ED: 'हां या न' बोलकर सवालों का जवाब दो और पैसा कमाओ, सट्टेबाजी में भी हुई बेईमानी; ईडी ने जब्त किए 284.5 करोड़
ईडी ने मेसर्स प्रोबो मीडिया टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों या प्रवर्तकों के खिलाफ गुरुग्राम, पलवल-हरियाणा और आगरा-उत्तर प्रदेश में बीएनएस, 2023 और सार्वजनिक जुआ अधिनियम, 1867 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज कई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की।
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), गुरुग्राम क्षेत्रीय कार्यालय ने मेसर्स प्रोबो मीडिया टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रमोटरों सचिन सुभाषचंद्र गुप्ता और आशीष गर्ग से संबंधित गुरुग्राम और जींद, हरियाणा स्थित चार परिसरों में 8.7.2025 और 9.7.2025 को तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत कंपनी की भारत भर में अवैध जुआ, सट्टेबाजी गतिविधियों के संबंध में की गई। मेसर्स प्रोबो मीडिया टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड ऐप और वेबसाइट 'प्रोबो' का संचालन करती है, जो ऑनलाइन गेमिंग के लिए एक प्लेटफॉर्म प्रदान करती है। आरोपियों के ठिकानों पर तलाशी के दौरान ईडी ने 284.5 करोड़ रुपये की एफडी, शेयरों में निवेश व तीन बैंक लॉकर भी जब्त किए हैं।
ईडी ने मेसर्स प्रोबो मीडिया टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों या प्रवर्तकों के खिलाफ गुरुग्राम, पलवल-हरियाणा और आगरा-उत्तर प्रदेश में बीएनएस, 2023 और सार्वजनिक जुआ अधिनियम, 1867 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज कई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की। एफआईआर में शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि उनके साथ धोखाधड़ी की गई और उन्हें बेईमानी से "हां या न" जैसे सरल प्रश्नों के माध्यम से पैसा कमाने की योजना पेश की गई। वास्तव में यह योजना खिलाड़ियों को अधिक रिटर्न की उम्मीद में अधिक निवेश करने का लालच देकर जुए को बढ़ावा देती है।
ईडी की जांच से पता चला है कि ऐप या वेबसाइटें शुरुआत में एक वैध कौशल-आधारित प्लेटफॉर्म की भ्रामक छवि को बढ़ावा देकर अपने उपयोगकर्ताओं के साथ धोखाधड़ी करती है। अंततः एक सट्टेबाजी तंत्र के माध्यम से उनका शोषण करती हैं, जहां सफलता पूरी तरह से संयोग से तय होती है, न कि उपयोगकर्ता की क्षमताओं या अंतर्दृष्टि से। कंपनी अपने प्लेटफॉर्म को 'राय ट्रेडिंग' कहती है। इस खेल को खेलने के लिए ज्ञान या कौशल की आवश्यकता होती है। हालांकि, खेलों के विश्लेषण से पता चलता है कि सभी खेलों का उत्तर 'हां या न' में दिया जा सकता है। ऐसे में केवल दो संभावित परिणाम, इसे जुए या सट्टेबाजी से अलग नहीं करते हैं। इसके परिणामस्वरूप उपयोगकर्ताओं की मेहनत की कमाई का नुकसान होता है।
ईडी की तलाशी में यह भी पता चला है कि ऐप या वेबसाइट में नाबालिगों को उपयोगकर्ता के रूप में पंजीकृत होने से रोकने की कोई व्यवस्था नहीं है, उचित जांच-पड़ताल (केवाईसी) का अभाव है। भ्रामक विज्ञापनों के माध्यम से नए उपयोगकर्ताओं को आकर्षित किया जा रहा था। चुनाव परिणामों से संबंधित जनमत व्यापार को बढ़ावा दिया जा रहा है। जांच में यह भी पता चला कि कंपनी को मॉरीशस, केमैन द्वीप और अन्य विदेशी संस्थाओं से वरीयता शेयर जारी करने के बदले 134.84 करोड़ रुपये मिले थे। तलाशी के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डेटा जब्त किया गया। मामले की जांच अभी जारी है।