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Ozone Layer: जलवायु परिवर्तन की मार, पिछले तीन साल में ओजोन की परत में सुराख का आकार बढ़ा; नई रिसर्च में दावा
Wed, 22 Nov 2023 02:44 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Wed, 22 Nov 2023 02:44 PM IST
सार
जलवायु परिवर्तन की मार के कारण पिछले तीन साल में ओजोन की परत में सुराख का आकार बड़ा हो गया है। नई रिसर्च में दावा किया गया है कि अंटार्कटिक ओजोन छिद्र का आकार बढ़ रहा है।
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अंटार्कटिक ओजोन परत में सुराख का आकार बढ़ा
- फोटो : social media
विस्तार
जलवायु परिवर्तन के कारण ओजोन परत के सुराख का आकार लगातार बढ़ रहा है। नए शोध में पिछले तीन वर्षों के दौरान अंटार्कटिक ओजोन छिद्र बढ़ने की बात सामने आई है। खबर के अनुसार, शोध में पाया गया है कि सार्वजनिक धारणा के विपरीत ओजोन परत में छिद्र पिछले तीन साल में सबसे बड़ा रहा है। नेचर कम्युनिकेशंस जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक शोधकर्ताओं ने कहा, पिछले चार साल में अंटार्कटिक के ऊपर ओजोन छिद्र उल्लेखनीय रूप से बड़ा हो गया है।
इस अध्ययन के मुताबिक ओजोन लेयर में छिद्र लंबे समय तक बना रहा है। हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके लिए केवल क्लोरोफ्लोरोकार्बन (सीएफसी) ही जिम्मेदार नहीं हैं। बता दें कि सीएफसी कार्बन, हाइड्रोजन, क्लोरीन और फ्लोरीन युक्त ग्रीनहाउस गैसों को कहा जाता है। माना जाता है कि ओजोन लेयर में सुराख का आकार लगातार बढ़ रहा है। पृथ्वी के वायुमंडल में ओजोन परत लोगों को त्वचा रोग से बचाने में मदद करती है। सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (यूवी) विकिरण को रोकने में ओजोन लेयर काफी अहम भूमिका निभाते हैं।
अध्ययन की मुख्य लेखिका हन्ना केसेनिच हैं। हन्ना न्यूजीलैंड के ओटागो विश्वविद्यालय में पीएचडी उम्मीदवार हैं। उन्होंने बताया कि अंटार्कटिक ओजोन परत का अध्ययन करने के दौरान रिसर्च टीम को 19 साल पहले की तुलना में छिद्र के केंद्र में बहुत कम ओजोन मिला।
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हन्ना केसेनिच ने कहा, शोध के दौरान पाए गए तथ्यों का मतलब है कि ओजोन लेयर में सुराख क्षेत्रफल में बड़ा है। साथ ही अधिकांश वसंत ऋतुओं के दौरान छिद्र अधिक बड़ा और गहरा भी है। रिसर्च टीम ने 2004 से 2022 की अवधि में मासिक और दैनिक ओजोन परिवर्तन का विश्लेषण किया। अंटार्कटिक ओजोन छिद्र के भीतर अलग-अलग ऊंचाई और अक्षांशों पर अध्ययन किया गया।
रिसर्च कर रहीं केसेनिच ने कहा, शोध के दौरान हमने ओजोन की परत कमजोर होने और अंटार्कटिका के ऊपर ध्रुवीय भंवर में आने वाली हवा में बदलाव के बीच संबंध का अध्ययन किया गया। इससे पता चलता है कि हाल के वर्षों में बड़े ओजोन छिद्र का कारण सिर्फ सीएफसी नहीं हो सकते।
शोधकर्ताओं का मानना है कि ओजोन लेयर में छिद्र के कारण बेहद जटिल हैं। ओजोन परत को नष्ट करने वाले पदार्थों का इस्तेमाल बंद करने के लिए 1987 का मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल अपनाया गया। इसके तहत ओजोन को नष्ट करने वाले मानव निर्मित रसायनों के उत्पादन और खपत को नियंत्रित करने का आह्वान किया गया है।
