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चिंता: मिट्टी के बैक्टीरिया में बढ़ रहा एंटीबायोटिक प्रतिरोध, मानव स्वास्थ्य के लिए भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती
Sun, 15 Jun 2025 05:18 AM IST
शिव शुक्ला
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शिव शुक्ला
Updated Sun, 15 Jun 2025 05:18 AM IST
सार
जीवाणु अब एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी होते जा रहे हैं। बढ़ते तापमान के साथ बैक्टीरिया अधिक सक्रिय, अनुकूलनशील और कठिन प्रतिरोधी बनते जाते हैं। वे उन जीन को सक्रिय करने लगते हैं जो उन्हें एंटीबायोटिक दवाओं से लड़ने में सक्षम बनाते हैं। य
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : freepic
विस्तार
जैसे-जैसे वैश्विक तापमान में वृद्धि हो रही है, मिट्टी में मौजूद बैक्टीरिया में तेजी से एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जीन (एआरजी) का स्तर बढ़ रहा है। इन जीन के कारण बैक्टीरिया उन दवाओं के प्रति प्रतिरोधक हो जाते हैं जो इन्हें नष्ट करने के लिए उपयोग की जाती हैं। यह सिर्फ स्वास्थ्य संकट नहीं बल्कि जलवायु परिवर्तन का खतरनाक और अब तक सबसे उपेक्षित पहलू भी है।
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नेचर इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन एनवायर्नमेंटल रिसर्च लेटर्स में प्रकाशित डरहम विश्वविद्यालय के नेतृत्व में किए गए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पता चला है कि जलवायु परिवर्तन अब न केवल वातावरण बदल रहा है बल्कि मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीवों की संरचना भी बदल रहा है। ऐसे जीवाणु अब एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी होते जा रहे हैं। बढ़ते तापमान के साथ बैक्टीरिया अधिक सक्रिय, अनुकूलनशील और कठिन प्रतिरोधी बनते जाते हैं। वे उन जीन को सक्रिय करने लगते हैं जो उन्हें एंटीबायोटिक दवाओं से लड़ने में सक्षम बनाते हैं। यह एक घातक जैविक प्रक्रिया है जो मानव स्वास्थ्य प्रणाली के लिए भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है। शोधकर्ताओं ने कहा कि यह बेहद खतरनाक संकेत है क्योंकि मिट्टी बैक्टीरिया का एक विशाल भंडार है और यही बैक्टीरिया धीरे-धीरे मानवों व जानवरों में संक्रमण फैलाने वाले रोगजनक जीवों तक पहुंच सकते हैं।
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2100 तक 23% तक बढ़ सकता है खतरा
शोधकर्ता मशीन लर्निंग से अनुमान लगाया कि अगर ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन ऐसे ही जारी रहा तो 2100 तक मिट्टी में एंटीबायोटिक प्रतिरोधी बैक्टीरिया 23% तक बढ़ सकते हैं। यह परिवर्तन केवल तापमान, बारिश या सूखे का विषय नहीं रह गया है, यह अब उस दिशा में भी असर डाल रहा है कि बीमारियां कैसे उत्पन्न होंगी, बदलेंगी और फैलेंगी।
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एक खामोश संक्रमण क्रांति
मिट्टी के बैक्टीरिया में बढ़ रहा एंटीबायोटिक प्रतिरोध एक खामोश संक्रमण क्रांति है। जो संक्रमण पहले कुछ दवाओं से ठीक हो जाया करते थे, वे अब असहाय बना सकते हैं और यह खतरा न केवल गरीब देशों का है बल्कि पूरी दुनिया के लिए साझा संकट है।
साइकिल चलाने से वैश्विक उत्सर्जन छह फीसदी घटेगा
दुनियाभर के शहरों में अगर पैदल और साइकिल यात्रा को बढ़ावा देने वाली नीतियों और ढांचागत विकास पर ध्यान दिया जाए तो वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में 6% तक की कमी लाई जा सकती है। इसके साथ ही स्वास्थ्य क्षेत्र को हर साल लगभग 43,500 करोड़ डॉलर का आर्थिक लाभ भी मिलेगा। यह बात यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, लॉस एंजेलिस (यूसीएलए) और गूगल के संयुक्त वैश्विक अध्ययन में सामने आई है।
शोधकर्ता कहते हैं कि पैदल और साइकिल यात्रा एक बहुआयामी समाधान है। यह न केवल जलवायु संकट से लड़ने में मदद करता है, बल्कि स्वास्थ्य, आर्थिक बचत और नागरिक जीवन की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाता है। शहरों को चाहिए कि वे अपनी भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक जरूरतों के अनुसार ऐसी योजनाएं बनाएं जो लोगों को सुरक्षित, सुलभ और स्वस्थ यात्रा के विकल्प प्रदान करें।