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महामारियों के खिलाफ तैयारियां: टीके कितने कारगर, होगी जांच; राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान के गठन को मंजूरी
Wed, 27 Sep 2023 05:30 AM IST
निर्मल कांत
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 27 Sep 2023 05:30 AM IST
सार
नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) जल्द ही बाजार में मौजूद उन फ्लू और न्यूमोकोकल टीकों की क्षमताओं की जांच करेगा, जिनकी खुराक वयस्क आबादी को श्वसन या फिर रोगाणुरोधी संक्रमण से बचने के लिए दी जा रही हैं।
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टीका (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
भविष्य की आबादी और महामारी से बचाव के लिए देश के वैज्ञानिकों ने काम शुरू कर दिया है। नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) जल्द ही बाजार में मौजूद उन फ्लू और न्यूमोकोकल टीकों की क्षमताओं की जांच करेगा, जिनकी खुराक वयस्क आबादी को श्वसन या फिर रोगाणुरोधी संक्रमण से बचने के लिए दी जा रही हैं।
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केंद्र सरकार ने भविष्य की स्वास्थ्य आपदा के खिलाफ तैयारियां करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान के गठन की स्वीकृति दी है, जिसके तहत आईसीएमआर की टास्क फोर्स इस प्रोजेक्ट पर काम करेगी। साथ ही अलग-अलग मंत्रालयों को मिलाकर बनी कमेटी इसकी निगरानी करेगी। रिपोर्ट में आईसीएमआर ने साफ कहा है कि आज भारत युवाओं का देश है, लेकिन अगले 10 से 15 साल बाद यही युवा आबादी एक ऐसे वर्ग में पहुंच जाएगी जिन्हें बीमारियों का सबसे ज्यादा जोखिम रहता है। उदाहरण के तौर पर आगामी 2036 तक देश की 27 फीसदी आबादी 50 वर्ष या उससे अधिक आयु की होगी। इस आयु वर्ग में रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ती है और व्यक्ति में रोगों का जोखिम बढ़ जाता है।
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फ्लू, न्यूमोकोकल टीके ही क्यों
आईसीएमआर के अनुसार, अभी तक के साक्ष्य बताते हैं कि इन्फ्लूएंजा टीका की वजह से एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग में कमी लाई जा सकती है। साथ ही न्यूमोकोकल टीकों के जरिए रोगाणुरोधी-प्रतिरोधी उपभेदों का संचरण कम किया जा सकता है। जेरियाट्रिक सोसाइटी ऑफ इंडिया, द एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन सहित कई चिकित्सा संगठन भी इनके पक्ष में दिशानिर्देश जारी किए हैं।
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भारत के लिए 10-15 साल अहम
आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल बताते हैं कि ऊपरी श्वसन पथ संक्रमण (यूआरटीआई) रुग्णता के प्रमुख कारणों में से एक है। संयोग से वायरस के अलावा यूआरटीआई के मामले एंटीबायोटिक सेवन से भी होते हैं। एंटीबायोटिक प्रतिरोध के मामले भारत सहित दुनिया भर में पहले से ही देखने को मिल रहे हैं। दुर्भाग्य से, भारत में बुजुर्ग आबादी के लिए अब तक कोई राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम नहीं है जबकि यह हकीकत हमारे सामने हैं कि अगले 10 से 15 साल बाद हमारे पास इनकी संख्या काफी होगी। भविष्य के संकट पर सतर्क होने के लिए यह तथ्य काफी हैं।