दिल्ली: कच्ची कॉलोनियों के पक्के होने की घोषणा सच्चाई कम, चुनावी लॉलीपॉप ज्यादा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों ने कच्ची कॉलोनियों को पक्का करने का वायदा कर दिया है। इससे लगता है कि अब दिल्ली के कच्ची कॉलोनियों में रहने वाले लगभग 60 लाख लोगों को अपने घरों का मालिकाना हक मिल जाएगा। लेकिन इस क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञों का कहना है कि ये घोषणाएं महज चुनावी लॉलीपॉप हैं और पिछले 26 साल से इसी तरह की घोषणाएं चुनाव के दौरान की जाती रही हैं। इस तरह ऐसा लगता है कि एक बार फिर जनता के छले जाने की बारी है। विशेषज्ञों के मुताबिक दिल्ली की कच्ची कॉलोनियों को पक्का करने के लिए कई कानूनों में संसोधन करना पड़ेगा और जनता को विशेष रियायत देनी पड़ेगी। इसके लिए लंबा समय लगेगा। इसलिए यह घोषणा कि चुनाव के पहले लोगों को मालिकाना हक मिल जाएगा, बिल्कुल गलत है।
क्या हैं अड़चनें
शहरी मामलों के विशेषज्ञ जगदीश ममगांई ने कहा कि दिल्ली में तीन तरह की जमीनों पर अवैध कॉलोनियां बनी हैं। एक किसानों की जमीनों पर लगभग 800 कॉलोनियां, दूसरी ग्रामसभा की जमीनों पर लगभग 300 कॉलोनियां और तीसरी सरकारी जमीनों पर लगभग 450-500 कॉलोनियां। इनमें पहली और दूसरी प्रकार की कॉलोनियों को तो लैंड यूज बदलकर उन पर रह रहे लोगों को मालिकाना हक दिया जा सकता है, लेकिन सरकारी जमीन पर बनी कॉलोनियों को अथॉराइज्ड बनाना टेढ़ी खीर है। इसमें वन क्षेत्र पर बनी कॉलोनियां भी शामिल हैं जिनको अथॉराइज्ड बनाने में अनुमति लेना सरकार के लिए भी आसान नहीं होगा। इसमें पर्यावरण का मुद्दा भी बड़ा रोड़ा बन सकता है।
अवैध कॉलोनियों को रेगुलराइज करने में एक अन्य बाधा कॉलोनियों की संख्या को लेकर है। वर्ष 2002 में दिल्ली का एरियल सर्वे कराया गया था। उस समय दिल्ली में 1200 से कुछ अधिक कॉलोनियों की जानकारी मिली थी जिसे बाद में शीला सरकार ने अथॉराइज करने का प्रयास किया था। लेकिन आज 1797 कॉलोनियों के होने की बात कही जा रही है। लेकिन इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि सच्चाई में दिल्ली में कितनी अवैध कॉलोनियां हैं।
एक अन्य अड़चन यह है कि अवैध कॉलोनियों को टूटने से रोकने के लिए विशेष कानून बनाया गया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट में एक वाद भी चल रहा है। अगर सरकार कॉलोनियों को पक्की करने की राह पर आगे बढ़ती है तो इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट को भी भरोसे में लेना होगा और इस प्रक्रिया में भी समय लगेगा।
सबसे बड़ा मुद्दा कच्ची कॉलोनियों को पक्का करने के लिए बिल्डिंग बाईलाज में संशोधन करना पड़ेगा। बिल्डिंग बाईलाज में पक्की कॉलोनियों में यह प्रावधान है कि 100 वर्ग मीटर के प्लॉट पर घर बनाने के लिए न्यूनतम दस फीसदी, और 250 वर्ग मीटर से अधिक प्लॉट पर 25 फीसदी जमीन रिक्त छोड़ना पड़ता है। कच्ची कॉलोनियों में रहने वालों के घर 25 वर्ग गज से 50 वर्ग गज जैसे छोटे-छोटे हिस्सों में बने हैं। ऐसे में इनके लिए जमीन छोड़ना संभव नहीं होगा। दूसरे, बने हुए घरों को तोड़कर जमीन रिक्त करने की बात भी अव्यावहारिक होगी। ऐसे में सरकार के इस फैसले का भी विरोध होगा।
अगर इन कॉलोनियों को रेगुलराइज करने की इजाजत दी जाती है तब भी किसी कॉलोनी के न्यूनतम 50 फीसदी लोगों को उससे सहमत होकर जमीन को रेगुलराइज करने के लिए एक शुल्क चुकाना होगा (जैसे कि दुकानों को अनुमति देने के लिए लगाया गया था), इसे चुकाने में भी सभी लोग सक्षम नहीं होंगे क्योंकि इन इलाकों में बेहद निम्न तबके के लोग रहते हैं।
इन कॉलोनियों को नियमित करने के लिए इनकी हदबंदी करनी भी अनिवार्य है। इसके बिना कॉलोनियों को वैध नहीं किया जा सकता। लेकिन अभी तक इन कॉलोनियों की हदबंदी नहीं हुई है। इसमें भी समय लगेगा।
महत्त्वपूर्ण घटनाक्रम
- 6 मार्च 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने मालिकाना हक देने के मुद्दे पर विचार करने के लिए उपराज्यपाल की अध्यक्षता में एक 10 सदस्य समिति का गठन किया।
- 29 दिसंबर 2014 को भी 7 फरवरी 2015 को होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव को नजर में रखते हुए मोदी कैबिनेट ने दिल्ली में 2000 अनधिकृत कॉलोनियों के नियमित करने की घोषणा की थी।
- वर्ष 2012 में भी कॉलोनियों को नियमित करने की अधिसूचना केंद्र सरकार द्वारा जारी हुई थी, क्योंकि इसके अगले ही वर्ष 2013 में दिल्ली के विधानसभा चुनाव थे।
- दिसंबर 1993 में दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना ने 31 मार्च 1993 तक बनी 1071 कॉलोनियों को नियमित करने का प्रस्ताव विधानसभा में पारित किया।
- अक्टूबर 2004 में दिल्ली की शीला दीक्षित सरकार ने 31 मार्च 2002 तक बनी अनधिकृत कॉलोनियों से आवेदन और ले-आउट प्लान आमंत्रित किए। आरडब्ल्यूए के माध्यम से 448 ओवरलैपिंग के साथ कुल 1642 आवेदन सरकार के पास आए।
- वर्ष 2007 में यूपीए सरकार के केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने अनधिकृत कॉलोनी, गांव एवं झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्र में हुए अवैध निर्माण पर एक वर्ष के लिए कार्रवाई रोकने के लिए अधिसूचना जारी की।
- अक्टूबर 2008 में (दिसंबर 2008 में दिल्ली विधानसभा चुनाव से केवल दो माह पहले) तत्कालीन सीएम शीला दीक्षित ने अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के नाम पर छत्रसाल स्टेडियम में एक विशाल रैली की। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के हाथों 1218 अनधिकृत कॉलोनियों को अंतरिम (प्रोविजनल) प्रमाण पत्र बंटवाया।
- फिलहाल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (विशेष प्रावधान) को दिसंबर 2020 तक विस्तार मिला हुआ है।