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Supreme Court: अनुराग ठाकुर बीसीसीआई से जुड़ने पर लगी रोक हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे
Mon, 12 Jan 2026 07:33 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: राहुल कुमार
Updated Mon, 12 Jan 2026 07:33 PM IST
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पूर्व केंद्रीय मंत्री और हमीरपुर से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट के उस पूर्व आदेश में संशोधन के लिए शीर्ष अदालत का रुख किया है, जिसमें उन्हें बीसीसीआई के कामकाज से दूर रहने का निर्देश दिया गया था। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने दो सप्ताह बाद याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई।
अनुराग ठाकुर की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील पी एस पटवालिया ने पीठ को बताया कि 2 जनवरी 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मंत्री को तुरंत बीसीसीआई के कामकाज से दूर रहने का आदेश दिया था और उनके खिलाफ अवमानना और झूठी गवाही की कार्यवाही शुरू की थी। हालांकि, बाद में कोर्ट ने उनके खिलाफ शुरू की गई अवमानना और झूठा हलफनामा देने की कार्यवाही को समाप्त कर दिया था।
पटवालिया ने कहा कि अब अनुराग केवल उसी आदेश में संशोधन चाहते हैं, जिसमें उन्हें बीसीसीआई के कामकाज से अलग रहने को कहा गया था। इस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी, जबकि बीसीसीआई से जुड़े अन्य मामलों को तीन हफ्ते बाद सूचीबद्ध किया जाएगा। कोर्ट ने इस मामले में एमिकस क्यूरी नियुक्त किए गए वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह से कहा कि वे सभी हस्तक्षेप याचिकाओं और अंतरिम आवेदनों को विषयवार अलग-अलग करें और उन्हें उसी क्रम में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें।
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सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में भाजपा सांसद अनुराग के खिलाफ इसलिए कार्रवाई शुरू की थी, क्योंकि उन्होंने बीसीसीआई की स्वायत्तता को लेकर तत्कालीन आईसीसी अध्यक्ष शशांक मनोहर को पत्र लिखने से जुड़े मामले में गलत हलफनामा दायर किया था। हालांकि, 14 जुलाई 2017 को कोर्ट ने अनुराग की व्यक्तिगत रूप से दी गई बिना शर्त माफी स्वीकार करते हुए अवमानना की कार्यवाही समाप्त कर दी थी।
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अनुराग ठाकुर की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील पी एस पटवालिया ने पीठ को बताया कि 2 जनवरी 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मंत्री को तुरंत बीसीसीआई के कामकाज से दूर रहने का आदेश दिया था और उनके खिलाफ अवमानना और झूठी गवाही की कार्यवाही शुरू की थी। हालांकि, बाद में कोर्ट ने उनके खिलाफ शुरू की गई अवमानना और झूठा हलफनामा देने की कार्यवाही को समाप्त कर दिया था।
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पटवालिया ने कहा कि अब अनुराग केवल उसी आदेश में संशोधन चाहते हैं, जिसमें उन्हें बीसीसीआई के कामकाज से अलग रहने को कहा गया था। इस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी, जबकि बीसीसीआई से जुड़े अन्य मामलों को तीन हफ्ते बाद सूचीबद्ध किया जाएगा। कोर्ट ने इस मामले में एमिकस क्यूरी नियुक्त किए गए वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह से कहा कि वे सभी हस्तक्षेप याचिकाओं और अंतरिम आवेदनों को विषयवार अलग-अलग करें और उन्हें उसी क्रम में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें।
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सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में भाजपा सांसद अनुराग के खिलाफ इसलिए कार्रवाई शुरू की थी, क्योंकि उन्होंने बीसीसीआई की स्वायत्तता को लेकर तत्कालीन आईसीसी अध्यक्ष शशांक मनोहर को पत्र लिखने से जुड़े मामले में गलत हलफनामा दायर किया था। हालांकि, 14 जुलाई 2017 को कोर्ट ने अनुराग की व्यक्तिगत रूप से दी गई बिना शर्त माफी स्वीकार करते हुए अवमानना की कार्यवाही समाप्त कर दी थी।