फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Literature ›   Antardhwani : That river was the first image of my country for me

अंतर्ध्वनि : वह नदी ही मेरे लिए अपने देश की पहली छवि थी

Thu, 15 Aug 2019 12:28 AM IST
निर्मल वर्मा निर्मल वर्मा
निर्मल वर्मा Published by: निर्मल वर्मा Updated Thu, 15 Aug 2019 12:28 AM IST
विज्ञापन
Antardhwani : That river was the first image of my country for me
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
मुझे बचपन का वह क्षण याद आता है, जब मैं मां के साथ ट्रेन में बैठकर जा रहा था। कहां जा रहा था कुछ याद नहीं, सिर्फ इतना याद है कि मैं सो रहा था, अचानक मुझे धड़धड़ाती-सी आवाज सुनाई दी। हमारी ट्रेन पुल पर से गुजर रही थी। मां ने जल्दी से मेरे हाथ में कुछ पैसे रखे और मुझसे कहा कि मैं उन्हें नीचे फेंक दूं। नीचे नदी में। पता नहीं, वह कौन-सी नदी थी, गंगा, कावेरी या 
विज्ञापन

नर्मदा? 

मेरी मां के लिए सब नदियां पवित्र थीं। यह मेरे लिए अपने देश 'भारत' की पहली छवि थी, जो मेरी स्मृति में टंगी रह गई है... मुझे लगता है, कि अपने देश के साथ मेरा प्रेम-प्रसंग यहीं से शुरू हुआ था...। बाद के वर्षों में मेरे भीतर यह विश्वास जमता गया, कि देशप्रेम यदि 'आत्मा की घटना' है, तो वह सिर्फ एक ऐसी संस्कृति में पल्लवित होती है, जहां 'स्पेस' और 'स्मृति' अंतर्गुंफित हो सकें। मनुष्य और पशु के संबंध की बात तो अलग रही, उन चीजों का परस्पर संबंध भी बहुत गहरा हो, जो ऊपर से अजीवंत दिखाई देते हैं... पत्थर, नदी, पहाड़, पेड़...। 
विज्ञापन


आपस में किंतु अपने अंतर्संबंधों में वे एक जीवंत पवित्रता का गौरव, एक तरह की धार्मिक संवेदना ग्रहण कर लेते हैं। क्या भारत का कोई ऐसा कोना है, जहां रामायण, महाभारत और पौराणिक कथाओं के प्रतीक मनुष्य को अपने जीवन की अर्थवत्ता पाने में सहायक नहीं होते? 
विज्ञापन
विज्ञापन


यदि एक भूखंड में जीता हुआ व्यक्ति एक 'रूपक' में अपने होने का प्रत्यक्षीकरण करता है, तो यह वहीं संभव हो सकता है, जहां भूगोल की देह पर संस्कृति के स्मृति-स्थल अंकित रहते हैं। पत्थर को छूते हुए कोई देवता, नदी का स्पर्श करते ही कोई स्मृति, पहाड़ पर चढ़ते हुए किसी पौराणिक यात्रा की अंतर्कथा ऐसे पदचिह्न हैं, जिन पर कदम रखते हुए हम अपनी जीवन-यात्रा को तीर्थ-यात्रा में परिणत कर लेते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed