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Anjel Chakma Death: एंजेल चकमा के परिजनों ने आरोपियों के लिए मौत की सजा की मांग की, मामा ने बताई आखिरी इच्छा

Tue, 30 Dec 2025 07:39 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Tue, 30 Dec 2025 07:39 PM IST
सार

देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या हो गई। अब इस मामले में उनके परिवार ने आरोपियों के खिलाफ मृत्युदंड या आजीवन कारावास की मांग की है। इसके साथ ही एंजेल के मामा ने बताया कि उसकी आखिरी इच्छा थी कि वह नेपाल जाकर बर्फबारी देखे।

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Anjel Chakma's family demanded the death penalty for the accused maternal uncle revealed his last wish
एंजेल चकमा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

देहरादून में छात्र एंजेल चकमा की हत्या के मामले में उनके परिवार ने दोषी के खिलाफ कड़ी सजा की मांग की है। एंजेल चकमा के परिवार ने कहा कि सभी आरोपियों के लिए मृत्युदंड या आजीवन कारावास की मांग की। एंजेल पर उसके छोटे भाई माइकल की सामने में युवकों के एक समूह ने हमला किया था। इसके बाद 17 दिनों तक जीवन के लिए संघर्ष करने के बाद 26 दिसंबर को एंजेल ने दम तोड़ गया। एंजेल की आखिरी इच्छा को याद करते हुए, उसके मामा मोमेन चकमा ने कहा कि उसका भतीजा नेपाल जाकर बर्फबारी देखना चाहता था।

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एंजेल की आखिरी इच्छा उनके मामा पूरी करेंगे

 मोमेन ने पीटीआई को बताया "उन्होंने यात्रा की तैयारी के तहत खास जूते मंगवाए थे, जब वह आईसीयू में भर्ती हुए, तब जूते पहुंचे। मैं उनकी अधूरी इच्छा पूरी करने के लिए उन्हीं जूतों के साथ नेपाल जाऊंगा। "मोमेन ने आगे कहा कि, "हम एंजेल को कभी वापस नहीं पा सकेंगे, लेकिन उसका परिवार इस जघन्य हत्या में शामिल लोगों के लिए मौत की सजा या कम से कम आजीवन कारावास चाहता है। एंजेल ने बार-बार कहा था कि वह एक भारतीय है, लेकिन हत्यारों ने बेरहमी से उसकी पीठ में दो बार चाकू मारा और उसकी गर्दन तोड़ दी, जिसके कारण 17 दिनों तक जीवन के लिए संघर्ष करने के बाद उसकी मृत्यु हो गई।"

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जल्द नौकरी करने वाले थे एंजेल
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि पूर्वोत्तर के लोगों को नस्लीय घृणा अपराधों का सामना न करना पड़े, इसके लिए कदम उठाए जाएं। मोमेन ने फोन पर बताया, "एंजेल अपने अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा के बाद एक कंपनी में नौकरी करने वाला था क्योंकि उसे प्रथम वर्ष के परिणाम के आधार पर नौकरी का प्रस्ताव मिला था, जिसमें उसने 80 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे।" मोमेन ने बताया कि एंजेल ने अपने पिता तरुण प्रसाद चकमा, जो मणिपुर में तैनात बीएसएफ जवान हैं, से कहा था कि नौकरी मिलते ही वह स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले लें। उनहोंने कहा कि इस घटना से एंजेल का परिवार पूरी तरह से सदमे में है। पिता और छोटा बेटा दोनों एक सप्ताह के लिए स्थानीय मठ में 'सारेमा' (बौद्धों द्वारा पालन किया जाने वाला एक अनिवार्य मृत्युोत्तर अनुष्ठान) में भाग ले रहे हैं। उनकी मां, गौरी मति चकमा भी पूरी तरह से टूट चुकी हैं।

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पिता कर्ज में डूबे हैं

मोमेन ने कहा कि एंजेल का परिवार अनिश्चितता की ओर बढ़ रहा है क्योंकि उसके पिता ने भारी कर्ज लेकर अगरतला के बाहरी इलाके नंदननगर में एक नया घर खरीदा था। उन्होंने कहा, "इसके अलावा, एंजेल ने देहरादून से एमबीए करने के लिए शिक्षा कर्ज लिया था। हम सभी जानते हैं कि देहरादून में ऐसा कोर्स करना महंगा होता है। अब सब कुछ बर्बाद हो गया है। त्रिपुरा के समाज कल्याण मंत्री टिंकू रॉय ने एंजेल की मां गौरी मति चकमा से उनके घर पर मुलाकात की और उन्हें वित्तीय सहायता के रूप में 9.12 लाख रुपये के दो चेक सौंपे।

 

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