पर्यावरण के साथ खिलवाड़ और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे की अनदेखी को रिसर्च टीम चिंताजनक मानती है। शोध कर रहे लोग इस बात पर चिंता जता रहे हैं कि जनता के बीच यह धारणा है कि 'ओजोन मुद्दा' हल हो चुका है। पिछले कुछ वर्षों में ओजोन परत के बारे में कुछ प्रमुख संचार का जिक्र करते हुए, केसेनिच ने कहा, हमारा विश्लेषण 2022 के डेटा के साथ समाप्त हुआ। हालांकि, 2023 ओजोन छिद्र पहले ही तीन साल पहले के सुराख के आकार को पार कर चुका है। पिछले महीने के अंत में सुराख का आकार 26 मिलियन वर्ग किलोमीटर से अधिक था, जो अंटार्कटिका के क्षेत्रफल से लगभग दोगुना है।
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इस अध्ययन के मुताबिक ओजोन लेयर में छिद्र लंबे समय तक बना रहा है। हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके लिए केवल क्लोरोफ्लोरोकार्बन (सीएफसी) ही जिम्मेदार नहीं हैं। बता दें कि सीएफसी कार्बन, हाइड्रोजन, क्लोरीन और फ्लोरीन युक्त ग्रीनहाउस गैसों को कहा जाता है। माना जाता है कि ओजोन लेयर में सुराख का आकार लगातार बढ़ रहा है। पृथ्वी के वायुमंडल में ओजोन परत लोगों को त्वचा रोग से बचाने में मदद करती है। सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (यूवी) विकिरण को रोकने में ओजोन लेयर काफी अहम भूमिका निभाते हैं।
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अध्ययन की मुख्य लेखिका हन्ना केसेनिच हैं। हन्ना न्यूजीलैंड के ओटागो विश्वविद्यालय में पीएचडी उम्मीदवार हैं। उन्होंने बताया कि अंटार्कटिक ओजोन परत का अध्ययन करने के दौरान रिसर्च टीम को 19 साल पहले की तुलना में छिद्र के केंद्र में बहुत कम ओजोन मिला।
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हन्ना केसेनिच ने कहा, शोध के दौरान पाए गए तथ्यों का मतलब है कि ओजोन लेयर में सुराख क्षेत्रफल में बड़ा है। साथ ही अधिकांश वसंत ऋतुओं के दौरान छिद्र अधिक बड़ा और गहरा भी है। रिसर्च टीम ने 2004 से 2022 की अवधि में मासिक और दैनिक ओजोन परिवर्तन का विश्लेषण किया। अंटार्कटिक ओजोन छिद्र के भीतर अलग-अलग ऊंचाई और अक्षांशों पर अध्ययन किया गया।
रिसर्च कर रहीं केसेनिच ने कहा, शोध के दौरान हमने ओजोन की परत कमजोर होने और अंटार्कटिका के ऊपर ध्रुवीय भंवर में आने वाली हवा में बदलाव के बीच संबंध का अध्ययन किया गया। इससे पता चलता है कि हाल के वर्षों में बड़े ओजोन छिद्र का कारण सिर्फ सीएफसी नहीं हो सकते।
शोधकर्ताओं का मानना है कि ओजोन लेयर में छिद्र के कारण बेहद जटिल हैं। ओजोन परत को नष्ट करने वाले पदार्थों का इस्तेमाल बंद करने के लिए 1987 का मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल अपनाया गया। इसके तहत ओजोन को नष्ट करने वाले मानव निर्मित रसायनों के उत्पादन और खपत को नियंत्रित करने का आह्वान किया गया है।
पर्यावरण के साथ खिलवाड़ और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे की अनदेखी को रिसर्च टीम चिंताजनक मानती है। शोध कर रहे लोग इस बात पर चिंता जता रहे हैं कि जनता के बीच यह धारणा है कि 'ओजोन मुद्दा' हल हो चुका है। पिछले कुछ वर्षों में ओजोन परत के बारे में कुछ प्रमुख संचार का जिक्र करते हुए, केसेनिच ने कहा, हमारा विश्लेषण 2022 के डेटा के साथ समाप्त हुआ। हालांकि, 2023 ओजोन छिद्र पहले ही तीन साल पहले के सुराख के आकार को पार कर चुका है। पिछले महीने के अंत में सुराख का आकार 26 मिलियन वर्ग किलोमीटर से अधिक था, जो अंटार्कटिका के क्षेत्रफल से लगभग दोगुना है।