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मानसून सत्र में पास हो सकता है मानव तस्करी बिल, शहरों से खत्म होंगे गैर-कानूनी रेड लाइट एरिया

Tue, 17 Jul 2018 01:51 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली 
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली  Updated Tue, 17 Jul 2018 01:51 PM IST
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Anti human trafficking bill in parliament during monsoon session

देश के विभिन्न शहरों में गैर कानूनी ढंग से चल रहे रेड लाइट एरिया को नए मानव तस्करी बिल के पारित होने के बाद हटाया जा सकेगा। मानव तस्करी रोकथाम सुरक्षा और पुनर्वास बिल 2018 को 18 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में संसद की मंजूरी मिल सकती है। नए मसौदे में जिले से केंद्र तक मानव तस्करी से निपटने का पुख्ता तंत्र होगा। 

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केंद्रीय गृह मंत्रालय के मातहत आने वाला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) एंटी ट्रैफिकिंग ब्यूरो का भी काम करेगी। अभी तक इस तरह के ऐसे मामलों की कोई सुपरवाइजरी बॉडी नहीं थी लेकिन अब कड़ी सजा के साथ राष्ट्रीय स्तर पर एक बोर्ड बनाया जाएगा ताकि इसकी निगरानी की जा सके। विधेयक को कैबिनेट की स्वीकृति मिल चुकी है। पहले बजट सत्र में पेश किया जाना था लेकिन लगातार हंगामे के कारण ऐसा नहीं हो सका।   
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इन कामों को अपराध की श्रेणी में रखा गया

विधेयक में जबरदस्ती मजदूरी, भीख मंगवाना, समय से पहले यौन परिपक्वता के लिए दवाएं और हार्मोन के इंजेक्शन देना, विवाह या विवाह का धोखा देकर महिलाओं तथा बच्चों की तस्करी को अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया है।
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इस बिल का मकसद बाल श्रम, बाल यौन शोषण, अंगों के गैर कानूनी ढंग से व्यापार, कानून के विरुद्ध काम करने में बच्चों के उपयोग, बिना नियमों का पालन किए बच्चा गोद लेना, जबरदस्ती किसी से काम लेना, महिलाओं की खरीद फरोख्त, नशा, सेक्स पर्यटन आदि की समस्या से निबटना और रोक लगाना है।

 

30 दिन के अंदर मुहैया कराई जाएगी अंतरिम सहायता

Anti human trafficking bill in parliament during monsoon session

इन कामों से मुक्त कराए गए बच्चों के संरक्षण की बात किसी कानून में नहीं थी लेकिन विधेयक में मानव तस्करी से निपटने के लिए ऐसे मामलों को समयबद्ध अवधि में निपटाया जाएगा। इसमें 30 दिन के भीतर अंतरिम सहायता और चार्जशीट दाखिल होने के बाद 60 कार्य दिवस के भीतर जरूरी सहायता दी जाएगी। 

आजीवन कारावास तक का प्रावधान

दोषी पाए जाने 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकेगी। इसके अलावा एकमुश्त रकम का जुर्माना भी लगेगा। पीड़ित को एक साल के भीतर मुख्यधारा से जोड़ने के लिए काउंसिलिंग की व्यवस्था होगी। इतना नहीं इसमें पीड़ितों के लिए पुनर्वास फंड अलग से बनाने का भी प्रावधान किया गया है।      

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