी भर्ती के लिए संचालित प्रक्रिया को रद्द कर, इन युवाओं की मेहनत पर पानी फेर दिया। अधिकांश युवा, बिहार के चंपारण से पैदल चलकर दिल्ली पहुंचे थे। राहुल गांधी ने इन युवाओं से मिलने के बाद एक्स पर लिखा था, 'अस्थायी भर्ती के लिए लाई गई अग्निवीर योजना (अग्निपथ) की आड़ में 2019-21 तक चली सेना एवं वायुसेना की 'स्थायी भर्ती प्रक्रिया' को रद्द कर सरकार ने अनगिनत परिश्रमी एवं स्वप्नदर्शी युवाओं की मेहनत पर पानी फेर दिया। राहुल ने लिखा, 'दुखद है कि 'सत्याग्रह की भूमि' चंपारण से लगभग 1100 किलोमीटर पैदल चल कर अपना हक मांगने दिल्ली आए इन नौजवानों के संघर्ष को मीडिया के किसी भी कैमरे में जगह नहीं मिली। 'छोटे-छोटे कमरों में रहकर बड़े बड़े लक्ष्यों को साधने वाले इन महत्वाकांक्षी छात्रों की पीड़ा शायद मुख्यधारा के मीडिया के 'प्राइम टाइम' में जगह न बना सके। हम सिर्फ 'रोजगार की बात' कर रहे इन युवाओं के संघर्ष में सड़क से लेकर संसद तक उनके साथ हैं।

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