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अनुप्रिया पटेल बनीं मंत्री: मिर्जापुर से दिल्ली तक का कुछ ऐसा रहा है सियासी सफर

Wed, 07 Jul 2021 07:33 PM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Wed, 07 Jul 2021 07:33 PM IST
सार

2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी अपने सहयोगी दलों को साधने में जुटी है। इसी के मद्देनजर एनडीए में शामिल और भाजपा की सहयोगी अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में मंत्री बन गई हैं।

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Anupriya Patel Profile : The political journey from Mirzapur to Delhi has been something like this
अनुप्रिया पटेल। - फोटो : ANI

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई कैबिनेट में मिर्जापुर की सांसद अनुप्रिया दल एक बार फिर शामिल हो गई हैं। उन्होंने राष्ट्रपति भवन में हुए शपथ ग्रहण समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ ली।  2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी अपने सहयोगी दलों को साधने में जुटी है। इसी के मद्देनजर एनडीए में शामिल और भाजपा की सहयोगी अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल को बार फिर मंत्री बनाया गया है।  वे 2014 में भी मोदी कैबिनेट में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री रह चुकी हैं। 

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अनुप्रिया पटेल के मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होने के कयास तभी से लग रहे थे जब पिछले महीने उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। 2019 में मोदी सरकार के गठन के बाद से ही वे मंत्रिमंडल में शामिल होने की कोशिश कर रही थीं क्योंकि 2019 में मिली दोबारा जीत पर भी उन्हें मंत्रीमंडल में शामिल नहीं किया गया। दूसरी तरफ वे उत्तर प्रदेश में योगी कैबिनेट में भी अपनी पार्टी का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए दबाव डाल रही थीं। 
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उत्तर प्रदेश विधानसभा में अभी अपना दल के नौ विधायक हैं। बताया जाता है कि वे अपने पति आशीष पटेल को योगी मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने पर जोर दे रही थीं। आशीष पटेल पहले ही भाजपा के समर्थन से 2018 में विधान परिषद के लिए चुन लिए गए हैं. लेकिन भाजपा की ओर से उन्हें कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिल रहा था। 
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अपने ही क्षेत्र में बीजेपी नेताओं से मिल रही थी उपेक्षा
इसके उलट चर्चा यह भी रही कि उनके  लोकसभा क्षेत्र मिर्जापुर में भाजपा नेता और मंत्री उनकी सुन ही नहीं रहे हैं। लेकिन एक अच्छी सहयोगी की तरह उन्होंने मोदी-योगी के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया। बल्कि अगले चुनाव में उत्तर प्रदेश में भी अपना गठबंधन बरकरार रखने का भरोसा दिया। अब जब चुनाव उत्तर प्रदेश में चुनाव हैं तो पटेल को अपना दांव चलने का एक मौका फिर मिल गया, क्योंकि पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक खास क्षेत्र में अपना दल की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।  अपना दल 2014 से ही एनडीए की सहयोगी रही है। 


पिता के निधन के बाद बनी पार्टी का मुख्य चेहरा
अपने पिता सोनेलाल पटेल के निधन के बाद वे पार्टी का मुख्य चेहरा है। सोनेलाल पटेल ने 1995 में पार्टी की स्थापना की थी। 2009 में उनकी मृत्यु के बाद उनकी पत्नी कृष्णा पटेल राष्ट्रीय अध्यक्ष और अनुप्रिया को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया। लेकिन धीरे-धीरे अनुप्रिया पर मां की अनदेखी करने और खुद को पार्टी का असली वारिस बताने का आरोप लगा। मां-बेटी के बीच पार्टी के अधिकार को लेकर विवाद हुआ और मां कृष्णा पटेल अपना गुट लेकर अलग हो गईं।

28 अप्रैल 1981 को पैदा हुईं अनुप्रिया ने उन्होंने कानपुर के छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय से एमबीए की डिग्री ली है। वे 2012 में उत्तर प्रदेश विधानसभा की सदस्य भी रह चुकी हैं। 2019 के संसदीय चुनावों में अपना दल ने दो सीटों पर चुनाव लड़ा और दोनों सीट पर जीत हासिल की। दो सांसद होने के बावजूद उन्हें मंत्री पद दिए जाने को लेकर राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा हुई थी।

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