Maharashtra: सांगली में नौ हत्याओं के मामले में आरोपियों के खिलाफ अंधविश्वास और काला जादू की धाराएं भी जोड़ीं, जानें पूरा घटनाक्रम
महाराष्ट्र के सांगली में नौ लोगों की सामूहिक हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपी एक तांत्रिक सहित दो लोगों के खिलाफ काला जादू और अंधविश्वास विरोधी कानून की धाराएं भी जोड़ीं हैं। शनिवार को एक पुलिस अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।
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महाराष्ट्र के सांगली जिले में तांत्रिक अब्बास मोहम्मद अली द्वारा नौ लोगों की हत्या को अंजाम दिया था। पुलिस द्वारा हाल ही में इसका खुलासा किया गया था। इससे पहले कहा जा रहा था कि इन नौ लोगों ने कर्ज के चलते आत्महत्या की थी। इस मामले में पुलिस ने आरोपी एक तांत्रिक सहित दो लोगों के खिलाफ काला जादू और अंधविश्वास विरोधी कानून की धाराएं जोड़ीं हैं। शनिवार को एक पुलिस अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि पुलिस ने सोलापुर के निवासी आरोपी तांत्रिक अब्बास मोहम्मद अली बागवान और उसके सहयोगी धीरज सुरवासे के खिलाफ महाराष्ट्र मानव बलि और अन्य अमानवीय, बुराई और अघोरी प्रथाओं और काला जादू अधिनियम 2013 की रोकथाम और उन्मूलन की धाराएं भी जोड़ी गई है।
दो भाइयों के परिवार को किया खत्म
पुलिस के अनुसार तांत्रिक अब्बास व उसके सहयोगी ड्राइवर ने 20 जून को म्हैसल गांव में दो भाइयों के परिवार के खात्मे की इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया था। थोड़ी थोड़ी दूरी पर मौजूद दोनों भाइयों के घरों में नौ लोगों के शव मिलने से देशभर में सनसनी फैल गई थी। आरंभिक रूप से कहा गया था कि कर्ज में डूबे होने से सामूहिक खुदकुशी की गई है, लेकिन अब पुलिस ने पूरे मामले का राजफाश कर दिया है। मृतकों में शामिल वनमोर भाइयों में से एक शिक्षक था और दूसरा पशु चिकित्सक। कोल्हापुर रेंज के आईजी मनोज कुमार लोहिया ने इस हत्याकांड का खुलासा करते हुए यह जानकारी दी।
तांत्रिक ने 1 करोड़ रुपये ऐंठ लिए थे
आईजी लोहिया के अनुसार तांत्रिक अब्बास ने डॉ. माणिक वनमोरे और पोपट वनमोरे को उनके लिए गुप्त धन खोजने का झांसा दिया था। यह झांसा देकर उसने दोनों भाइयों से करीब 1 करोड़ रुपये ऐंठ लिए थे। इसके बाद तांत्रिक ने धन खोजने के लिए खूब ड्रामेबाजी की और जब वह विफल रहा तो वनमोरे बंधु पैसा लौटाने के लिए उस पर दबाव डालने लगे। तांत्रिक रुपये नहीं लौटाना चाहता था, इसलिए उसने वनमोरे बंधुओं के पूरे परिवार को खत्म करने की साजिश रची और खौफनाक वारदात को अंजाम दे दिया।
इस तरह दिया वारदात को अंजाम
पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी अब्बास मोहम्मद अली बागवान 19 जून को ड्राइवर धीरज चंद्रकांत सुरवशे के साथ म्हैसल गांव में वनमोरे बंधुओं के घर पहुंचा। वनमोरे के घर पर उसने छिपे खजाने को खोजने के लिए तंत्र-मंत्र शुरू किया।
- तांत्रिक ने वनमोरे परिवार के लोगों को उनके घरों की छत पर भेजा।
- इसके बाद बारी-बारी से उन्हें नीचे बुलाया और उसके द्वारा तैयार चाय पीने के लिए कहा।
- पुलिस का दावा है कि चाय में कोई जहरीला पदार्थ मिला हुआ था। जिसे पीने के बाद वनमोरे परिवार के लोग बेहोश होकर दम तोड़ते गए।
इन लोगों के मिले थे शव, सुसाइड नोट भी मिले
शिक्षक पोपट वनमोर (54), पशु चिकित्सक डॉ माणिक वनमोर (49), 74 वर्षीय उनकी मां, दोनों भाइयों की पत्नियां और चार बच्चे दोनों घरों में मृत मिले थे। सांगली पुलिस को दोनों भाइयों के घरों पर शव मिलने के साथ ही वहां सुसाइड नोट भी मिले थे। एक शव के पास एक शीशी भी मिली थी। ये देखकर पुलिस को पहले शंका हुई कि यह सामूहिक खुदकुशी का मामला है। सुसाइड नोट में कुछ साहूकारों के भी नाम थे, जिन्हें वनमोरे बंधुओं ने अपनी मौत का जिम्मेदार बताया था।
आत्महत्या के उकसाने पर 19 को गिरफ्तार किया
पुलिस ने माना कि गड़ा या गुप्त धन पाने के चक्कर में वनमोरे बंधुओं ने लोगों से कर्ज लिया हुआ था। इस पर 19 लोगों को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। घटनास्थल पर मिली शीशियों में से एक शव के पास जहर की शीशी मिली थी।
पुलिस को इसलिए हुआ शक और हो गया भंडाफोड़
जांच के दौरान पुलिस को सुसाइड नोट में दर्ज विवरण पर शक हुआ। पुलिस का कहना है कि अक्सर सुसाइड नोट में खुदकुशी करने वाला पहले इसका कारण लिखता है। इसके बाद वह अपनी खुदकुशी के जिम्मेदार लोगों के नाम लिखता है। वनमोरे बंधुओं के केस में सुसाइड नोट में सबसे पहले कुछ लोगों के नाम लिखे थे। यह भी जिक्र नहीं था कि सामूहिक खुदकुशी क्यों की जा रही है? इसके बाद शक और गहराया और पुलिस ने तांत्रिक अब्बास पर शिकंजा कसा। पुलिस का मानना है कि वनमोरे भाइयों से तांत्रिक ने किसी बहाने से साहूकारों के नाम लिखवाए होंगे, ताकि इसी कागज का सुसाइड नोट का रूप देकर पूरे मामले को सामूहिक खुदकुशी साबित किया जा सके।