पड़ताल: भ्रष्टाचार में फंसने वाले पहले मंत्री नहीं देशमुख, घोटाले की आंच से पहले भी झुलस चुका महाराष्ट्र
- अनिल देशमुख पर 100 करोड़ की वसूली का आरोप
- सीबीआई जांच के आदेश के तीन घंटे बाद दिया इस्तीफा
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महाराष्ट्र में एंटीलिया केस के बाद सामने आए वसूली कांड राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख को पूरी तरह शिकंजे में ले लिया। इस मामले में सीबीआई जांच के आदेश हुए तो महज तीन घंटे बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि अनिल देशमुख भ्रष्टाचार में फंसने वाले महाराष्ट्र के पहले मंत्री नहीं हैं। उनसे पहले कई दिग्गज नेता भी घोटाले की आंच में झुलस चुके हैं। यहां तक कि आदर्श सोसायटी घोटाले में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण को भी इस्तीफा देना पड़ गया था।
इस मामले में फंसे अनिल देशमुख
सबसे पहले हम आपको बताते हैं कि आखिर अनिल देशमुख को महाराष्ट्र के गृहमंत्री पद से इस्तीफा क्यों देना पड़ा? दरअसल, मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर विस्फोटकों से भरी कार मिलने के बाद महाराष्ट्र एटीएस और पुलिस लगातार सवालों के घेरे में थी। जांच की सुई धीरे-धीरे असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वाजे की ओर मुड़ी तो घेरे में तत्कालीन पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह भी आ गए। तबादला होने के बाद उन्होंने गृहमंत्री अनिल देशमुख पर 100 करोड़ रुपये की वसूली का आरोप लगाया और बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। कोर्ट ने अनिल देशमुख के खिलाफ सीबीआई जांच का आदेश जारी किया और 15 दिन में रिपोर्ट सौंपने को भी कहा। इसके बाद अनिल देशमुख ने इस्तीफा दे दिया।
आदर्श सोसायटी घोटाला
महाराष्ट्र की सियासत में आदर्श सोसायटी घोटाला बदनुमा दाग की तरह है। दरअसल, करगिल युद्ध के शहीदों की विधवाओं के लिए मुंबई में आदर्श कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी बनाई गई थी। उस दौरान अशोक चह्वाण महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे। कहा जाता है कि उन्होंने अपने रिश्तेदारों को बहुत ही कम दाम पर ये घर दे दिए। वहीं, दूसरे नेताओं और सेना के अधिकारियों ने भी इन घरों की खरीद-फरोख्त की। पूर्व आर्मी चीफ जनरल दीपक कपूर और एनसी विज, नेवी चीफ एडमिरल माधवेन्द्र सिंह और वाइस-चीफ जनरल शांतनु चौधरी को भी इस सोसायटी में घर मिले। मामला सामने आने के बाद महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल आ गया और तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण को इस्तीफा देना पड़ गया।
चाय घोटाला: रोजाना 18,500 कप की खपत
जब महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस की सरकार थी, उस दौरान चाय घोटाला भी सामने आया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कार्यालय में रोजाना 18,500 कप चाय की खपत है। इसके लिए कांग्रेस की ओर से आंकड़े भी जारी किए गए। कांग्रेस नेता संजय निरूपम ने आरटीआई का हवाला देते हुए तीन साल के दौरान सीएमओ में हुई चाय की खपत का ब्यौरा दिया था। आरटीआई के मुताबिक, 2017-18 में महाराष्ट्र सीएमओ में 3,34,64,904 रुपये की चाय पी गई, जबकि वर्ष 2015-16 में यह आंकड़ा 57,99,150 रुपये था।
चूहा घोटाला
देवेंद्र फडणवीस के शासन काल में ही महाराष्ट्र में चूहा घोटाला भी सामने आया था। दरअसल, महाराष्ट्र सरकार में तत्कालीन मंत्री एकनाथ खडसे ने दावा किया था कि उन्होंने एक सप्ताह में 3,19,400 चूहों को मारा। इस पर कांग्रेस ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया था और घोटाला होने का आरोप लगाया। इसके बाद फडणवीस सरकार ने दावा किया कि चूहे मारने के लिए 3,19,400 कीटनाशकों का इस्तेमाल किया गया।