अनुकंपा नियुक्ति पर बड़ा फैसला: मृत सरकारी कर्मचारी के आश्रित की स्वत: नियुक्ति नहीं, सख्त छानबीन जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में मृतक की वित्तीय स्थिति, उसके आश्रितों की आर्थिक निर्भरता आदि का कड़ाई से परीक्षण किया जाना चाहिए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अनुकंपा नियुक्तियों को लेकर अहम फैसला सुनाया। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि सरकारी कर्मचारी की मृत्यु की दशा में उसके आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति स्वत: नहीं होना चाहिए, बल्कि विभिन्न मानकों पर उसका कड़ी छानबीन होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में मृतक की वित्तीय स्थिति, उसके आश्रितों की आर्थिक निर्भरता आदि का कड़ाई से परीक्षण किया जाना चाहिए। जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस वी. रामासुब्रमण्यम की पीठ ने कहा कि यदि अनुकंपा नियुक्ति सेवा की शर्तों में से एक है और किसी प्रकार की जांच के बिना किसी कर्मचारी की मृत्यु पर स्वत: हो जाती है, तो इसे कानूनन अधिकार के रूप में माना जाएगा। पीठ ने कहा कि ऐसा नहीं है।
इन शर्तों के अधीन है अनुकंपा नियुक्ति
अनुकंपा नियुक्ति का आधार आटोमैटिक या स्वत: नहीं है, लेकिन यह विभिन्न मानदंडों पर सख्त परीक्षण की शर्त के अधीन है। इसमें मृतक के परिवार की वित्तीय स्थिति, मृत कर्मचारी की परिवार के प्रति आर्थिक निर्भरता, परिवार के अन्य सदस्यों के कारोबार इसके आधार हैं। अनुकंपा नियुक्ति से पहले इनका गहन छानबीन जरूरी है। इसलिए कोई यह दावा नहीं कर सकता है कि अनुकंपा नियुक्ति पाना उसका अधिकार है।
कर्नाटक के केस में दी व्यवस्था
शीर्ष कोर्ट ने ये व्यवस्था कर्नाटक के शिक्षा विभाग द्वारा दायर एक अपील पर दी। विभाग ने कर्नाटक के राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश की कर्नाटक हाईकोर्ट ने भी पुष्टि की थी। विभाग से कहा गया था कि वह भीमेश नाम के एक व्यक्ति को अनुकंपा नियुक्ति देने पर विचार करे।
भीमेश की बहन एक सरकारी स्कूल में शिक्षक थी। वह 8 दिसंबर 2010 को मर गई थी। उसके परिवार में मां, दो भाई व दो बहनें थीं। बताया गया कि मृतका अविवाहित थी और उस पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी, जो कि पूरी तरह से उसकी कमाई पर ही निर्भर थे। इसलिए भीमेश ने अनुकंपा नियुक्ति की मांग की थी, लेकिन 2012 में सक्षम अधिकारियों ने उसका दावा खारिज कर दिया। अधिकारियों ने कहा कि कर्नाटक सिविल सेवा (अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति) नियम में किया गया संशोधन, जिसमें अविवाहित महिला कर्मचारी के अविवाहित आश्रित भाई को भी अनुकंपा नियुक्ति का लाभ देने का प्रावधान किया गया था, इस मामले में लागू नहीं होगा।
उसका दावा खारिज करने के खिलाफ भीमेश कर्नाटक सैट गया था। सैट ने 2017 में उसकी अपील मंजूर कर ली और कहा कि 20 जून 2012 को लागू यह नियम पूर्व प्रभाव से इस केस में लागू होगा। उसकी बहन की मृत्यु भले 2010 में हुई हो। इस आदेश के खिलाफ कर्नाटक सरकार हाईकोर्ट गई, जिसे खारिज कर दिया गया। फिर केस सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।